जमा पूंजी: 45 साल के हो गए हैं तो फिर कहां और कैसे करें निवेश

  • आत्मनिर्भर ही नहीं, आत्मविभोर भी हो जीवन का उत्तरार्द्ध

 

By: shailendra tiwari

Published: 30 Sep 2020, 03:03 PM IST

  • असीम त्रिवेदी, सीए, ऑडिटिंग एंड अकाउंटिंग स्टेंडर्ड, कानूनी मामलों के जानकार

रिटायरमेंट में 10-15 साल बचे हैं, जीवन यात्रा के लगभग बीच में खड़े जिंदगी की जंग के ऐसे लड़ाकों को आज का लेख समर्पित है। सुकून भरा उत्तरार्ध ही इस लड़ाके द्वारा खुद को दिया जाने वाला एकमात्र उपहार है। आज आत्मविभोर अवस्था में ये लड़ाका अब जिंदगी के टीले पे खड़ा अपने सुकून भरे उत्तरार्ध की बगिया के सपने देख रहा है, जहां वो अपनी सहगामिनी के साथ, नन्हे-मुन्नों के बीच जीवन को चैन से गुजारेगा। आज ये लड़ाका सोच रहा है कि रिटायरमेंट का पैसा तो बुढ़ापे की लाठी है, इसलिए यही समय है अपने अब तक के निवेश की पुन: समीक्षा का।

अब तक आप एक अचल सम्पत्ति के मालिक हो ही गए होंगे, अगर नहीं तो अब अचल सम्पत्ति में पैसा डालने का कोई औचित्य नहीं है। अगली पीढ़ी को कहिए कि जितनी उम्र हमारी बची है वो हम तुम्हारे घर में गुजारेंगे (तुम्हारी किस्त का एक तिहाई हमसे ले लो)। उन्हें लोन लेने दीजिए, अब 45 की उम्र में बचत का बड़ा भाग मकान में डालना और नई किस्तें बांधना बड़ा जोखिम है।

इसका एक विकल्प है - 15 हजार रुपए प्रति माह, अगले 15 वर्ष तक बचाना। इससे साठवें वर्ष में कम से कम 50 लाख का कॉर्पस फंड होगा (रिटायरमेंट के अलावा), वो भी सिर्फ सुरक्षित निवेश से ही। दूसरा विकल्प - इन 15 हजार रुपयों में से आधे को अगर पीपीएफ जैसे सुरक्षित निवेश में डाल दिया जाए, ऐसे में ये रुपए 15 साल में 25 लाख के करीब हो जाएंगे (इस पर लोन मिल जाता है, बच्चों की शादियों में कुछ सहारा लग जाएगा।) और बाकी बचे आधे (90 हजार प्रतिवर्ष) को म्यूचुअल फंड में लगा दिया, तो 12.5% से, 15वें साल से, हर साल (60 से 75 की आयु तक) इस हर वर्ष के किए गए निवेश का लगभग पांच गुना पैसे मिलेगा (लगभग 4.5 लाख रुपए प्रति वर्ष)।

45 की उम्र में घर बना कर, 15 साल उसकी किस्तें भरकर, उसके बाजार मूल्य की बढ़ोतरी के संतोष के बदले इस वित्तीय स्वतंत्रता को न्योछावर करना कहां तक उचित है। इसलिए कसम खा लीजिए, 45 से 55 ऋण से उऋण होने का समय है, नया ऋण लेने का नहीं। आज लिए गए नीतिगत निर्णय आपको आत्मनिर्भर के साथ आत्मविभोर रखेंगे। अगले अंक में 35 से 45 वर्ष के युवाओं की वित्तीय नीति पर चर्चा करेंगे।

shailendra tiwari
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