आपकी बात, खेती-किसानी में जल का अपव्यय कैसे रोका जा सकता है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 19 Mar 2021, 05:59 PM IST

सिंचाई में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल जरूरी
आजकल की मौजूदा आधुनिक तकनीक को अपनाकर जल का अपव्यय रोका जा सकता है। बूंद-बूंद सिंचाई विधि बहुत उपयोगी है, जिसमें पानी का अपव्यय बहुत कम होता है। फव्वारे से सिंचाई में ऐसे सेंसर का उपयोग होना चाहिए कि फसल को पर्याप्त जल मिल जाने पर पानी की सप्लाई स्वत: ही रुक जाए। इससे पानी के अपव्यय को रोका जा सकता है। खेतों में, ऐसे क्षेत्र जहां खेती नहीं की जाती, वहां बड़ा गड्ढा बनाकर उसमें वर्षा के जल का संचयन किया जा सकता है तथा बाद में उसका उपयोग किया जा सकता है
-अमृत सिंह राजपुरोहित, चौखा, जोधपुर।
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ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई विधि को अपनाएं
सामान्य तौर पर देखने से ऐसा लगता है कि भारत में खेती और पीने के लिए पानी की कमी नहीं है,लेकिन इसका सही इस्तेमाल नहीं होने से जल संकट बना रहता है। कृषि का बड़ा क्षेत्र सिंचाई के लिए भूजल पर निर्भर है और भूजल स्तर तेजी से नीचे गिरते हुए चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। इसलिए हमें स्प्रिंकलर व ड्रिप सिस्टम से फसलों की सिंचाई करनी चाहिए। बागवानी में सिंचाई के लिए ड्रिप विधि तथा फसलों की सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर विधि अपनानी पड़ेगी। साथ ही हैंडपंप, कुएं के पास गड्ढे बनाकर उनको रेत से भर दें, ताकि बेकार पानी गड्ढों से अवशोषित होकर जमीन के भीतर पहुंच सके।
- सुनिल खिलेरी, जालोर
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उपयोगी है बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति
कृषि कार्य अगर आधुनिक तकनीक से किया जाए, तो निश्चय ही जल का अपव्यय रोका जा सकता है। जिस प्रकार सरकार द्वारा नर्मदा नहर परियोजना में बूंद-बूंद सिंचाई और फव्वारा पद्धति को प्रोत्साहन किया जा रहा है, उसी प्रकार समस्त देश में इस प्रकार की पद्धति को प्रोत्साहित करना चाहिए।
-रेवत सिंह, सांचोर
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सिंचाई के तरीके बदलें
जल है तो जीवन है। खेती-किसानी में पानी का अपव्यय रोकना बहुत आवश्यक है। समय आ गया है कि सिंचाई के पुराने तरीके बदले जाएं। बूंद-बूंद और फव्वारा पद्धति से सिंचाई से कम से कम पानी से ज्यादा से ज्यादा क्षेत्र में सिंचाई हो सकती है। इससे जल का दुरुपयोग रुक सकता है।
-रमेश चंद बैराठी, जयपुर
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वर्षा जल से कुओं को रिचार्ज किया जाए
जल का अपव्यय रोका जा सकता है। बूंद-बूंद सिंचाई के साथ फव्वारा पद्धति को अपनाया जा सकता है। साथ ही वर्षा जल को एकत्र कर कुओं एवं बोरवेल को रिचार्ज करने से किसानों को फायदा मिलेगा।
-जोधराज पालीवाल, उदयपुर
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कम पानी वाली फसलों को प्रोत्साहन दिया जाए
खेती-किसानी में जल का अपव्यय रोकने के लिए किसानों को आधुनिक तकनीक से कृषि के लिए प्रशिक्षण देकर उन्हें नवीनतम तकनीक बूंद-बूंद सिंचाई, स्प्रिंकलर सिस्टम, पॉली हाउस आदि संसाधन उपलब्ध करवाए जाने चाहिए। इसके लिए किसानों को लोन सुविधा, सब्सिडी प्लान जैसी योजना से लाभान्वित करें। साथ ही पानी के सदुपयोग के लिए प्रेरित करें एवं अच्छा कार्य करने वाले किसानों को पुरस्कृत कर रोल मॉडल के रूप में पेश करें। सरकार अपने स्तर पर कम पानी में होने वाली फसलें, मृदा परीक्षण को बढ़ावा दे।
-सत्तार खान कायमखानी, कुचेरा
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नहरों का रखरखाव आवश्यक
खेती-किसानी के लिए सिंचाई के लिए भूमिगत जल स्रोतों का दोहन आवश्यकता एवं उपलब्धता के आधार पर होना चाहिए। बांध के जल से नहरों द्वारा सिंचाई के दौरान जल के अपव्यय को रोकने के लिए नहरों का उचित रखरखाव किया जाना चाहिए। गांव-गांव, ढाणी-ढाणी में ताल तलैया में भंडारित जल की एक-एक बूंद का सही उपयोग सीखना होगा। जल के भंडारण एवं आपूर्ति को व्यवस्थित कर जल के अपव्यय को रोका जा सकता है।
-नरेन्द्र कुमार शर्मा, जयपुर
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शोध और अनुसंधान की जरूरत
जल, जंगल और जमीन को ध्यान में रखते हुए अधिक से अधिक पेड़ तथा पौधे अपने गांव और तालाबों के आस-पास लगाने चाहिए। अगर गांव में नदी है, तो एनीकट बनाकर पानी का संग्रहण करना चाहिए। घर और खेत साथ में हो तो वाटर हार्वेस्टिंग या फिर रूफ एग्रीकल्चर को बढ़ावा दिया जा सकता है। भूमि की नमी तथा उर्वरता की जांच करवाते हुए ड्रिप इरिगेशन को बढ़ावा देना चाहिए। खेती में पानी के अपव्यय को रोकने की इजरायली पद्धति भी कारगर सिद्ध हो सकती है। इस तरफ अधिक शोध तथा अनुसंधान करने चाहिए।
-सिद्धार्थ शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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किसानों में जागरूकता जरूरी
भारत कृषि प्रधान देश है। इसलिए कृषि पर खास ध्यान दिया जाना चाहिए, लेकिन कृषि में पानी के अपव्यय को रोकने की भी जरूरत है। फव्वारा विधि और बूंद-बूंद सिंचाई प्रणाली जरूरी है। एक मजबूत नहरी तंत्र और किसान जागरूकता अभियान से भी खेती में पानी के अपव्यय को रोका जा सकता है।
-विकास कुमार, भादरा
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बच सकता है पानी
खेती-किसानी में पानी के अपव्यय को बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति अपनाकर रोका जा सकता है। इस विधि से सिंचाई करने से पानी सीधा पौधों की जड़ तक पहुंचता है और 70 प्रतिशत पानी के अपव्यय रोका जा सकता है। इसके अलावा फव्वारा सिंचाई विधि बहुत अच्छा विकल्प है। खेतों में डिग्गी बनाकर बरसात के पानी को इकट्ठा किया जा सकता है। कम पानी आवश्यकता वाली फसलें लगानी चाहिए।
-विजय झोरड़, संगरिया, हनुमानगढ़
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उपयोगी हैं ग्रीन हाउस और पॉली हाउस
किसान उन्नत किस्म के ऐसे बीजों का उपयोग कर सकते है, जो कम पानी में भी अधिक उत्पादन देते हैं। साथ ही उपयुक्त सिंचाई साधन जैसे बूंद-बूंद सिंचाई का चयन करके पानी की खपत को कम कर सकते हैं। पॉलीहाउस या ग्रीनहाउस का भी उपयोग कर वाष्पीकरण को कम किया जा सकता है, जिससे बार-बार सिंचाई की आवश्यकता नहीं होगी।
-अविनाश घोसल्या, सीकर
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जल संरक्षण का महत्त्व समझाएं
खेती-किसानी में जल का अपव्यय रोकने के लिए खेतों में सिंचाई के लिए नई तकनीक जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को अपनाना होगा। लोगों को जल संरक्षण का महत्त्व समझाना होगा।
-लोकेश जालवाल, चूरू

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