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आपकी बात : मरीजों और चिकित्सकों के बीच विश्वास कैसे बढ़ सकता है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आईं। पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

 

Published: March 31, 2022 03:48:18 pm

व्यवहार में रखें संतुलन

चिकित्सकों और मरीजों के मध्य विवाद की घटनाएं दिनोंदिन तूल पकड़ रही हैं। देखा गया है कि इलाज के दौरान कोई भी अप्रिय घटना होने पर मरीजों के परिवारों द्वारा चिकित्सकों को प्रताडि़त किया जाता है। दरअसल चिकित्सक केवल अपना बेहतर दे सकते है, परिणाम उनके हाथ में नहीं है। कोरोना काल में भी अधिकांश डॉक्टर तनाव और अवसाद का दंश झेल चुके हैं। ऐसे वक्त में यह घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण ही मानी जाएंगी। ये न केवल उनके आत्मविश्वास को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि हतोत्साहित भी करती हंै। स्थिति को अनुकूल बनाने के लिए अपने-2 उत्तरदायित्वों का निर्वहन करें और व्यवहार में संतुलन स्थापित करें।
आपकी बात : मरीजों और चिकित्सकों के बीच विश्वास कैसे बढ़ सकता है?
आपकी बात : मरीजों और चिकित्सकों के बीच विश्वास कैसे बढ़ सकता है?
- सुदेश बिश्नोई, श्रीगंगानगर

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डॉक्टर सहानुभूति का भाव जगाएं

चिकित्सकों को भगवान का दर्जा दिया गया है। मरीज और डॉक्टर्स के बीच वही रिश्ता होता है, जो आराधना स्थल पर भक्त और आराध्य के मध्य होता है। लेकिन यह विश्वास वर्तमान में मरीज और चिकित्सक के बीच उसी प्रकार से रह गया है, जैसे कांच के बीच आई हुई दरार। चिकित्सकों ने अपने पेशे को सिर्फ पैसा कमाने का जरिया बना लिया है, वहीं उनकी असंवेदनशीलता के भाव के कारण मरीज का भी डॉक्टरों के प्रति विश्वास कम हुआ है। आवश्यकता इस बात की है कि डॉक्टर केवल पैसे का महत्व ही न रखे बल्कि मरीज की तकलीफ और उसकी आर्थिक दशा देखकर सहानुभूति और सेवा के भाव से चिकित्सा उपलब्ध कराए। इससे डॉक्टर के प्रति स्वत: ही श्रद्धा जाग उठेगी।
- हरिप्रसाद चौरसिया, देवास, मध्यप्रदेश

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मरीजों को दें जटिलता की जानकारी

मरीजों तथा जनता को यह जानकारी होनी चाहिए कि जटिलताएं मेडिकल प्रक्रिया का ही एक हिस्सा होती है और सरकार तथा चिकित्सकों को इन जटिलताओं जानकारी पहले ही मरीजों तथा उनके परिजनों को उपलब्ध करवानी चाहिए। इससे मरीजों तथा चिकित्सकों के बीच किसी भी प्रकार का विवाद उत्पन्न ही ना हो और दोनों के बीच आपसी सामंज्य और विश्वाश बना रहे।
- संध्या रामावत, गंगाशहर, बीकानेर

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चिकित्सकों के पद भरे जाएं

चिकित्सकों पर अतिरिक्त कार्यभार नहीं पड़े इसलिए रिक्त पड़े पदों को शीघ्र भरा जाए। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को अस्पतालों की व्यवस्था का समय समय पर अवलोकन करना चाहिए।
- सुनील पंवार, जैसलमेर, राजस्थान

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संवादहीनता से बिगड़ रहे संबंध

चिकित्सा, जो कभी केवल सेवा हुआ करती थी, आज धनोपार्जन का जरिया बन चुका है। मरीजों के प्रति डॉक्टर की सेवा भावना अब भी वैसी ही है, लेकिन दोनों के बीच एक भावनात्मक खाई बन चुकी है, जिसे पाटने की अत्यधिक आवश्यकता है। जिस तरह कोई शिक्षक नहीं चाहता कि उसका एक भी छात्र फेल हो, उसी तरह कोई डॉक्टर भी नहीं चाहते कि मरीज की जान पर कोई आफत आए।
- राहुल मुदगल, बसई (फतेहाबाद)

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आपसी विश्वास जरूरी है

मरीजों और चिकित्सकों के बीच संबंध सुधारने के साथ विश्वास बढ़ाने के लिए चिकित्सा के सभी पाठ्यक्रमों में मेडिकल छात्रों को मरीजों और उनके तीमारदारों के साथ किस तरह से पेश आना चाहिए, यह भी सिखाया जाना चाहिए। साथ ही, इलाज और ऑपरेशनों की जानकारियां पहले से मरीज और उसके संबंधितों को पूरी तरह समझाने से भी मरीजों और चिकित्सकों के बीच संबंध मधुर बनाने में सफलता मिल सकती है।
- नरेश कानूनगो, देवास, म.प्र.

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सोच में लाना होगा बदलाव

अब मरीजों को डॉक्टर के प्रति संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर उनके प्रति एक सकारात्मक रवैया अपनाना होगा और डॉक्टर के प्रति सहानुभूति प्रकट कर विश्वास बढ़ाना होगा।
- पांचाराम चौधरी, भीनमाल, राजस्थान

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भरोसा रहे बरकरार

डॉक्टर और मरीज़ के बीच विश्वास और भरोसे का रिश्ता होना चाहिए। डॉक्टर को मरीज़ की स्थिति खुलकर उसके परिजन को बतानी चाहिए और परिजन को विश्वास दिलाना चाहिए। दूसरी ओर, मरीज़ व परिजनों को भी भगवान समान डॉक्टर पर विश्वास करना चाहिए।
- मोहित सोलंकी, जोधपुर

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आपसी समझ से सुधार

जब तक मरीज़ों और चिकित्सकों में आपसी समझ कायम नहीं होगी, चिकित्सकों की ओर से अपने पेशे का ईमानदारी से निर्वहन करने व मरीजों के इलाज में लापरवाही न बरतने का दायित्व नहीं निभाया जाएगा, निजी अस्पतालों में मरीजों की लूट जारी रहेगी, आपसी विश्वास कायम रहना टेढ़ी खीर साबित होगा। आपसी समझ से ही दोनों के बीच विश्वास बढ़ सकता है।
शिवजीलाल मीना, जयपुर

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मरीज रखे विश्वास

कोई भी चिकित्सक किसी भी मरीज को हानि नहीं पहुंचाना चाहता। वह तो धरती पर भगवान का रूप है। मरीजों को डॉक्टरों के प्रति विश्वास रखना चाहिए!
- शिवपाल सिंह, मेड़ता सिटी, राजस्थान

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डॉक्टर का व्यवहार हो मधुर

चिकित्सकों और मरीज़ों का विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरत है, चिकित्सक का मरीज़ों के साथ व्यवहार अच्छा हो। वह उनकी बात ध्यान से सुने और मधुर बोलना भी इलाज का हिस्सा होना चाहिए। आधी बीमारी इससे दूर हो सकती है। साथ ही, मरीजों और उनके परिजनों को भी भरोसा रखना होगा।
- साजिद अली, इंदौर, मध्यप्रदेश

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आपसी सहयोग से बढ़ेगा विश्वास

मरीजों और चिकित्सकों के बीच विश्वास बढ़ाने का केवल एक ही उपाय है, मरीजों और डॉक्टरों के बीच आपसी सहयोग और अपनापन बनाए रखना। साथ ही, मरीजों के धन को ऐंठना ही डॉक्टरों का काम न हो बल्कि उनसे प्रेम, प्यार, सहयोग की भावना एवं विश्वास से ही दोनों के संबंधों में मधुरता आ सकती है।
- सुरेंद्र नालोटिया, जयपुर, राजस्थान

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भावनात्मक हों डॉक्टर-मरीज़ के संबंध

डॉक्टर व मरीज के बीच संबंध बहुत ही संवेदनशील होते हैं। यह विडम्बना है कि जहां सभी पेशे व्यावसायिक हो गए हैं, वहीं कुछ चिकित्सकों के कृत्यों के कारण चिकित्सकों और मरीज़ों के मध्य विश्वास कम होता जा रहा है। इसका खमियाजा ईमानदार और सेवाभावी डॉक्टरों को भुगतना पड़ता है। मरीज़ सभी चिकित्सकों को एक ही नजऱों से देखने लगते है। यही कारण है कि मरीज़ों का डॉक्टरों पर विश्वास उठता जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में डॉक्टरों को मरीजों के हित का ध्यान सबसे पहले रखना चाहिए। कोशिश करें कि संसाधन एवं पैसों के अभाव में किसी भी मरीज का इलाज नहीं रुके। साथ ही, चिकित्सालय प्रशासन में पारदर्शिता होनी चाहिए।
- डॉ. अजिता शर्मा, उदयपुर

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परिजन रखें खुद पर काबू

मरीजों और उनके परिजनों को डॉक्टर के प्रति अपने व्यवहार पर नए सिरे से विचार करना चाहिए। जब तक डॉक्टर मरीज के रोग का इलाज करता है, तब तक तो उसके परिजन अच्छा व्यवहार करते हैं, लेकिन जब वही रोगी दुर्भाग्यवश मर जाता है, तो वे डॉक्टर को भला-बुरा कहने लगते हैं और कभी-कभी उसे पीटने पर भी आमादा हो जाते हैं। यह तरीका ठीक नहीं है। डॉक्टर और मरीज का रिश्ता काफी संवेदनशील है। इस रिश्ते में मधुरता रखने के लिए आपसी संवाद और अपनेपन का होना जरूरी है।
- राहुल पालीवाल, राजसमंद, राजस्थान

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