सेहत : कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चों को कितना खतरा

नया डेल्टा वेरिएंट भी बच्चों के लिए अधिक खतरनाक नहीं है। दुनिया के किसी भी देश से और भारत में दोनों लहरों के आधार पर ऐसे कोई साक्ष्य नहीं हैं।

कोविड-19 की तीसरी लहर हो या अगली कोई लहर बच्चों के लिए अतिरिक्त खतरे जैसी कोई बात नहीं है। इसके बाद अभिभावक चिंता से मुक्त हुए हैं ।

By: विकास गुप्ता

Published: 22 Jun 2021, 07:53 AM IST

डॉ. चंद्रकांत लहारिया, (जन स्वास्थ्य, वैक्सीन और स्वास्थ्य तंत्र विशेषज्ञ)

मई माह के शुरुआती दिनों में अभिभावक कुछ ऐसी खबरों से डर गए थे कि कोरोना की तीसरी लहर मुख्यत: बच्चों को प्रभावित करेगी। अब यह स्पष्ट हो चुका है कि ये खबरें निराधार थीं। यह देखा गया है कि बच्चों में भी संक्रमण दर वयस्कों के समान ही होती है, बस बच्चों में संक्रमण के बाबजूद यह वायरस गंभीर रूप से बीमार नहीं कर पाता है। इसका कारण यह है कि संक्रमण के बाद फेफड़े में घुसने के लिए वायरस को एक प्रकार के रीसैप्टर से चिपकना होता है। सौभाग्य से बच्चों के फेफड़ों में ऐसे रीसैप्टर पर्याप्त रूप से विकसित नहीं होते हैं। पहली और दूसरी लहर के दौरान यह अनुपात इतना ही रहा, बदला नहीं। नया डेल्टा वेरिएंट भी बच्चों के लिए अधिक खतरनाक नहीं है। दुनिया के किसी भी देश से और भारत में दोनों लहरों के आधार पर ऐसे कोई साक्ष्य नहीं हैं। कोविड-19 की तीसरी लहर हो या अगली कोई लहर बच्चों के लिए अतिरिक्त खतरे जैसी कोई बात नहीं है। इसके बाद अभिभावक चिंता से मुक्त हुए हैं ।

हालांकि अब अखबारों में खबरें आने लगी हैं कि जिन बच्चों को कोविड -19 की गंभीर बीमारी हो जाती है, उनमें मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम इन चिल्ड्रन (एमआइएस-सी) बीमारी होने की आशंका है। माता-पिता फिर चिंतित से हो गए हंै। इस संबंध में सही जानकारी होने से चिंता कम हो सकती है। पहली बात, यह दुर्लभ बीमारी है और इलाज से ठीक हो जाती है। दूसरी बात, हर बच्चा इससे प्रभावित नहीं होगा। केवल जिन बच्चों को गंभीर कोविड-19 बीमारी हुई हो, उनको इसका कुछ खतरा है। इसलिए जिन अभिभावकों के बच्चे किसी भी तरह के कोरोना संक्रमण के शिकार हुए हैं, उन्हें लक्षणों के बारे में सचेत रहना होगा। कोरोना के आरंभिक संक्रमण के तीन से छह सप्ताह के भीतर इसके लक्षण पाए जा सकते हैं। बच्चे को तेज बुखार हो सकता है, जो तीन-दिन या उससे अधिक रहे। अगर बच्चे में इसके साथ ही उल्टी-दस्त, पेट दर्द की शिकायत हो, हाथ-पैर में चकत्ते से हो गए हों और ग्रंथियों में सूजन हो, तो बच्चे के माता-पिता को चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। यह एमआइएस-सी हो सकता है। अगर लक्षणों की पहचान जल्दी हो जाए, तो इसका इलाज हो सकता है।

महामारी के दौर में बहुत सी भ्रामक जानकारियों की भरमार है। ऐसे में सही और विश्वसनीय जानकारी ही आपको तनाव मुक्त रख महामारी से लडऩे में मदद कर सकती है। साथ ही मास्क पहनना, हाथ धोना और आपस में दूरी बना कर रखना जैसे कोविड उपयुक्त आचरण को अपनाएं। सार्वजनिक स्थलों पर या लोगों के बीच होने पर पांच वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को मास्क पहनना चाहिए। कोविड-19 से बचने का एक ही मंत्र है- जानकारी और बचाव, इलाज से बेहतर है।

विकास गुप्ता
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