आपकी बात, क्या देश में ऑक्सीजन की कमी से एक भी रोगी की मौत नहीं हुई ?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 23 Jul 2021, 06:31 PM IST

गलत बयानों से बिगड़ी छवि
कोरोना की दूसरी लहर की त्रासदी कौन भूल सकता है। लोग ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था के लिए भागदौड़ कर रहे थे। अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से कितनी ही जानें चली गईं। कुछ तस्वीरें तो ऐसी भी सामने आई कि पत्नी अपने पति को मुंह से सांस दे रही थी। इसके बावजूद सरकार यह मानने को तैयार नहीं है कि किसी रोगी की मौत ऑक्सीजन की कमी की वजह से हुई है। इस तरह के बयानों से साबित हो जाता है कि देश सरकार गलत बयानबाजी कर रही है। यह तानाशाही है। तीसरी लहर की तैयारी की जगह यह सरकार अपनी छवि सुधारने में लगी है। ध्यान रहे कि गलत बयानों से छवि में सुधार नहीं होता।
-नटेश्वर कमलेश, चांदामेटा, मध्यप्रदेश
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आंकड़ों की हेराफेरी
ऑक्सीजन की कालाबाजारी की खबरों से पटा अखबार, विदेशों से पहुंचती ऑक्सीजन, ऑक्सीजन नहीं मिलने से अस्पताल के बाहर बिलखते परिजन, यह सारी तस्वीर आज भी पूरे विश्व को याद हैं। कोरोना के दौरान सबसे ज्यादा किल्लत ऑक्सीजन की देखी गई। इस बीच में इतनी सारी मौतें हुईं। फिर भी सरकार के मंत्री कह रहे हैं कि ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत नहीं हुई। शर्म आनी चाहिए सरकार के मंत्रियों को। देश की जनता को समझना चाहिए कि आंकड़ों में हेराफेरी कर किस तरह सरकारें अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करती हैं और देश की आम जनता को मूर्ख समझती हैं। अगर राज्यों सरकारों ने आंकड़े नहीं दिए तो केंद्र सरकार क्या कर रही थी?
- अणदाराम बिश्नोई, जयपुर
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गैर जिम्मेदाराना बयान
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर हाहाकार मचा रहा लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से जानकारी दी गई है कि दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई है। सरकार का यह बहुत ही गैर जिम्मेदाराना बयान है। आखिर ऐसा कह कर वह देश को क्या बताना चाहती है। पूरी दुनिया यह जानती है कि भारत में सर्वाधिक मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई है। असंख्य लोगों ने अपनी आंखो के सामने अपने प्रिय को दम तोड़ते हुए देखा है क्योंकि ऑक्सीजन नहीं थी। जिनके परिवार के लोग ऑक्सीजन की कमी से मारे गए हैं, सरकार का यह बयान पढ़कर उनके ऊपर क्या गुजर रही होगी ?
-प्रदीप कुमार दुबे, देवास
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नहीं खुली आंखें
सरकार का बयान अत्याधिक दु:खदायी है। कोविड -19 एक सामान्य स्वास्थ्य विकार नहीं है, जिसे राज्य की जिम्मेदारी तक सीमित कर दिया जाए। कोविड -19 अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य समस्या हैं, जिस संबंध मे सुप्रीम कोर्ट भी केंद्र सरकार को लताड़ लगा चुका है । वह यह टिप्पणी कर चुका है कि आप आंखें बंद कर सकते हैं हम नहीं। फिर भी केन्द्र सरकार की आंखें नहीं खुली।
-वीरेंद्र प्रताप सिंह, रीवा, मध्यप्रदेश
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सच आए सामने
