आपकी बात: देश में जातीय और सांप्रदायिक सौहार्द कैसे बेहतर हो सकता है?

  • पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था, पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आई। पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

By: shailendra tiwari

Updated: 13 Oct 2020, 07:34 PM IST

विद्वेष फैलाने वाले संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जाए
देश में जातीय और सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ाने के लिए बिना भेदभाव के ऐसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए, जो समाज में विद्वेष फैलाते हैं। कानूनों और सरकारी दस्तावेजों में जाति और धर्म का उल्लेख नहीं होना चाहिए। आरक्षण का आधार आर्थिक होना चाहिए और सभी को संविधान की धर्मनिरपेक्षता की भावना का सम्मान करना चाहिए ।
-सुरेश सर्वहारा, कोटा
.........................

जरूरी है सर्वधर्म समभाव
समाज में फैलते सांप्रदायिक व जातीय वैमनस्य का मुख्य कारण सोशल मीडिया पर प्रचारित होते भड़काऊ संदेश हैं। अत: सांप्रदायिक व जातीय सौहार्द बढ़ाने के लिए लोगों को इस प्रकार के संदेशों को प्रचारित करने से बचना चाहिए। धार्मिक सौहार्द बिगाडऩे वाले समाजकंटकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी है। किसी भी धर्म व जाति के प्रति अपने पूर्वाग्रहों का त्याग कर महात्मा गांधी के संदेश 'सर्वधर्म समभावÓ को अपनाकर भी सौहार्द पल्लवित किया जा सकता है।
-प्रवीण सैन, जोधपुर
...................

आरक्षण को खत्म किया जाए
देश में जातीय और साम्प्रदायिक सौहार्द बढ़ाने के लिए आरक्षण का खत्म होना जरूरी है, क्योंकि इसके आधार पर ही जातीय भेदभाव किया जाता है। इससे युवा इस बात से चिंतित रहते हैं कि उनकी योग्यता को आरक्षण के कारण नजरअंदाज किया जा रहा है। यही कारण है कि युवा जातीय विद्वेष की ओर अग्रसर हो रहे है। यदि आज की युवा पीढ़ी प्रभावित है तो, आने वाली पीढ़ी भी अवश्य प्रभावित होगी। अत: आवश्यक है कि जातीय और धार्मिक सौहार्द बढ़ाने के लिए आरक्षण खत्म करने पर विचार किया जाए।
-खिलेश्वरी विश्वकर्मा, कसडोल, छत्तीसगढ़
..............

मूल कर्तव्यों का ध्यान रखें
देश मे जातीय ओर साम्प्रदायिक सौहार्द बढ़ाने के लिए प्रत्येक भारतीय को अपने मूल कर्तव्यों पर ध्यान देना होगा। जाति-धर्म के नाम पर भड़कने वाले हर व्यक्ति से दूर रहना होगा। हमें सभी के साथ प्रेमपूर्वक रहना होगा। भारतीय संस्कृति हमें वसुधैव कुटुम्बकम् का पाठ पढ़ाती है। जाति,धर्म ,रंग और नस्ल के आधार पर किसी व्यक्ति के बारे में राय न बनाएं। कोई अपराध होने पर हमें उसका दोष धर्म और जाति को न देकर अपराधी को देना होगा। दोषियों के खिलाफ कड़ी कारवाई होनी चाहिए।
-फरदीन खान, उज्जैन, मध्यप्रदेश
...................

'हेट स्पीचÓ पर लगाम जरूरी
राजनीतिक दल धर्म और जाति की राजनीति नहीं करें। साथ ही मीडिया भी ऐसे मुद्दों पर संयम बरते तथा सही विचारधारा का निर्माण जनमानस में करे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैल रही अफवाहों और 'हेट स्पीचÓ पर सरकार लगाम कसे। सभी लोग एक दूसरे के धर्मों का आदर करें। सशक्त कानून और शिक्षित समाज का निर्माण करके निश्चित ही देश में जातीय और सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ाया जा सकता है।
-सुनील कुमार पीपलीवाल, जयपुर
......................

अनेकता में एकता
देश के प्रत्येक नागरिक को हमारी प्राचीन समृद्ध विरासत, संस्कृति, सर्वधर्म समभाव, वसुधैव कुटुंबकम, सामाजिक समरसता, अनेकता में एकता की संस्कृति पर भरोसा करना होगा। तभी हम जातीय भेदभाव से ऊपर उठकर आपस में सौहार्द बढ़ा सकते हैं।
-राहुल सिंह दांगी, सागर, मप्र
.....................

सभी धर्मों का सम्मान करें
सब एक दूसरे के धर्म का सम्मान करें। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, सब आपस में हैं भाई-भाई। अगर सभी ऐसी भावना से रहें, तो, देश में भाईचारा बढ़ सकता है। अपने देश का माहौल अच्छा हो सकता है।
-शैलेंद्र गुनगुना, झालावाड़
...............

मानवीय मूल्यों पर जोर
देश में जातीय और सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ाने में मानवीय मूल्यों को महत्ता मिले। लोगों को जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर सोचना चाहिए। यही सोच समाज में सौहार्द बनाए रखने में मददगार बन सकेगी।
-शिवजी लाल मीणा, जयपुर
.....................

