सवाल राज्यों में स्थानीय को नौकरी कितना उचित, जवाब टूट जाएगा संघीय ढांचा

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था कि क्या राज्यों में स्थानीय नागरिकों को नौकरी देने का निर्णय कितना उचित है। जवाब में मिलीजुली प्रतिक्रिया आई। पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: shailendra tiwari

Updated: 26 Aug 2020, 05:47 PM IST

चरमरा सकता है संघीय ढांचा
स्थानीय लोगों को ही सरकारी नौकरी से भ्रष्टाचार के मामले बढ़ सकते हंै, वहीं सरकारी सिस्टम की पारदर्शिता पर भी प्रश्न चिह्न लग सकता है। स्थानीय लोगों को आरक्षण देने से मैनपॉवर गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है, वहीं लालफीताशाही बढऩे की आशंका रहेगी। अत: योग्यता एवं क्षमता को दरकिनार नहीं किया जा सकता और यह तभी सम्भव है, जब सम्प्रभुता के साथ भारत की विविधता सुचारू रूप से बनी रहे। भारत का संघीय ढांचा स्थानीय लोगों को ही सरकारी नौकरी देने के कानून को बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। किसी राज्य में ऐसा हुआ, तो हर राज्य अपने यहां स्थानीय -क्षेत्रीय अस्मिता की राजनीति को हवा देगा और स्थानीय लोगों के लिए पढ़ाई से लेकर निजी व सरकारी नौकरियों और कारोबार में भी आरक्षण की व्यवस्था कर सकता है। इससे भारत जैसे सम्प्रभु राष्ट्र का संघीय ढांचा चरमराएगा। अत: मेरा मानना है कि सरकारी क्षेत्र हो या प्राइवेट क्षेत्र, योग्यता और क्षमता के पैमाने पर ही चयन हो।
-डा.नयन प्रकाश गांधी, कोटा
..........
सभी को मिले रोजगार
राज्यों में स्थानीय लोगों को ही रोजगार देना उचित नहीं है, क्योंकि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है। संविधान के अनुसार एक राज्य के नागरिक दूसरे राज्य में जाकर भी रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। दूसरे राज्य के लोगों को रोजगार नहीं देना अनुचित होगा। सभी राज्यों के लोगों को रोजगार दिया जाना चाहिए
-दिव्यांशु राठौर, राजस्थान
................

बाहरी लोगों का कोटा तय किया जा सकता है।
क्षेत्रवाद के आधार पर किसी दूसरी जगह के व्यक्ति को नौकरी से वंचित करना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है, क्योंकि संविधान देश में सभी जगह रहने और रोजगार पाने का हक देता है। रोजगार को राज्य की सीमा में बांधने की बजाय रोजगार के अधिक अवसर सृजित करने पर जोर होना चाहिए, ताकि जो मूल समस्या बेरोजगारी है, उससे निजात मिल सके। सभी राज्य यदि अपने ही प्रदेश के स्थानीय लोगों को सरकारी नौकरी देने के लिए कानून या प्रस्ताव बनाने लगे, तो इससे विषमताएं उत्पन्न होंगी और राष्ट्रीयता की मूल भावना पर आघात होगा। एक तय सीमा तक स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता दी जाती है, तो उसमें कोई एतराज नहीं है, क्योंकि इससे रोजगार के लिए पलायन जैसी समस्या पर कुछ हद तक अंकुश लगेगा। राजस्थान में भी सरकार अन्य राज्यों के युवाओं के लिए कोटा तय कर सकती है।
-कमल वर्मा, फुलेरा, जयपुर
......................

नहीं मिले बाहरी लोगों को सरकारी नौकरी
राज्यों में स्थानीय लोगों को ही सरकारी नौकरी देनी चाहिए। स्थानीय लोगों को ही अगर परीक्षा में बैठने का मौका दिया जाए, तो स्थानीय नौकरियों को स्थानीय व्यक्ति आसानी से प्राप्त कर सकता है। अपने-अपने राज्यों में ही व्यक्तियों को सरकारी नौकरी पाने का अवसर मिलना चाहिए। इससे वह व्यक्ति अन्य राज्यों में सरकारी नौकरी को पाने के लिए फॉर्म ही नहीं भरेगा। इससे सरकारी नौकरी के लिए मारामारी नहीं रहेगी।
-इंदिरा जैन, शाहपुरा,भीलवाड़ा
...............

