आपकी बात, क्या बेरोजगारी के कारण भी अपराध बढ़ रहे हैं?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 07 Apr 2021, 07:25 PM IST

बेरोजगार युवा पकड़ लेते हैं अपराध की राह
यह कहना गलत नहीं है कि बेरोजगारी से अपराध को बढ़ावा मिलता है। आज के समय में पढ़े-लिखे युवा भी बेरोजगार हंै। उनको उनकी योग्यता के अनुसार काम न मिलने पर वे इधर-उधर भटकते हैं। इसी दौरान उनका समाजकंटकों से से संपर्क होता है और वे अपराध जगत से जुड़ जाते हैं।
-देवाशीष जैन, पन्ना, मध्य प्रदेश
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दिखावे की प्रवृत्ति से भी बढ़ रहे हैं अपराध
बेरोजगारी अपराध के ग्राफ में वृद्धि करने में हमेशा सहायक रही है, किंतु दिखावे और खर्चीली प्रवृत्ति भी युवा वर्ग को अपराध की तरफ धकेल रही है। शौक पूरे नहीं होते तो कुछ युवा राह भटक जाते हैं। कहीं मजबूरी भी अपराध करने मजबूर करती है।
-राजेश सराफ, जबलपुर
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परिवार और समाज का असर
परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थाओं का व्यक्ति पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। यदि किसी की परवरिश अच्छे नैतिक मूल्यों वाले परिवार में नहीं हुई है या समाज में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के साथ रहता है या उसे अच्छी शिक्षा और रोजगार न मिल पाए तो भी संभावना होती है कि वह व्यक्ति अपराधी बन जाए। इसलिए अपराध में कमी लाने के लिए परिवार, समाज और सरकार सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। परिवार में बच्चों की नैतिक मूल्यों के साथ परवरिश करनी होगी, वहीं सरकार को कोशिश करनी होगी कि वह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सभी तक पहुंचाएं और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध करवाए।
-लक्ष्मण डोबवाल, ,उनियारा, टोंक
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गुमराह होती युवा पीढ़ी
भारत में भयावह रूप से बढ़ रही बेरोजगारी के स्तर ने निराशाजनक स्थिति में पहुंचे युवाओं को पथभ्रष्ट किया है। योग्यता अनुसार काम ना मिलना और कम समय में अधिक पैसे कमाने की लालसा के कारण युवा पीढ़ी साइबर अपराध और नशे की ओर बढ़ रही है। आय का निश्चित स्रोत ना होने की कुंठा ने शिक्षित युवा बेरोजगारों को अनैतिक प्रवृत्तियों और अपराध की ओर धकेल दिया है। युवाओं को गुमराह होने से बचाने के लिए अब आवश्यक है कि बेरोजगारी की समस्या की ओर गंभीरता से ध्यान दिया जाए।
-निष्ठा टहिलयानी, जयपुर
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संस्कारों का असर
यदि मनुष्य के संस्कार अच्छे हैं, तो बेरोजगारी उसके व्यक्तित्व को निखार देती है, लेकिन वही बेरोजगारी संस्कार विहीन मनुष्य को अपराध जगत की ओर धकेल कर पशु बना देती है।
-हुकमाराम सेंवर, औगाला, बाड़मेर
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स्व-रोजगार पर ध्यान दें युवा
जिंदा रहने के लिए कोई मजबूत आर्थिक आधार होना चाहिए। बेरोजगारी हताशा पैदा करती है एवं अपराध की ओर लेकर जाती है। देश में जिस अनुपात में बेरोजगारी बढ़ रही है, उसका बहुत बड़ा कारण यह भी है कि पढ़े-लिखे नौजवान केवल नौकरियों के पीछे भागते हैं, जबकि व्यवसाय एवं व्यक्तिगत हुनर से भी जीवनयापन अच्छे से किया जा सकता है। बेरोजगारों को केवल सरकारी नौकरी की चाह नहीं पालनी चाहिए। वे अपनी क्षमता को पहचानते हुए व्यवसाय करें एवं अपने भीतर के हुनर को अपने आर्थिक स्रोत का जरिया बनाएं ।
-सतीश उपाध्याय, मनेंद्रगढ़ कोरिया छत्तीसगढ़
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रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं
वर्तमान परिस्थिति में बेरोजगारी इतनी बढ़ गयी हैं कि लोग अपराध करने में भी नहीं हिचकते हैं। सरकार को निश्चित तौर पर रोजगार को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे अपराधों में कमी लायी जा सके।
-रेवत सिंह राजपुरोहित, सांचोर
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फंस जाते हैं बेरोजगार युवा
बेरोजगारी के कारण लूटमार और चोरी के अपराधों में ज्यादातर वृद्धि होती है। समाजकंटक बेरोजगार व्यक्ति को आसानी से अपने चंगुल में फंसा लेते हैं और उससे अपराध करवाते हैं। कहना उचित ही होगा कि बेरोजगारी अपराधों को बढ़ाने में सहायक है।
-श्रीकृष्ण पचौरी, ग्वालियर
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नहीं मिलता रोजगार
यह बात एक हद तक ठीक है कि बेरोजगारी के कारण भी अपराध बढ़ रहे हैं, क्योंकि युवा के किसी क्षेत्र में पूर्ण रूप से शिक्षित होने के बाद भी उसी क्षेत्र में रोजगार न मिलने से वह विचलित हो जाता है। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए वह अपराध की राह पर चल देता है।
-अभिषेक सांखला, सुजानदेसर, बीकानेर
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बेरोजगारी बड़ा कारण
अपराध बढऩे के पीछे बेरोजगारी एक बहुत बड़ा कारण है। जब व्यक्ति के पास आय का साधन नहीं होता, तो फिर वह अपराध करने को मजबूत हो जाता है। फिर धीरे-धीरे वह आदतन अपराधी हो जाता है। अगर हर व्यक्ति के पास अच्छा रोजगार हो तो अपराध बहुत कम हो जाएंगे।
देवेन्द्र, जयपुर
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जरूरत पूरी करने के लिए करते हैं अपराध
जिस तेजी से बेरोजगारी बढ़ रही है, उसी तेजी से अपराध का ग्राफ बढ़ रहा है। प्रत्येक वर्ष हजारों डिग्री धारी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों से निकलते हैं, लेकिन उनके हिसाब से नौकरियां न के बराबर होती हैं। अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए ही युवा अपराध कर बैठते हैं।
-प्रेम सिंह सोलंकी, रामगढ, जैसलमेर
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अपराध की ओर बढ़ता युवा
जहां एक तरफ युवा को देश का भविष्य कहा जाता है, वहीं दूसरी तरफ यह देखा गया है कि आजकल युवा बेरोजगारी की वजह से अपराध कर बैठता है। युवाओं में लंबे समय तक बेरोजगार रहने से उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। इस स्थिति को कोरोना महामारी ने और बढ़ा दिया हैं। इसलिए यह जरूरी है कि युवाओं के कौशल विकास की तरफ ध्यान दिया जाए, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
-मीना टेकवानी, जयपुर

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