देश में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसका कोई ना कोई परिचित कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से मरा नहीं हो। ऑक्सीजन की कमी की सच्चाई को समाचार पत्र व मीडिया ने बखूबी सबके सामने रखा है। यह कहना कि देश में ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत नहीं हुई बेमानी होगा। सरकारों को सच्चाई उजागर करनी ही चाहिए ।
-पूरण सिंह राजावत, जयपुर
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सच छिपाने का प्रयास
देश में बड़ी संख्या में ऑक्सीजन की कमी से लोग मौत के मुंह में समा गए। किसी के बुढ़ापे का एकमात्र सहारा छिन गया, तो किसी के माथे का सिंदूर मिट गया। हालात बदतर थे। वास्तविकता तो यह है कि, चाहे केंद्र हो या राज्य कोई भी अपनी गलती स्वीकार नहीं करना चाहता। सत्य को छिपाने से बेहतर है, सत्य को स्वीकार करके समस्या का निदान किया जाए, ताकि ऐसा दौर फिर किसी को ना झेलना पड़े।
-कुमकुम सुथार ,रायसिंहनगर श्रीगंगानगर
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सच्चाई स्वीकारनी चाहिए
केंद्र सरकार ने कहा है कि ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत नहीं हुई। इस बयान से देश भर में असंतोष का माहौल पैदा हो गया है। अप्रेल और मई में हर जगह ऑक्सीजन की कमी थी। देश भर में हवाई और रेल मार्ग द्वारा जगह-जगह ऑक्सीजन उपलब्धता के प्रयास युद्धस्तर पर किए गए थे। ऑक्सीजन की कमी के चलते जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उनकी पीड़ा सरकार को दिखाई नहीं दे सकती है। उस दौर मे तेजी से ऑक्सीजन प्लांट का जगह जगह स्थापित करना भी ऑक्सीजन की आपूर्ति की कमी को दर्शाता है। ऑक्सीजन की कमी से अनेक मौतें हुई हैं, यह सरकार को स्वीकार करना चाहिए।
-छाया कानूनगो, बेंगलूरू, कर्नाटक
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गलती छिपाने की कोशिश
देश में अस्पताल में बेड तक की सुविधा के लाले पड़ रहे थे। ऑक्सीजन की सुविधा मिलना तो बहुत मुश्किल था। दुर्भाग्य की बात तो यह है कि अपनी कमियां छुपाने के लिए सरकार कुछ भी कर सकती है।
-रमेश पोटलिया आदर्श चवा, बाड़मेर
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दर-दर भटक रहे थे लोग
बीता हुआ वह समय बहुत भयावह था, जिसे भूला नहीं जा सकता। लोग ऑक्सीजन के सिलेंडर के लिए दर-दर भटक रहे थे, जिससे वे अपने लोगों की जान बचा सकें। यह दृश्य लोग अब तक नहीं भुला पाए। हां, यह भी सच्चाई है कि कई रोगियों की कई अन्य कारणों से भी मौतें हुई, परन्तु ऑक्सीजन की कमी भी कई रोगियों की मौत का कारण था, जिसे झुठलाया नही जा सकता।
-सरिता प्रसाद पटना, बिहार
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प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या आवश्यकता
सरकार के द्वारा संसद में दावा किया गया कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी की वजह से एक भी मौत नहीं हुई। इसके विपरीत स्थितियां उलट थी, अनेक लोग ऑक्सीजन के अभाव में मर रहे थे। निजी और सरकारी अस्पतालों में आवश्यकता से अधिक मरीज होने के कारण लोगों को ऑक्सीजन संकट का सामना करना पड़ रहा था। इस वजह से तड़प-तड़प कर कई लोग सड़कों और अस्पतालों के बाहर ही मौत के मुंह में समा गए। प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता क्यों? क्या सरकार इन स्थितियों से अनभिज्ञ है?