श्रमिकों की अबाध आवाजाही जरूरी
औद्योगीकरण और विकास के लिए श्रमिकों की अबाध आवाजाही जरूरी शर्त है। इससे उद्योगों को वाजिब दर पर स्किल्ड श्रमिक मिल जाते हैं और श्रमिकों को भी काम का उचित दाम मिल जाता है। देश के कई राज्यों में ऐसी बहसें चल पड़ी हैं कि दूसरे राज्यों के लोग आकर उनके यहां की नौकरियां चुरा ले रहे हैं। इसलिए उनके अपने राज्य के युवा बेरोजगार हैं। इसे रोकने के लिए राज्य की नौकरियों को अपने ही राज्य के युवाओं के लिए रिजर्व करने या ऐसी मांग करने का चलन बढ़ रहा है।
-कुश नीरज शर्मा , बारां
..............

राज्यों के बीच विभाजन बढ़ेगा
राज्य में स्थानीय लोगों को रोजगार उचित तब है, जब देश के सभी राज्य मध्यप्रदेश जैसे इस नियम को लागू करें। अनुचित तब है जब कुछ राज्य ही इसे लागू करते हैं। यह भी ध्यान रखना होगा कि अब अगर ये नियम लागू हो जाता है, तो फिर देश तो राज्यों में बंट जाएगा। जातिगत आरक्षण ने ही बहुत बर्बादी कर दी। अब अगर ये नियम भी आ गया, राज्यों के बीच विभाजन बढ़ जाएगा।
-शिवराज सिंह राठौड़ डीडवाना, नागौर
................

राजस्थान में भी लागू हो प्रावधान
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा है कि मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए ही है। फिर राजस्थान में सरकारी भर्ती में बाहरी अभ्यर्थियों को मौका क्यों दिया जा रहा है? इसलिए राजस्थान में भी बाहरी लोगों को सरकारी नौकरी नहीं दी जानी चाहिए।
-दिनेश कुमार पाटीदार, सागवाड़ा, डूंगरपुर
.................

स्थानीय लोगों को ही मिले नौकरी
राज्यों में स्थानीय लोगों को ही सरकारी नौकरी देने का प्रस्ताव उचित है, क्योंकि तब लोगों को नौकरी के लिए दूसरे राज्यो में प्रस्थान नहीं करना पड़ेगा। अपने राज्य में ही नौकरी मिलने से बेरोजगारी कम होगी। राज्यों का विकास होगा, साथ ही राज्यों के लोगो को भी समानता के आधार पर उचित अवसर प्राप्त होंगे। कुल मिलाकर सभी का विकास संभव होगा। इसलिए यह विचार उचित है।
-निहारिका डागा, जोधपुर
................

क्षेत्रवाद को मिलेगा बढ़ावा
राज्यों में स्थानीय लोगों को ही रोजगार देना बिल्कुल भी उचित नहीं है। इससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान अवरुद्ध हो जाएगा और क्षेत्रवाद को बढ़ावा मिलेगा। इससे भारत की विविधता में एकता की भावना को भी आघात पहुंचेगा ।
-नीरज तम्बोली, डूंगरपुर
..............

स्थानीय लोगों को मिले प्राथमिकता
स्थानीय लोगों को रोजगार देने से एक राज्य से दूसरे राज्य में युवाओं को भटकना नहीं पड़ेगा। साथ ही समय व धन की भी बर्बादी नहीं होगी। रोजगार में पहली प्राथमिकता स्थानीय लोगों को मिलनी चाहिए। उसके बाद जगह खाली हो तो बाहर वालों को रोजगार देना चाहिए।
अर्जुन सिंह बारड ,़ अनादरा
.................
पलायन पर लगाम
राज्य में स्थानीय लोगों को रोजगार देना वक्त की मांग है। इससे अनावश्यक पलायन रुकेगा और लोगों में कार्य करने की रुचि पैदा होगी। स्थानीय अभ्यर्थी सम्बंधित राज्य की संस्कृति, इतिहास एवं साहित्य का ज्ञान रखता है, जिससे राज्य की उन्नति तीव्र गति से होगी। इससे संवाद भी सहजता से होगा एवं कार्य प्राथमिकता से पूर्ण हो सकेगा।
-दिनेश जांगू, लोहावट।
...............

अनुचित कदम
राज्य सरकारों का अपने राज्य के लोगों को नौकरी में तरजीह देना अनुचित है। आज जब प्राइवेट सेक्टर में बिहार का आदमी मुम्बई में नौकरी कर सकता है, तो मुम्बईकर बिहार में किसी सरकारी स्पर्धा में चयनित हो कर बिहार सरकार की सेवा क्यों नही कर सकता। महिलाओ को जरूर स्टेट कोटे का लाभ मिलना चाहिए।
अभय गौतम, कोटा
.....................

पिचहत्तर प्रतिशत पद स्थानीय लोगों को दें
राज्यों में करीब पिचहत्तर प्रतिशत पदों पर स्थानीय लोगों की ही नौकरी दी जानी चाहिए, जिससे राज्यों से पलायन भी रुकेगा। स्थानीय ज्यादा सक्रियता से काम करेंगे, क्योंकि वे अपने आसापास के परिवेश से ज्यादा परिचित होते हैं।
चुन्नी लाल पालीवाल, उदयपुर
...............

