आपकी बात, चिकित्सकों की कमीशनखोरी पर कैसे लगाम लग सकती है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 24 Dec 2020, 05:49 PM IST

कमीशनखोर चिकित्सकों की डिग्री रद्द की जाए
भगवान के बाद किसी को पूजा जाता है, तो वह है चिकित्सक। कोरोना के दौरान इनका भगवान का स्वरूप नजर भी आया, लेकिन जब कुछ चिकित्सक चंद पैसे अधिक कमाने के लालच में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने लग जाएं, तो जनता किससे गुहार लगाए। ऐसे बहुत से चिकित्सक आए दिन देखने मे आते हैं, जो कमीशन के लालच में मरीजों को निर्धारित दुकानों सेे ही दवा खरीदने के लिए बाध्य करते हैं। ऐसे चिकित्सक उन चिकित्सकों के लिए भी खतरा बन जाते हैं , जो ईमानदारी से अपना कार्य करते हैं । सरकार को चाहिए कि कमीशनखोर चिकित्सकों पर सख्ती से करे। ऐसे चिकित्सकों की डिग्री रद्द जाए।
-डॉ. अजिता शर्मा, उदयपुर
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सेवा भाव जगाने की जरूरत
वर्तमान में बढ़ती कमीशनखोरी को चिकित्सकों में उच्च आदर्शों एवं सेवा-समर्पण के भावों की जागृति कर न्यून अथवा खत्म करना संभव है। स्वास्थ्य सेवा का बढ़ता निजीकरण एवं महंगाई युक्त अध्ययन भी इस प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के प्रमुख घटक हैं। चिकित्सक अपने आपको मानवीय संवेदनाओं के साथ मानव-समाज सेवा के लिए तैयार करें न कि धन उपार्जन के उपक्रम के रूप में। चिकित्साकर्मी यदि स्वयं नैतिकता एवं संवेदनाओं से युक्त आचरण पुन: सृजित करने लगेंगे, तो समाज व राष्ट्र से चिकित्सा क्षेत्रीय कमीशनखोरी स्वत: समाप्त हो जाएगी।
-डॉ.अमित कुमार दवे, खडग़दा, डूंगरपुर
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कड़े कदम की जरूरत
कमीशनखोरी की समस्या गंभीर हो चुकी है। बिना कोई बीमारी के मरीजों को खतरनाक बीमारी से पीडि़त होने की आशंका जता महंगी से महंगी दवाइयां लेने के लिए दबाव बनाया जाता है। कमीशन के लालच में उन्हें अपने परिचितों की टेस्टिंग लैब में ही परीक्षण के लिए भेजा जाता है। एक बार अस्पताल में भर्ती होने के बाद, ये चिकित्सक मरीज की जेब खाली करवाकर ही दम लेते हैं। कमीशनखोरी की समस्या के निदान के लिए सरकार और प्रशासन को कड़े कदम उठाने होंगे। सरकारी चिकित्सकों को निजी तौर पर अपनी दुकानदारी चलाने की छूट नहीं मिलनी चाहिए। सरकारी अस्पताल की टेस्टिंग की विभिन्न मशीनों का रख रखाव सुचारू रूप से कर उन्हें ऑपेरेटिव अवस्था में रखना होगा। मीडिया इन कमीशनखोर चिकित्सकों के खिलाफ अभियान चलाए।
-नरेश कानूनगो, बेंगलूरू, कर्नाटक
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ईमानदार चिकित्सकों का हो सम्मान
चिकित्सकों को कैमिस्ट, लैब, दवा एवं उपकरण बनाने वाली कंपनियों के माध्यम से कमीशन पहुंचता है। इसे रोकना आवश्यक है। चिकित्सकों की आय पर भी कड़ी निगरानी रखी जाए। चिकित्सकों को सेवा की भावना से कार्य करना चाहिए। योग्य एवं ईमानदार चिकित्सकों की पहचान कर उनको सम्मानित किया जाना चाहिए।
-नरेन्द्र कुमार शर्मा, मालवीय नगर,जयपुर
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विशेष मंच का गठन किया जाए