धर्मनिरपेक्षता का रहे ध्यान
जातीय और क्षेत्रीय स्तर पर भिन्न होते हुए भी हम एक हैं। भारतीय संविधान ने हर धर्म और जाति के व्यक्ति को समान अधिकार दिया है। आपसी सौहार्द बनाए रखने के लिए हमें अपने आदर्शों को याद रखने की, उन पर अमल करने की आवश्यकता हैं। शांति, अहिंसा, करुणा, धर्मनिरपेक्षता और मानवतावाद के मूल्यों के आधार पर स्कूलों, कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में बच्चों के उत्कृष्ट मूल्यों पर ध्यान केंद्रित करने की तथा मूल्य-उन्मुख शिक्षा पर जोर देने की आवश्यकता है। सरकार, सांप्रदायिकता के खिलाफ जागरूकता के प्रसार में मदद करने वाली गतिविधियों को प्रोत्साहित कर सकती है। इस प्रकार एक बेहतर समाज का निर्माण करने में मदद मिल सकती है।
-डॉ. अजिता शर्मा, उदयपुर
..............

सभी धर्मों का सम्मान जरूरी
देश में जाति और सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ाने के लिए भारतीय संविधान में उल्लेखित अनुच्छेद 25 का व्यापक प्रचार एवं प्रसार होना आवश्यक है। देश में हर व्यक्ति को अपने धर्म को मानने एवं उसके प्रचार-प्रसार का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। सभी धर्मों का समान आदर करने के लिए सरकारी प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है।
-सन्नी ताम्रकार, दुर्ग, छत्तीसगढ़
................

बदल सकता है माहौल
यदि नेता लोग गंदी और वोट की राजनीति करना छोड़ दें और सभी जातियों और धर्मों को एक साथ लेकर चलें, तो माहौल बदल सकता है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया बहस के नाम पर समाज में जहर घोलना बंद करे। मीडिया निष्पक्षता से खबरों का प्रसारण करे।
-देव राठौड़, जालोर
...............

नेता बिगाड़ रहे हैं माहौल
हमारे देश में धर्म और जाति की जडं़े काफी गहरी हंै। राजनेता इसका दुरूपयोग कर देश में जाति और धर्म के नाम पर वैमनस्यता फैला कर अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश करते हंै और आमजन की अज्ञानतावश सफल भी होते हंै। जाति और धर्म के नाम पर राजनीतिक नियुक्तियां, टिकट वितरण, सरकारों द्वारा दबाव में आपराधिक प्रकरणों को वापस लेना इत्यादि अनेकानेक उदाहरण हैं, जो सामाजिक और धार्मिक सौहार्द को पनपने ही नहीं देते। इसके अतिरिक्त जाति और धर्म के नाम पर वैमनस्यता फैलाने वालों के खिलाफ त्वरित कठोर कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।
-अरविंद शर्मा, जयपुर
..............

राष्ट्र धर्म सर्वोपरि
भारत विभिन्न जाति, धर्म, समुदायों का देश है। यहां अनेकता में एकता का सिद्धांत सर्वोपरि है। धार्मिक व जातीय आधार पर राजनीति के चलते सौहार्द बिगड़ा है। अत: हमें संविधान को एक पवित्र ग्रंथ मानते हुए सार्वभौमिक राष्ट्र धर्म की अवधारणा विकसित करनी चाहिए।
-रोशन मुंडोतिया,जयपुर
.............

जहर उगल रहे हैं टीवी चैनल
टीवी चैनलों पर सांप्रदायिक व जातीय बहस पर प्रतिबंध होना चाहिए। ऐसे कार्यक्रमों में लोगों को बुलाकर एक दूसरे के धर्म व जाति के प्रति जहर उगलने के लिए कहा जाता है। इससे लोगों में गलत मानसिकता बनती है। इससे देश में सांप्रदायिक और जातीय सौहार्द में कमी आती है।
-आनंद सिंह बीठू सींथल बीकानेर
..............

मिलजुल कर रहें
जिस देश में जातीय और सांप्रदायिक कट्टरता बढ़ती है, वहां सौहार्दपूर्ण वातावरण नहीं होता। जब तक अलग-अलग जाति के लोग तथा अलग-अलग संप्रदाय के लोग एक दूसरे से मिलेंगे-जुलेंगे नहीं, खाएंगे-पीएंगे नहीं, तब तक जातीय तथा सांप्रदायिक सद्भावना पैदा नहीं हो सकती।
-निरंजन सोनी, सुजानगढ़
............

विविधता में एकता
भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। इसकी एकता और अखंडता को बचाने के लिए जातीय और सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ाने की महती आवश्यकता है। यह देश विविधता में एकता प्रदर्शित करता है। जाति, धर्म, अमीर, गरीब से परे हम सब एक हैं।
-विद्या शंकर पाठक, सरोदा, डूंगरपुर
.............

मीडिया की भूमिका महत्त्वपूर्ण
जातीय और सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए मीडिया की भूमिका सर्वोपरि है। मीडिया सकारात्मक रुख अपनाए। जन प्रतिनिधि आपसी भाई चारे को बढ़ाए और माहौल बिगाडऩे वालों के खिलाफ कार्रवाई करे।
-अरविंद भंसाली, जसोल
..............

हर जाति-धर्म का सम्मान करना होगा
वर्तमान समय में देश में सांप्रदायिक सौहार्द की बहुत ज्यादा आवश्यकता है। सभी को जात-पात से ऊपर उठकर सभी जातियों और धर्मोंका सम्मान करना होगा। हमें अहिंसा के मार्ग पर चलने की आवश्यकता है, जिससे की सभी का उद्धार हो सके। हमारे राष्ट्र की विशेषता ही यही है की हम इतनी विविधता के बावजूद एकता के एक सूत्र में समाए हुए हैं। हमें एकजुट रहकर राष्ट्र कल्याण की भावना से काम करना चाहिए।
-सुदर्शन सोलंकी, धार, मप्र

shailendra tiwari
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned