आपकी बात, राजनीति में महिलाओं की भागीदारी कैसे बढ़े?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 10 Feb 2021, 07:02 PM IST

जरूरी है महिलाओं को आरक्षण
राजनीतिक परिदृश्य में महिला प्रतिनिधियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए आरक्षण एक महत्त्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। महिलाओं को लोकसभा और सभी राज्यों की विधान सभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने संबंधी महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल पारित किया जाना आवश्यक है। राजनीति व अन्य विविध क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए आवश्यक है कि समाज में प्रत्येक स्तर पर महिला सशक्तीकरण तथा उनकी सामुदायिक भागीदारी के लिए प्रयास किए जाएं, ताकि उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता आदि गुणों का विकास हो !
-महेंद्र पूनिया, बालोतरा, बाड़मेर
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महिलाओं में आई है जागरूकता
सदियों से महिलाओं को चारदीवारी तक सीमित रखा गया है। अब महिलाओं में जागरूकता आई है। जरूरत है महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बढ़ाने की। इसके लिए जरूरी है राजनीतिक पार्टियां संसद से लेकर पंचायत स्तर तक उनकी भागीदारी बढाएं। उनके लिए जागरूकता शिविर लगाए जाएं। सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित हों, तभी महिलाएं भी स्वेच्छा से आगे आ सकेंगी। अभी पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, परन्तु उनके कामकाज उनके पति करते हैं। ऐसे में उनका विकास नहीं हो पाता।
-राममोहन सिन्हा, विदिशा
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शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए
महिला सशक्तीकरण वर्तमान समय की महती आवश्यकता है। भारतीय राजनीति में आनुपातिक रूप से महिलाओं की सहभागिता कम है, हालांकि 73वें तथा 74वें संविधान संशोधन के फलस्वरूप आरक्षण प्रावधानों से पंचायती राज में महिलाओं की भागीदारी निश्चित रूप से बढ़ी है, लेकिन इससे भी आगे प्रयासों की आवश्यकता है। संसद व राज्य विधानमण्डलों में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया जाए। पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ाया जाए। महिलाओं को राजनीति में सशक्त करने के लिए सबसे अहम कदम शिक्षा में सहभागी बनाना है। इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाना चाहिए।
-महावीर सिंह सोलंकी, जैसलमेर
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कम है प्रतिनिधित्व
राजनीति में महिलाओ की भागीदारी बढ़ाने के लिए पंचायतीराज संस्थाओं के समान लोकसभा व राज्यसभा में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीट आरक्षित करनी चाहिए, क्योंकि वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व केवल 14.8 प्रतिशत है। साथ ही महिलाओं को उनके राजनीतिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना पड़ेगा, ताकि वे राजनीति में हिस्सा लें।
-सुरेंद्र कलवानिया, नागौर
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योग्यता साबित करें महिलाएं
राजनीति मे महिलाओ की भागीदारी बढ़ाने के लिये स्वंय महिलाओं को ही आगे आना होगा और अपनी योग्यता साबित करनी होगी। इसके लिए जहां वे रहती हैं, अगर आस-पास कोई भी राजनीतक कार्यक्रम हो, वे वहां जरूर जाएं। इस तरह धीरे-धीरे राजनीति की समझ आने लगेगी। शुरुआत में स्थानीय स्तर पर जन-हित के मुद्दों को लेकर आगे आएं और नगर निकायों के चुनावों में टिकट के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत करें। उसके बाद महिलाएं अपनी योग्यता के आधार पर जीत हासिल कर संसद तक पहुंच सकती हैं। राजनीतक दलों को भी पार्टी के निजी हित को छौड कर योग्य महिला उम्मीदवार को टिकट देना चाहिए।
-लता अग्रवाल चित्तौडग़ढ़
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कथनी और करनी में अंतर
भारत के लोकतंत्र के लिए यह दुखद ही है कि पिछले सत्तर सालों में लोकसभा में चुनी हुई महिलाओं की मौजूदगी दोगुनी भी नहीं हुई है। बड़े और प्रमुख राजनीतिक दल महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने और लोकसभा व विधानसभाओं में तैंतीस फीसदी आरक्षण देने की चाहे जितनी वकालत करें, उनकी कथनी और करनी में फर्क बरकरार है। राजनीति व अन्य विविध क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए आवश्यक है कि समाज में प्रत्येक स्तर पर महिला सशक्तीकरण तथा उनकी सामुदायिक भागीदारी के लिए प्रयास किए जाएं, ताकि उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता आदि गुणों का विकास हो।
-रमेश कुमार लखारा, बोरुंदा जोधपुर
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लैंगिक भेदभाव खत्म किया जाए
संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण कर देना चाहिए तथा पितृसत्तात्मक ढांचे को खत्म करके महिला शक्ति को सशक्त करना चाहिए। समाज में व्याप्त पर्दा प्रथा, घूंघट प्रथा व लैंगिक भेदभाव को खत्म करके महिलाओं को राजनीति में भागीदारी का मौका देना चाहिए। स्थानीय स्वशासन में राज्य सरकार ने महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देकर महिलाओं को राजनीति में भागीदारी देने की सराहनीय पहल की है। इसे आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
- राजेन्द्र बांगड़ा, जायल
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नेतृत्व क्षमता का विकास जरूरी
महिलाओं को उचित शिक्षा प्रदान कर उनमें नेतृत्व क्षमता का विकास करना आवश्यक है। प्रतिनिधि संस्थाओं में संख्या के अनुपात में वृद्धि की जाए। महिलाओं को इतिहास में दर्ज ऐसी महिलाओं के बारे में बताया जाना चाहिए, जिन्होंने देश और समाज के लिए बड़ा काम किया हो।
-संजना देवड़ा, सिवाना
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अपना प्रभाव बढ़ाएं महिलाएं
वर्तमान में महिलाओं की राजनीति में भागीदारी के पीछे उसका पति, पुत्र या पिता का चेहरा होता है। पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं का वर्चस्व आज भी स्वीकार नहीं है। महिलाओं को अपना प्रभाव बढ़ाना होगा तथा राजनीतिक शक्ति का सही उपयोग सीखना होगा।
-नरेन्द्र कुमार शर्मा, जयपुर
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आत्मनिर्भर बनें महिलाएं
पहले कदम के तैार पर,महिलाएं चूल्हे-चौके तक न बंधकर आत्मनिर्भर बनें और अपनी नेतृत्व क्षमता विकसित करे। राजनितिक दल भी महिला उम्मीदवारों को टिकट देने में प्राथमिकता दिखाएं। पंचायत में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण निर्धारित है, उसी तर्ज पर संसद में भी महिला आरक्षण निर्धारित करने के लिए महिला आरक्षण बिल पास करने में तत्परता दिखाई जाए।
-सरस्वती जैन, हुबली

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