-अजिता शर्मा, उदयपुर
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बच सकते थे कई लोग
चुनाव व कुंभ मेले के कारण कोरोना की दूसरी लहर का का संक्रमण इतनी तेजी से फैला कि सरकार को संभलने का मौका ही नहीं मिला। दूसरी लहर में ऑक्सीजन सिलेंडरों की मांग ज्यादा थी, लेकिन सरकार यह व्यवस्था नहीं कर सकी। अवसरवादी लोगों ने सिलेंडरों की जमाखोरी कर ली। निजी अस्पताल ने लूट शुरू कर दी। अस्पतालों में ऑक्सीनज की कमी से लाशों के ढेर लग गए। श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए शवों की कतारें लग गईं। अगर सरकार चुनाव की बजाय कोरोना के इलाज के लिए सिलेंडर व दवाइयों की व्यवस्था पर ध्यान देती तो, कई लोगों को बचाया जा सकता था।
-लता अग्रवाल, चित्तौडग़ढ़
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तथ्यहीन आंकड़े
सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोरोना काल में कुशल प्रबंधन के तथ्यहीन आंकड़े पेश कर लोगों के जीवन का अधिकार का भी मजाक बनाया गया है। सदी की सबसे दुखद जनहानि के मामले में गैर जिम्मेदारीपूर्ण बयान निंदनीय है।
-कुमार मोहित सारस्वत, हनुमानगढ
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प्रजा का मजाक बनाया
सरकार का मानना है कि कोरोना की दूसरी लहर में चार लाख से ज्यादा लोग मारे गए, लेकिन दावा यह किया जा रहा है कि ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत नहीं हुई। प्रजातंत्र में ऐसा झूठ प्रजा का मजाक बनाना है। ऐसे बयानों से जनता का विश्वास टूट टूट कर बिखर जाएगा।
-मुकेश भटनागर, वैशालीनगर, भिलाई
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ऑक्सीजन की कमी
यह तथ्य है कि भारत में ऑक्सीजन की कमी से कई रोगियों की मौत हुई। लोग अपने परिजनों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था करने के लिए परेशान होते रहे। मुंह मांगे दाम देने के लिए तैयार हो गए, लेकिन ऑक्सीजन नहीं मिली। इससे कई रोगियों ने दम तोड़ दिया।
-राशि विश्वकर्मा, भोपाल
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कालाबाजारी क्यों होती ?
यदि देश में ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत ना होती, तो फिर ऑक्सीजन की इतनी कालाबाजारी क्यों होती? स्वास्थ्य को राज्य सूची का विषय बता कर, तो कभी अनर्गल बयानबाजी कर राजनीति की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट तथा हाई कोर्ट ने इस विषय पर स्वयं प्रसंज्ञान लिया था तथा पूरे देश में ऑक्सीजन की कमी के वीडियो वायरल हुए थे। ऑक्सीजन की कमी से आम व्यक्ति ही नहीं वीआइपी तक अपनी जान गंवा बैठे। ऐसे में अपनी नाकामी छुपाने तथा जवाबदेही से बचने के लिए गलत बयानबाजी की जा रही है।

-एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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सही नहीं है सरकार
केंद्र सरकार ने ऑक्सीजन की कमी से कारण किसी भी रोगी की मौत से इंकार किया है। ऑक्सीजन की कमी से देशभर में मचे हाहाकार से सभी परिचित हैं।ऑक्सीजन की कमी होने वाली मौतों से इंकार नहीं किया जा सकता। जनता की नजर में सरकार की बात भी सही नहीं है।
-शकुंतला महेश नेनावा, इंदौर, मप्र
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तड़प-तड़प पर हो गई मौत
कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी से पूरे देश में बहुत मौतें हुई हैं। ऑक्सीजन की कमी से जनता को बहुत ही ज्यादा परेशानी उठानी पड़ी और तड़प-ड़प कर लोगों को मौत हुई थी। समय पर ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं होने से लोग अपनों को अपनी आंखों के सामने खो रहे थे।
-हमीर मेघवंशी, लवारन, जोधपुर
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वास्तविकता किसी से छिपी नहीं
अभी अप्रैल-मई की ही तो बात है जब कोरोना की दूसरी लहर ने हर किसी को परेशान कर रखा था। हर तरफ ऑक्सीजन के लिए लोग भटक रहे थे। लंबी- लंबी लाइनें लग रही थी। अखबार और टीवी समाचारों में भी ऑक्सीजन की कमी के समाचार और दिल दहला देने वाली तस्वीरें थी। इसके बावजूद केंद्र सरकार ऑक्सीजन की कमी से कोई भी मौत न होना बता रही है। क्या आंकड़े छिपाने से सच्चाई को दबा दिया जाएगा? वास्तविकता किसी से छिपी नहीं है। सरकार आंकड़ों को न छिपाए। जनता सब कुछ जानती है।
-साजिद अली, इंदौर

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