सेहत : मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल का समय

वर्ष 2019 में वुहान से चला कोरोना आज हमारे घर तक पहुंच चुका है। कोरोना महामारी के पश्चात न जाने कितने लोग मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं।

By: विकास गुप्ता

Published: 20 Apr 2021, 07:11 AM IST

डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी

चार महीने पूर्व कोरोना संक्रमण से उबर चुके 36 वर्षीय लवलेश कोरोना की दूसरी लहर के आने के बाद घबराहट, बेचैनी और अनिद्रा की शिकायत लेकर मनोचिकित्सक के पास पहुंचते हैं। उनके मन में बार-बार यह आशंका आ रही है कि कहीं उन्हें फिर से कोरोना तो नहीं हो जाएगा। वहीं बेंगलूरु के नामी कॉलेज में 2020 में एमबीए में दाखिला लेनी वाली पूजा इस बात से काफी परेशान है कि उसका पूरा कोर्स ऑनलाइन ही हो जाएगा, व्यावहारिक ज्ञान लिए बिना ही उनकी डिग्री पूरी हो जाएगी। कमल फ्रंटलाइन वर्कर है, वह अवसाद और गिल्ट से जूझ रहा है, क्योंकि कोरोना पीडि़त होने के कारण वह अपने पिता की अंतिम यात्रा में शामिल नहीं हो पाया। वर्ष 2019 में वुहान से चला कोरोना आज हमारे घर तक पहुंच चुका है। कोरोना महामारी के पश्चात न जाने कितने लोग मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। भविष्य की आशंका, महामारी का उपचार एवं स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अनिश्चितता, रोजगार छिनने का डर, परिवार से दूर होना, बदली दिनचर्या, आर्थिक असमानता क्वारंटीन/आइसोलेशन से मनोरोग को बढ़ावा मिल रहा है। हेल्थ केयर वर्कर्स भी निराशा, चिड़चिड़ेपन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन रोगों के सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं - मन का लगातार दुखी रहना, चिंता से घिरे रहना, नींद की आदतों में बदलाव, अनियंत्रित क्रोध, ओवरथिंकिंग, स्वयं को नुकसान पहुंचाने के विचार आना, बार-बार हाथ धोना, ताले चेक करना, बड़ी-बड़ी बातें करना, शक बना रहना, नशे का आदी होना इत्यादि ।

कोरोना संक्रमण से बचाव के साथ ही साथ हम सबको अपने मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना होगा। पारिवारिक जुड़ाव हमारे मानसिक स्वास्थ्य का सबसे बड़ा संरक्षक है। घर के बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि अधिकतर बुजुर्ग टेक्नोलॉजी से नहीं जुड़े रहने के कारण काफी अकेला महसूस कर रहे हैं। अपनों से संवाद मानसिक स्वास्थ्य का संरक्षक है। वास्तविक स्थिति को आत्मसात कर योजनाएं बनाएं, स्क्रीन टाइम को यथासंभव कम करें, एक्सरसाइज डिप्रेशन और ऐंगजाइटी डिसऑर्डर से बचने का बड़ा हथियार है। नींद की समय सारणी के प्रति अनुशासन बेहद महत्त्वपूर्ण है। नशे से बचें। इन सबके बाद भी अगर लक्षण बने रहें तो मनोचिकित्सक से अवश्य मिलें ।

कोविड-19 संक्रमण के बीच मानसिक स्वास्थ्य पर किए जा रहे सभी शोध पत्रों का निष्कर्ष यही है कि महामारी का मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। मानसिक रोग बाह्य रूप से विध्वंसक दिखाई नहीं देते। इसलिए इन रोगों के प्रति गंभीरता का अभाव रहता है,जबकि किसी भी देश की उत्पादकता का सीधा संबंध उसके नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य पर निर्भर होता है। भारत समेत पूरा विश्व कोरोना महामारी के समानांतर मानसिक रोगों से जुड़ी महामारी से जूझ रहा है। ऐसे में जरूरत है कि प्रत्येक भारतीय के मानसिक स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग की जाए।

(लेखक मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट और सुसाइड के खिलाफ 'यस टु लाइफ' कैंपेन चला रहे हैं)

विकास गुप्ता
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