दूसरी समस्याएं बढ़ेंगी
राज्यो में स्थानीय लोगो को ही नौकरी देने के पीछे सरकार का उद्देश्य अपने लोगों की चिंता दर्शाता है, लेकिन अगर किसी का इंटर स्टेट विवाह हुआ है, तो पति या पत्नी में से सिर्फ 1 को ही नौकरी मिलेगी। दूसरा ये कि भारत मे कोई ऐसा राज्य नहीं जो स्वयं में सारी सुविधायुक्त व पूर्णतया आत्मनिर्भर हो। फिर भारत जैसे विशाल देश में लोगों के परिवार फैले हुए हैं। सरकार के इस आदेश से लोगो को असुविधा हो सकती है
बेंजामिन, उदयपुर
............

स्थानीय लोगों को मिले रोजगार
वसुधैव कुटुम्बकम् की धारणा हमारी संस्कृति का मूल आधार रही है। पहले जनसंख्या कम थी, संसाधनों की कमी नहीं थी, लोगों को आसानी से नौकरियां मिल जाती थीं। आज जनसंख्या अधिक है, अवसर कम हंै। आज जो विषम परिस्थिति है, उसमें स्थानीय लोगों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देना जरूरी है, क्योंकि स्थानीय संसाधनों पर स्थानीय लोगों का पहला हक होता है। जो बात दिखाई दे रही है वह है, 'घर का पूत कंवारा डोले और पड़ोसी के फेराÓ। राज्य सरकार की पहली जिम्मेदारी स्थानीय लोगों को सरकारी नौकरी देना होना चाहिए।
-अशोक कुमार शर्मा, झोटवाड़ा, जयपुर
...............

राज्यों की स्थिति में सुधार होगा
राज्यों में स्थानीय लोगों को रोजगार देने से राज्यों की स्थिति बेहतर होगी, क्योंकि ऐसा करने से पलायन की समस्या पर लगाम लगेगी। लोग अपने ही क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त कर दोगुने उत्साह से अपने कार्यस्थल पर काम करेंगे। इसके अलावा हर राज्य की बेरोजगारी और भुखमरी की समस्या पर काबू पाने में मदद मिलेगी।
-सुदर्शन सोलंकी, मनावरए, मप
....................

संकुचित मानसिकता
दक्ष, कुशल और शिक्षित व्यक्ति देश के किसी भी क्षेत्र मेंं जा कर सरकारी सेवा कर सकता है। राज्यों द्वारा स्थानीय लोगों को ही सरकारी नौकरी देना, संकुचित मानसिकता को दर्शाता है। ऐसे फरमान जारी करने से क्षेत्रवाद को ही बढ़ावा मिलेगा।
-कैलाश सामोता, कुंभलगढ, राजसमंद
.............
ंसंविधान का रहे ध्यान
राज्य की नौकरियों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इसके लिए व्यवस्था आवश्यक है, किन्तु यहां यह बात भी महत्वपूर्ण है कि संविधान के आर्टिकल 15 का उल्लंघन न हो, साथ ही राज्य के नागरिको को स्थानीय स्तर पर रोजगार में प्राथमिकता हो। इसके लिए संवैधानिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था तैयार की जाना चाहिए।
-अमित दीवान, भोपाल
....................

संविधान का अपमान
राज्यो में स्थानीय लोगों को ही रोजगार देना क्या उचित हैघ्
भारत राज्यों का संघ है। यहां पूरे देश का एक ही सविंधान है। ये ही देश की पहचान है। इसमें राज्य वार लोगों में भेद नहीं हो सकता है। ऐसा करना भारत के संविधान का अपमान होगा, लेकिन योग्यता के आधार पर कुछ सीमा तक स्थानीय लोगों को रोजगार देने में प्राथमिकता दी जा सकती हैं।
मगन गोयल, ,सुमेरपुर,पाली
................

क्षेत्रवाद को बढ़ावा
इस प्रकार की घोषणाएं देश में क्षेत्रवाद को बढ़ावा देती हैं। यह केवल लोकलुभावन घोषणा भर है, क्योंकि राज्य सरकारों के पास देने को नौकरियां हंै ही नहीं। ऐसी घोषणाएं करना संघीय ढांचे के खिलाफ है। ऐसी घोषणाओं पर केंद्रीय सरकार को मूकदर्शक नहीं बने रहकर सख्ती से इस पर रोक लगानी चाहिए। यदि हर राज्य ऐसी घोषणाएं करेगा, तो संविधान की मूल भावना ही समाप्त हो जाएगी
-डॉ प्रकाश मेहता, बेंगलुरु्र

shailendra tiwari
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned