बढ़ानी होगी नए आयकरदाताओं की संख्या

कर विशेषज्ञों की राय में विभिन्न विकासशील देशों की तुलना में भारत में छिपे हुए आयकरदाताओं की संख्या बहुत अधिक है।

By: सुनील शर्मा

Published: 11 Dec 2017, 01:01 PM IST

- डॉ. जयंतीलाल भंडारी, आर्थिक मामलों के जानकार

हाल ही केंद्र सरकार ने आयकर अधिनियम 1961 के स्थान पर नया आयकर कानून लाने और नई प्रत्यक्ष कर संहिता (डायरेक्ट टैक्स कोड-डीटीसी) का मसौदा तैयार करने के लिए सात सदस्यीय कार्यबल का गठन किया है। यह कार्यबल अन्य देशों की प्रत्यक्ष कर प्रणालियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू प्रत्यक्ष कर संधियों का तुलनात्मक अध्ययन करेगा और छह महीनों के भीतर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। उल्लेखनीय है कि प्रत्यक्ष कर का मतलब ऐसे कर से है, जो सीधा किसी व्यक्ति की आय, सम्पत्ति व अन्य मदों पर लगाया जाता है। इसे अन्य लोगों पर हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है।

प्रत्यक्ष करों में आयकर के अलावा कॉरपोरेट कर, पूंजीगत लाभ कर, संपत्ति कर, उपहार कर प्रमुख हैं। पिछले एक दशक से मौजूद आयकर कानून में परिवर्तन की बात आर्थिक एवं वित्तीय क्षेत्र से लगातार उठती रही है। इसके लिए प्रयास भी हुए पर मई 2014 में लोकसभा भंग होने के साथ ही प्रत्यक्ष कर संहिता विधेयक, 2010 स्वत: समाप्त हो गया। अब केंद्र सरकार एक बार फिर नए आयकर अधिनियम और नई प्रत्यक्ष कर संहिता की दिशा में आगे बढ़ी है। सामान्यतया वेतनभोगी वर्ग द्वारा निर्धारित आयकर चुकाया जाता है लेकिन देश में सेवा क्षेत्र और स्वयं का कारोबार करने वाला एक ऐसा बड़ा वर्ग है, जो आयकर के दायरे से दूर है।

नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर अप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च के मुताबिक वर्तमान में देश में मध्यम वर्ग के 17 करोड़ लोगों में से 46 फीसदी क्रेडिट कार्ड, 49 फीसदी कार, 52 फीसदी एसी तथा 53 फीसदी कम्प्यूटर के मालिक हैं। इनमें से बड़ी संख्या में लोग आयकर नहीं चुकाते हैं। पिछले एक वर्ष में नोटबंदी के कारण कालाधन जमा करने वाले लोगों में जब घबराहट बढ़ी तो वे नए आयकरदाताओं के रूप में दिखाई भी दिए हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार आयकरदाताओं की संख्या 2016-17 में 2015-16 की तुलना में 23 फीसदी बढ़ी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विभिन्न विकासशील देशों की तुलना में भारत में अभी भी संभावित आयकरदाताओं या आय छिपाने वालों की संख्या बहुत अधिक है। नए आयकर कानून के बनने से अब तक लागू आयकर के कर नियम पलट जाएंगे। इनमें वे नियम भी हंै, जो 55 वर्षों में विभिन्न अदालतों के आदेशों से बने हैं। ऐसे में आयकर के सहायक नियमों, फॉर्मों और प्रक्रियाओं सहित पूरे कर ढांचे को बदलना होगा। नए कानून में कर की प्रभावी दर घटाने, नए करदाता बढ़ाने, प्रशासनिक बोझ आसान बनाने और विवादास्पद मसलों पर मुकदमेबाजी घटाने पर ध्यान देना होगा।

सुनील शर्मा
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