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भारत-बांग्लादेश संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद

locationजयपुरPublished: Feb 07, 2024 06:25:59 pm

रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस उनके वतन भेजने के प्रयासों में तेजी लाने के लिए भारत सरकार को तत्काल कार्रवाई करने पर ध्यान देना चाहिए।

भारत-बांग्लादेश संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद
भारत-बांग्लादेश संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद
डॉ. शुजाअत अली कादरी- मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन

साल 2024 की शुरुआत में एक प्रमुख सकारात्मक खबर सामने आई। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना चुनाव में जीत दर्ज कर लगातार चौथी बार प्रधानमंत्री चुन ली गईं। उनके नाम बांग्लादेश के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड हो गया है। शेख हसीना के लिए ये चुनाव आसान नहीं था, क्योंकि उनके सामने चरमपंथी ताकतें थीं और अंतरराष्ट्रीय दबाव था। इसीलिए उन्होंने आम जनता और देश के आर्थिक विकास के लिए लगातार काम किया। बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के मद्देनजर, हसीना के नेतृत्व में अवामी लीग ने देश को विकास के रास्ते पर लाने में एक लंबा सफर तय किया है।
हसीना के शुरुआती कार्यकाल में जमात-ए-इस्लामी पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई देखी गई थी। 1971 में दानिश्वर तबके और हिंदू अल्पसंख्यकों के नरसंहार में सबसे आगे था। लेकिन जमात-ए-इस्लामी को अंतरराष्ट्रीय सलाफिस्ट संगठनों से समर्थन मिलता रहा और 9/11 के बाद यह दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बन गया। अवामी लीग ने चरमपंथी और विद्रोही आंदोलनों पर भारत की चिंताओं का बिना शर्त समर्थन किया। आर्थिक मोर्चे पर, 2016 और 2023 के बीच लगभग 6.5 प्रतिशत की औसत जीडीपी बढ़ोतरी दर के साथ, बांग्लादेश आर्थिक स्थिरता और विकास के लिए एक उम्मीद के रूप में उभरा है, जिसकी विकास दर कई अन्य सफल एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के बराबर है। विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व बैंक ने भी गरीबी दर में 2010 के 11.8 प्रतिशत से 2022 में 5 प्रतिशत की स्पष्टकमी देखी है। हालांकि चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन यह जरूरी है कि बांग्लादेश और भारत साझा विकास के लिए और दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय आर्थिक क्षमता को और बढ़ाने के लिए अपने सहयोग को गहरा करना जारी रखें। आज बांग्लादेश के कुल निर्यात का 12 प्रतिशत भारत को जाता है।
एनडीए सरकार की जीत ने आपसी विश्वास बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई। 2015 और 2017 के बीच, भारत ने ऊर्जा और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए 7 अरब डॉलर का सॉफ्ट क्रेडिट और 500 मिलियन डॉलर का अनुदान दिया। 2023 तक मैत्री पावर प्लांट की दो इकाइयों के पूरा होने के साथ, संयुक्त प्रयास से 3.6 बिलियन डॉलर से अधिक की लागत से 2600 मेगावाट उत्पादन करने की क्षमता बढ़ गई है। दोनों देश क्षेत्रीय मुद्राओं को मजबूत करने और विदेशी मुद्रा दबाव को कम करने के लिए व्यापार लेनदेन को रुपये और टका में निपटाने पर भी सहमत हुए। 2023 में, अखोरा-अगरतला रेलवे लाइन के उद्घाटन ने बांग्लादेश को पहली बार भारत के उत्तर-पूर्व से जोड़ा।
सितंबर 2023 में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान बांग्लादेश की अहमियत सामने आई, जहां प्रधानमंत्री हसीना को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। अपने भाषण में, हसीना ने जलवायु परिवर्तन और एसडीजी जैसे प्रमुख लक्ष्यों की दिशा में काम करने की बात कही और अन्य सभी मुद्दों पर सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा की दिशा में काम करने को प्राथमिकता दी। इसके बाद उन्होंने विकासशील अर्थव्यवस्थाओं, महिला सशक्तीकरण में एलडीसी के लिए एक ब्लूप्रिंट की आवश्यकता पर रोशनी डाली , जो दर्शाता है कि बांग्लादेश व्यापक मानवीय मुद्दों पर सहयोग करने के लिए विचार करने को तैयार है।
बांग्लादेश भारत के एक्ट ईस्ट विजन के साथ-साथ इसकी इंडो-पैसिफिक रणनीति के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है। इसीलिए भारत ने अपने प्राथमिक क्षेत्रीय सहयोगी के रूप में बांग्लादेश का पुरजोर समर्थन किया है। बांग्लादेश को अपने सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बहुत उम्मीदें हैं। रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस उनके वतन भेजने के प्रयासों में तेजी लाने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। जमात-ए-इस्लामी के प्रभाव को रोकने के लिए अवामी लीग के प्रयासों को समर्थन देने की जरूरत है।

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