आपकी बात, कोरोना से बच्चों को बचाने के लिए क्या सरकार ने पर्याप्त उपाय कर लिए हैं?

आपकी बात, कोरोना से बच्चों को बचाने के लिए क्या सरकार ने पर्याप्त उपाय कर लिए हैं?

By: Gyan Chand Patni

Published: 20 May 2021, 07:22 PM IST

फिलहाल पर्याप्त इंतजाम नहीं
कोरोना की तीसरी लहर की खबर ने सभी की चिंता बढ़ा दी है। अभी तो दूसरी लहर से ही हम लोग उबरे नहीं हैं, तो तीसरी लहर की खबर से चिंताएं बढऩा जायज है। दूसरी लहर से पूर्व सरकारों ने अपना कीमती समय चुनाव में गंवा दिया, जबकि उन्हें दूसरी लहर से निपटने के लिए तैयारियां करनी चाहिए थी। इसी का परिणाम है कि अब तीसरी लहर के लिए संसाधन जुटाना मुश्किल हो रहा है। तीसरी लहर में बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, जिनका न तो अभी तक टीकाकरण हो पाया है और न ही उनके इलाज के लिए कोई पुख्ता इंतजाम हो पाए हैं। एक परेशानी यह भी है कि बच्चे के प्रभावित होने पर माता-पिता को भी उसकी देखरेख करनी पड़ेगी और वे भी अभी तक टीकाकरण से वंचित हैं। ऐसे में तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए सरकार के इंतजाम फिलहाल नाकाफी ही नजर आते हैं।
- पंकज कुमावत, जयपुर
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आग लगने पर कुआं खोदने की प्रवृत्ति
बच्चों को कोरोना से बचाने की कोई भी कोशिश सामने नहीं आ रही है। जो योजना बनाई भी जा रही है, वह शैशव काल में है। आग लगने पर कुआं खोदने की बात चल रही लगती है। वैज्ञानिकों की बात सुनी नहीं जा रही है। गंभीर समय में भी दल छीछालेदर के खेल में लगे हैं। लगता है रहनुमा अब भी गंभीर नहीं हैं। जब दिखावे का खेल किया जा रहा है, तो सिवाय निराशा के कुछ नजर नहीं आता।
-विनोद यादव, हनुमानगढ़
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व्यवस्था ठीक करने की जरूरत
कोरोना की दूसरी लहर से लडख़ड़ाते हुए संभले सरकारी प्रयास अब तीसरी लहर से निपटने की तैयारी कर रहे हंै। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पर्याप्त ऑक्सीजन, बेड और दवाइयों की व्यवस्था कर ली गई है। यहां तक तो सब ठीक है, पर सबसे बड़ी समस्या सिस्टम की है। अगर हर चीज आम जनता को आसानी से उपलब्ध करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़े तो इलाज में देर हो सकती है।
-ममता पुरी, जोधपुर
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अभी काफी तैयारी जरूरी
विशेषज्ञों द्वारा की गई घोषणा के अनुसार कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक होगी, लेकिन दूसरी लहर की भयावह स्थिति को देखते हुए सरकार द्वारा तीसरी लहर के लिए किए जा रहे प्रयास नाकाफी हंै। वर्तमान समय में सरकार के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं है, शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञों का अभाव है , बच्चों के वार्ड की कमी है। सरकार को मौजूदा स्थिति को देखते हुए युद्धस्तर पर स्थाई या अस्थाई संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी, अन्यथा तीसरी लहर बच्चों के लिए काफी गंभीर हो सकती है।
- संजय मीणा, जाखल, झुंझुनूं
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न बरती जाए कोताही
जहां तक बच्चों को बचाने के लिए पर्याप्त सावधानियों का सवाल है, तो इसके लिए बड़ी तैयारी करना जरूरी है। चिल्ड्रन कोविड सेंटर, पर्याप्त दवा और ऑक्सीजन की भरपूर व्यवस्था बच्चों को महामारी से बचाने के जरूरी उपाय हैं। अभी इस पर सरकार पूरी तरह अपना ध्यान नहीं लगा पाई है। अगर तीसरी लहर से बचने की तैयारी में जरा भी कोताही बरती गई तो हालात भयावह हो सकते हैं।
-अमृतलाल मारू, दसई, धार, मध्यप्रदेश
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जरूरी है सतर्कता और तैयारी
कोरोना की दूसरी लहर से लड़ाई चल ही रही है और तीसरी लहर की आशंका भी सता रही है। बताया जा रहा है कि यह लहर बच्चों को अपना शिकार बना सकती है। सरकार को अभी से कदम उठाने चाहिए। बच्चों के लिए अलग हॉस्पिटल, डॉक्टर की अलग टीम और बेसिक जरूरतों का प्रबंध समय से पहले करके रखना चाहिए। जब तक बच्चों को वैक्सीन नहीं लग जाती तब तक हमारी सतर्कता और हमारी तैयारी ही इस लहर से हमें बचा सकती है।
-रितु शेखावत, जयपुर
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नहीं हो कोई लापरवाही
कोविड की तीसरी लहर से बच्चों के प्रभावित होने की आशंका है। मीडिया के बार-बार सचेत करने के बाद सरकार ने छोटे-मोटे प्रोटकॉल जारी करने की घोषणा की है, जो कि पर्याप्त नहीं है। सरकार दूसरी लहर से निपटने में विफल रही और अब तीसरी लहर के दौरान कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