चिकित्सा के क्षेत्र में अंधाधुंध कमीशनखोरी चलती है, जो आम जनता पर बहुत भारी पड़ती है। इस पर लगाम लगाने के लिए जनता को सतर्क रहना बहुत जरूरी है। इसे रोकने के लिए सरकार को भी कड़े कदम उठाने चाहिए। इस तरह की शिकायतों की सुनवाई के लिए विशेष मंच का गठन किया जाए।
-मनीष शर्मा, लक्ष्मणगढ़, सीकर
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निगरानी भी हो
शहरी क्षेत्र की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र में लोग अपने अधिकारों के प्रति कम जागरूक हैं। अत: मेडिकल स्टोर तथा डॉक्टरों पर विशेष निगरानी रखी जाए। ब्लॉक स्तर पर एक अतिरिक्त निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए।
-एकता शर्मा, गरियाबंद , छत्तीसगढ़
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हर अस्पताल के लिए हो पर्यवेक्षक
अस्पतालों में चिकित्सकों की कमीशनखोरी की घटनाएं चिकित्सक के पवित्र पेशे को शर्मशार करती है। इन घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार हर अस्पताल में एक निष्पक्ष व सत्यनिष्ठ अधिकारी पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त करे जिसे लोग शिकायत भी दर्ज करवा सकें। शिकायत पर तत्काल कार्रवाई भी हो।
-प्रवीण सैन, जोधपुर
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दवा के कंटेट लिखें डॉक्टर
राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में सभी प्रकार के इलाज के लिए नि:शुल्क दवाइयां दी जाती हंै। डॉक्टर अपना कमीशन खाने के लिए जानबूझकर उन दवाइयों के नाम लिखते हैं, जो सरकारी अस्पताल में नहीं मिलती। डॉक्टर केवल दवाइयों के कंटेंट लिखें, जिससे मरीज दवा कहीं से भी खरीद सकता है।
-सरिता जैन शाहपुरा भीलवाड़ा
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चिकित्सकों का ध्यान जेब पर
मरीज इलाज के लिए अस्पताल जाते हैं, लेकिन चिकित्सकों का ध्यान उनकी जेब पर होता है। मरीज की बीमारी के इलाज के नाम पर अनावश्यक जांच और दवा लिख देते हैं। इससे पीडि़त मरीजों की जेब तो खाली होती ही है, दवाइयों से होने वाले साइड इफेक्ट भी मरीजों को झेलने पड़ते हैं। इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए सरकार को कठोर कदम उठाने चाहिए। कानून की जरूरत हो तो कानून भी बनाया जाना चाहिए।
-सुरेंद्र बिंदल, मॉडल टाउन, जयपुर
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कठोर सजा जरूरी
भारतीय समाज में चिकित्सक को भगवान का दर्जा दिया गया है, लेकिन आज के समय में कुछ चिकित्सक व्यक्तिगत लाभ के लिए अपने दायित्व का निर्वहन ना करके कमीशनखोर बन गए हैं। ऐसे चिकित्सकों का पंजीकरण रद्द करके उन्हें कानून के तहत कठोर सजा दी जानी चाहिए, तभी यह कमीशनखारी रुक सकती है।
-संतोष कुमार तिवारी, जयपुर
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फिर कैसे हो इलाज
चिकित्सकों की कमीशनखोरी कोरोना काल में कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। दवाइयों की कीमतें भी बढ़ चुकी हंै। ऐसे में आम जनता कैसे इलाज करवाए? हर अस्पताल और चिकित्सकों की अलग-अलग फीस है। कुछ चिकित्सक तो चार-पांच दिन में दुबारा फीस वसूलते हैं। फीस में एकरूपता लाई जाए और कमीशनखोरी पर लगाम लगाई जाए।
-हरिप्रसाद चौरसिया, देवास, मध्यप्रदेश

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