आपकी बात, क्या भारतीय राजनीति में अपराधियों का प्रभाव बढ़ गया है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 12 Jul 2021, 07:45 PM IST

राजनीति अब अपराधियों के लिए आरक्षित
हर नेता अपने साथ अपराधियों की फौज लेकर चलता है। जिस राजनेता के साथ जितने अधिक अपराधी होते है, वह उतना ही बड़ा राजनेता है। अब तो हालत यह हो गई है कि राजनेता बनने से पहले अपराधी बनना जरूरी है। जनता के सामने मीठी-मीठी बातें करने वाले नेता अपनी बात मनवाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाते हैं। इसका उदाहरण अभी-अभी राजस्थान विधानसभा के उप चुनावों में देखने को मिला था, जहां एक प्रत्याशी को चुनाव लडऩे से रोकने के लिए उसके कर्नाटक स्थित व्यापार को चौपट करने की धमकी तक दी गई। अब तो लगता है कि गांधी के इस देश में अपराधियों का ही राज कायम होने वाला है। अपराधी जिसका सहयोग या समर्थन करते है, वही नेता चुनाव की वैतरणी को पार कर पाता है। ऊपर से बहुत ही अच्छे व्यवहार का प्रदर्शन करने वाला नेता पर्दे के पीछे क्या-क्या गुल खिला रहा है, ये अब किसी से छुपा नहीं है। भारतीय राजनीति में अपराधियों का प्रभाव ही नहीं बढ़ा है, बल्कि अब राजनीति अपराधियों के लिए ही आरक्षित हैं। अच्छे और चरित्रवान लोग तो इस क्षेत्र में जाने का साहस ही नहीं जुटा पाते।
-अशोक कुमार जैन, कोटा
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धर्म और जाति के आधार पर वोट का असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में मंत्रिमंडल का विस्तार और पुनर्गठन किया है। जिन मंत्रियों को शामिल किया गया है, उनमें से कई गंभीर अपराधों के मामले के आरोपी भी शामिल हैं। जब देश के प्रधानमंत्री ही अपने सहयोगियों में आपराधिक छवि के लोगों को शामिल कर लेते हैं, तो फिर भारतीय राजनीति में अपराधियों के बढ़ते प्रभाव को कैसे रोका जा सकता है? जब तक देश में अपने काम के नाम पर वोट मांगने की जगह धर्म और जाति के नाम पर वोट मांगे जाते रहेंगे, तब तक बाहुबलियों और आपराधिक छवि के लोगों को राजनीति में आने से कैसे रोकेंगे और कौन रोकेगा? आज देश की राजनीति को यदि बेदाग और साफ सुथरी छवि वाली बनानी है, तो पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता यह हो कि सभी राजनीतिक दल इस पर गंभीरता से चिंतन करें। साथ ही भारतीय निर्वाचन आयोग को सशक्त बनाने की जरूरत है। आज का चुनाव आयोग नख-दंत विहीन है, जो अपराधियों के राजनीति में आने से रोकने में पूर्णत: अक्षम है।
-दिनेश बंसल, शाहबाद, बारां
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मतदाताओं की गलती
भारतीय राजनीति में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। राजनीति और अपराध इन दोनों का भारत में चोली दामन का साथ सा लग रहा है। मतदाता भी लगातार गलती करते हुए ऐसे नेताओं को वोट देकर जिता देते हैं। भारतीय राजनीति में अपराधियों पर शिकंजा कसना होगा। राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों को भी ऐसे नेताओं के टिकट नहीं देने चाहिए। उसूलों पर राजनीति करने वालों को टिकट मिले, ताकि वे जनता और देश की सेवा ईमानदारी से कर सकें। नेता एक बार सत्ता में आने के बाद अपनी अलग टीम बना लेते हैं। इसके बाद अपने नाम और रसूख के दम पर कानून का दुरुपयोग करने लगते हैं।
-मुस्ताक खिलजी देणोक, लोहावट, जोधपुर
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फिर कैसे कम होंगे अपराधी
वर्तमान में आपराधिक छवि के नेता भी मंत्री बन रहे हैं। इनको भारत की जनता मूक बन झेल रही है। इन मंत्रियों के पास अकूत संपत्ति है, जिससे ये किसी को कुछ नहीं समझते हैं। वे मनमानी करते है। अभी ताजा मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ, जिसमें कई मंत्री दागी हैं। ऐसी स्थिति में राजनीति में अपराधी कम कैसे होंगे?
-अरुण भट्ट, रावतभाटा।
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जनता को संभलना होगा
भारतीय राजनीति में अपराधियों का प्रभाव बढ़ रहा है। पैसे के बलबूते पर नेता वोट को भी खरीद लेते हैं या दूसरे तरीके से जनता को भी अपने जाल में फंसा लेते हैं। इसलिए जनता को ही संभलना होगा।
-सुरेंद्र बिंदल, जयपुर
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अपराधियों को नेताओं की शह
देश की राजनीति में अपराधी तत्वों के हस्तक्षेप से लूट, हत्या, बलात्कार तथा तस्करी जैसे संगीन अपराधों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। पुलिस व प्रशासन की सख्त मुस्तैदी के बावजूद अपराध रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। आपराधिक प्रवृत्ति के लोग अपना वर्चस्व बढ़ाने के लिए राजनीतिक पैठ का गलत इस्तेमाल करते हैं। राजनेता भी अपने क्षेत्र में दबदबा बनाए रखने के लिए ऐसे लोगों का साथ देते हैं। ज्यादा धन व नाम कमाने के चक्कर में कानून के खिलाफ जाकर अनुचित कार्यों को बढ़ावा दिया जाता है।
-भागचंद मेहर, झालावाड़
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बाहुबलियों का वर्चस्व
देश की राजनीति में बाहुबलियों का वर्चस्व बढ़ रहा है, जो भविष्य में लोकतंत्र के खतरा साबित हो सकता है। सभी राजनीतिक दल बाहुबलियों के बल पर ही सत्ता हथियाने की कोशिश में लगे रहते है। अत: कोई भी शरीफ इंसान भारत की राजनीति में कदम रखना नहीं चाहता है और कदम रख भी दे तो वह टिक नहीं पाता। राजनीति साफ-सुथरी होनी चाहिए, तभी देश की समस्याओं का समाधान होगा।
-आशुतोष मोदी, सादुलपुर, चूरु
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राजनीति बनी अपराधियों की शरणस्थली
आपराधिक प्रवृत्ति के ख्यातनाम चेहरों के लिए भारतीय राजनीति शरण स्थली बन चुकी है। कई अपराधिक मामले दर्ज होने के उपरांत भी राजनीतिक दल इन्हें चुनाव में अपने दल का मुखौटा बनाकर मैदान में उतारते हैं और इनके रौब का इस्तेमाल आम जन को प्रभावित करने के लिए करते हैं। गौरतलब है कि अपराधियों को सदैव राजनीतिक संरक्षण प्राप्त रहा है। सभी राजनीतिक दलों के कई जनप्रतिनिधियों व पदाधिकारियों के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं, लेकिन राजनीतिक प्रभाव के चलते इन मामलों की कोई सुनवाई नहीं होती है।
-सुदर्शन शर्मा, चौमूं, जयपुर
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कम हो सकते हैं अपराध
हमारे देश में अपराध बढऩे का मुख्य कारण नेताओं का अपराधियों को संरक्षण देना है। मोदी सरकार को सबसे पहले अपनी पार्टी और सहयोगी पार्टियों से जुड़े नेताओं पर ध्यान देना चाहिए। गलत काम करने वाले नेताओं पर प्रहार करना चाहिए। देश में अगर नेता गलत काम करने वालों को संरक्षण देना छोड़ दें, तो देश में अपराध कम हो सकते हैं।
-राजेश कुमार चौहान, जालंधर।
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राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी
राजनीति में अपराधियों का बढऩा तभी कम हो सकता है, जब राजनीतिक दल अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को महत्व न देकर साफ सुथरी छवि वाले लोगों को बढ़ावा दें। वोट देते समय देशवासियों को ध्यान रखना है कि वे किसी आपराधिक छवि के व्यक्ति को वोट न दें।
-श्रीकृष्ण पचौरी ग्वालियर मध्यप्रदेश ।
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बिगड़ गया राजनीति का स्वरूप
संसद हो या विधानसभाएं आपराधिक प्रवृत्ति के नेता हर जगह हैं। यह भारतीय राजनीति के बिगड़ते स्वरूप को दर्शाता है। बाहुबल, धनबल, दलबदल का त्रिसूत्र भारतीय राजनीति को दूषित कर रहा है। लोकसभा में 43 फीसदी सांसद दागी हैं। 29 फीसदी (हलफनामे के हिसाब से)सांसदों के खिलाफ हत्या, बलात्कार,अपहरण जैसे गंभीर मामले लंबित हैं। यह भारतीय राजनीति में अपराधियों के प्रभाव का सबूत है।
-शिवजी लाल मीणा, जयपुर
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अपराधी और राजनेता का गठजोड़
वर्तमान में राजनीति और अपराध एक सूत्र में बंध चुके हैं। अपराधी और राजनेता का गठजोड़ एक ही सिद्धांत पर चलता है-'एक रहो और राज करो '। इसके पीछे मूल कारण राजनीति में योग्यता को मानदंड ना मानकर धन और बाहुबल के आधार पर जनप्रतिनिधियों को चुना जाता है। इससे राजनीति में अपराधियों को बढ़ावा मिल रहा है। इसके समाधान के लिए योग्यता और शिक्षा को जन प्रतिनिधियों को चुनने का आधार बनाना होगा।
-डॉ. शशिकांत बैरवा, मालपुरा, टोंक
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लोकतंत्र पर असर
देश की राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण के परिणामस्वरूप आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। इनकी उपस्थिति का लोकतंत्र की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। राजनीतिक प्रभाव के कारण अपराधियों के विरुद्ध जांच प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
-डॉ.अजिता शर्मा, उदयपुर
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राजनीति बनी स्वहित का माध्यम
नेता पहले अपराधियों की सहायता से चुनाव जीतकर राजनीति में अपने आपको मजबूत करते थे। धीरे-धीरे अपराधियों को राजनीति रास आने लगी। अब अपराधी स्वयं चुनाव लड़कर सत्ता पर कब्जा करने जुट गए हैं। अपराधी तत्वों के लिए राजनीति स्व-हित साधने का साधन है। वे देश सेवा का मात्र दिखावा करते हैं।
-आरसी शर्मा, मानसरोवर, जयपुर

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