अमित, मालवीय नगर, जयपुर
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चिकित्सा संसाधनों को बढ़ाने की आवश्यकता
देश के वैज्ञानिकों एवं डॉक्टरों के अनुसार कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है। इसमें खासकर बच्चो में संक्रमण फैलने का अंदेशा है। देश में मौजूदा चिकित्सा सुविधाओं को देखते हुए बच्चों में संक्रमण रोकने के लिए चिकित्सा संसाधन और बढ़ाने की आवश्यकता है। अतिशीघ्र बच्चों के लिए वैक्सीन का ट्रायल करके इनका टीकाकरण किया जाए। सम्पूर्ण टीकाकरण से ही देश को कोरोना से बचाया जा सकता है। इसके लिए वैक्सीन उत्पादन क्षमता बढ़ानी होगी। अभी तक 18 वर्ष की आयु से ऊपर के लोगों का सम्पूर्ण टीकाकरण नहीं हुआ है। ऐसे मे बच्चों को संक्रमण से बचाना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
-तेजपाल गुर्जर, हाथीदेह, श्रीमाधोपुर
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सबक की जरूरत
कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को ज्यादा खतरा हो सकता है। अभी दूसरी लहर को ही सरकार काबू में नहीं कर पा रही है। देश की बड़ी आबादी को अभी वैक्सीन भी नहीं लग पाई है। ऐसे में सरकार तीसरी लहर की क्या तैयारी कर रही है, यह समझ से परे है। यदि सरकार ने पूर्व में ही चिकित्सा सुविधाओं का प्रबंध नहीं किया, तो तीसरी लहर बच्चों के लिए घातक साबित हो सकती है। ।
-डॉ.अजिता शर्मा, उदयपुर
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हो सकते हैं भयावह परिणाम
कोरोना से बचाव के लिए सरकार के उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। हमने इससे पहले भी कोरोना की दूसरी लहर को हल्के में लिया, जिसके भयावह परिणाम देखने को मिले। यही हालात रहे, तो तीसरी लहर कितनी भयावह होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि बच्चों की चिकित्सा के इंतजाम किए जाएं।.
-सुदर्शन सोलंकी, मनावर, धार, मप्र
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निगरानी तंत्र की जरूरत
बच्चे घर में ही रहते हैं, जब बड़ों का ही वैक्सीनेशन नहीं हुआ तो उसका प्रभाव बच्चों पर तो होगा ही। जिस प्रकार दिल्ली में बच्चों के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया गया है, उसी प्रकार सभी राज्यों तथा जिलों में भी ऐसा किया जाए। यह निगरानी तंत्र हमारे बच्चों को तीसरी लहर से बचाने में भी कारगर हो सकता है।
-एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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बंद ही रहें शिक्षण संस्थान
कोरोना की दूसरी लहर युवा वर्ग, प्रौढ़ वर्ग एवं बुजुर्गों के लिए भारी साबित हुई। इसे देखते हुए कोरोना की तीसरी लहर इससे भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है। तीसरी लहर में विशेषकर बच्चों पर ज्यादा कोरोना का प्रहार होगा। इसलिए शिक्षण संस्थान तो बंद ही रखे जाने चाहिए। साथ ही वैक्सीनेशन पर भी ज्यादा जोर दिया जाना चाहिए।
-सुरेंद्र मामराज बिंदल जयपुर
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ठोस कदम उठाने की जरूरत
देश में कोरोना वायरस की आक्रामकता बढ़ती ही जा रही है। कोरोना वायरस की इस दूसरी लहर में बडी़ संख्या में बच्चे भी तेजी से संक्रमित हो रहे हैं। तीसरी लहर ज्यादा खतरनाक हो सकती है। इस बीच सरकार भी अपनी कमर कस चुकी है, हालांकि और ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
-समराज चौहान, कार्बी आंग्लांग, असम
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सरकार के भरोसे न रहें
फिलहाल लगता नहीं है कि सरकार ने प्रर्याप्त उपाय कर लिए हैं। हमें सरकारी दावों पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए। हमें अपने स्तर पर भी बच्चों को बचाने के लिए उनकी इम्युनिटी बढ़ाने के प्रर्याप्त उपाय करने होंगे।
-निकिता महावर, महेश नगर जयपुर
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बच्चों के लिए भी वैक्सीन अभी दूर
केंद्र सरकार की वैक्सीन की खरीद, वितरण प्रक्रिया और नीति अस्पष्ट होने से वैक्सीन आपूर्ति में कमी तथा गड़बड़ाते पंजीयन से वैक्सीनेशन की गति अत्यंत धीमी है, जबकि सबसे बड़ा सुरक्षा कवच वैक्सीन है। उल्लेखनीय है कि बच्चों के लिए वैक्सीन तैयारी में हम अभी पिछड़े हुए हैं। इसलिए सरकार पर निर्भर रहने की बजाय अभिभावकों को अपने बच्चों का ध्यान खुद ही रखना होगा।
-बी एल शर्मा , उज्जैन

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