scriptHow can the influence of money in politics be stopped? | आपकी बात, राजनीति में धन का प्रभाव कैसे रोका जा सकता है? | Patrika News

आपकी बात, राजनीति में धन का प्रभाव कैसे रोका जा सकता है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

Published: December 08, 2021 03:48:27 pm

लोकतंत्र के लिए अभिशाप
धनबल और बाहुबल के कारण स्याह होती राजनीति आज भारतीय लोकतंत्र के लिए अभिशाप बन गई है। स्वच्छ राजनीति के लिए अब कानूनी ढांचे को मजबूत करने के साथ जनता को भी जागरूक करना आवश्यक है, ताकि वह सही प्रत्याशियों का चयन करे।
-नीता टहिलियानी जयपुर
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आपकी बात, राजनीति में धन का प्रभाव  कैसे  रोका जा सकता है?
आपकी बात, राजनीति में धन का प्रभाव कैसे रोका जा सकता है?
खर्चीले हो गए हैं चुनाव
राजनीति और धन का 'चोली-दामनÓ जैसा साथ है। राजनीति में जिसके पास पैसा है, वही आगे बढ़ता है। उद्योगपति चंदा देकर एक तरह से राजनीतिक दलों को प्रभावित करते हैं। चुनाव में पैसा पानी की तरह से बहाया जाता है। आजकल दलबदल की प्रवृत्ति में भी बढ़ोतरी हुई है। इसके लिए भी राजनीतिक दल पैसा खर्च करते हैं। राजनीति को शुद्ध करने के लिए चुनाव में धन का प्रभाव कम करना होगा।
-अरुण कुमार भट्ट, रावतभाटा।
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चुनाव खर्च सीमा का पालन करवाया जाए
निर्वाचन आयोग चुनावी आचार संहिता का कड़ाई के साथ पालन करवाएं। धन से वोट खरीदने वाले एवं प्रलोभन देने वाले नेताओं को चिह्नित किया जाए। साथ ही उन्हें राजनीति से बाहर का रास्ता दिखाया जाए। राजनीति में चुनाव के समय खर्च की सीमा तय की गई है, लेकिन नेता इस सीमा का ध्यान ही नहीं रखते। चुनाव खर्च सीमा का पालन करवाया जाना चाहिए।
-सतीश उपाध्याय, मनेंद्रगढ़ कोरिया, छत्तीसगढ़
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राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र जरूरी
राजनीति में धन का प्रभाव टिकट की खरीद-फरोख्त से ही शुरू हो जाता है। इसके बाद राजनीतिक दल और नेता चुनाव जीतने के लिए धन का इस्तेमाल करते हैं और सत्ता में आने के बाद अपनी जेब भरते हैं। इस तरह का काम करने वाले नेता क्यों कभी अपने खिलाफ कोई कानून बनाएंगे? जब तक राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र स्थापित नहीं हो जाता तब तक चुनावों में धन के प्रभाव को रोका नहीं जा सकता है
-शुभम वैष्णव, सवाई माधोपुर
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जरूरी है सख्ती
राजनीति में धनबल का प्रयोग रोकने के लिए कारगर कदम उठाने की आवश्यकता है। सरकार की पहली प्राथमिकता राजनीति में धन-बल को रोकना होनी चाहिए। इसके लिए आयकर विभाग की सख्ती आवश्यक है।
-खुशवंत कुमार हिंडोनिया, चित्तौडग़ढ़
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चुनाव आयोग की भूमिका
मतदाताओं को लुभाने के लिए चुनावों के दौरान होने वाले खर्च पर चुनाव आयोग को सख्ती से रोक लगानी चाहिए। इससे राजनीति में धन के दुरुपयोग को रोका जा सकता है।
-मुकेश भटनागर, वैशालीनगर, भिलाई
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सेवा का क्षेत्र है राजनीति
राजनीति सेवा का क्षेत्र है। इसलिए जनप्रतिनिधियों को मिलने वाली सभी सुविधाओं को बंद कर देना चाहिए। इससे धन कमाने के लिए राजनीति में आने वाले हतोत्साहित होंगे। चुनाव में अनावश्यक खर्च को रोकना चाहिए।
-माधव सिंह, सीकर
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प्रचार पर ज्यादा खर्च न हो
राजनीति में धन का प्रभाव रोकने के लिए राजनीतिक दलों द्वारा किए जाने वाले खर्च का भुगतान शत प्रतिशत चेक से किया जाए। राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की जांच की जाए। चंदा देने की एक सीमा निश्चित हो। प्रचार-प्रसार पर अनाप-शनाप खर्च बंद किया जाए।
संजय माकोड़े बड़ोरा बैतूल
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लोकतंत्र के लिए घातक
धनबल के सहारे ही राजनीति चल रही है। दलबदल हो या सरकारें गिराने का काम, इसमें धन की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। यह प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए घातक है। बेहतर तो यह है कि चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों को निश्चित राशि सरकार मुहैया कराए तथा राजनीतिक चंदा बंद हो।
-शिवजी लाल मीना, जयपुर
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चुनाव आयोग दिखाए सख्ती
राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदा का सारा विवरण अकाउंट नंबर के साथ चुनाव आयोग के पास हो। आयोग राजनीतिक दलों के लिए खर्च की सीमा तय करे। इस सीमा से अधिक राशि ये दल बैंक से नहीं निकाल पाएं। जब तक चुनाव आयोग सख्त नही होगा, भारत में धनबल का प्रभाव बना ही रहेगा
-संजय कुमार मांझी, महासमुंद

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