आपकी बात, ऊर्जा संकट के चलते क्या देश की अर्थव्यवस्था पर पुन: एक गंभीर खतरा मंडरा रहा है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 11 Oct 2021, 04:23 PM IST

सरकार उठाए शीघ्र कदम
ऊर्जा संकट के चलते औद्योगिक क्षेत्रों की इकाइयों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का काम औद्योगिक क्षेत्र ही करता है, परंतु देश में चल रहे ऊर्जा संकट के कारण औद्योगिक क्षेत्र में कार्य की गति धीमी पड़ गई है। औद्योगिक क्षेत्र को इस संकट से जल्द से जल्द उबारना होगा। अगर ऊर्जा संकट के समाधान के लिए सरकार ने उचित कदम नहीं उठाया, तो देश की अर्थव्यवस्था गंभीर खतरे में फंस सकती है।
-पंकज जोधावत, खाजूवाला बीकानेर
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कोयले पर निर्भरता कम की जाए
ऊर्जा संकट के चलते देश की अर्थव्यवस्था गंभीर खतरे में पड़ सकती है। अगर समय रहते भारत बढ़ती ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए कोई दीर्घकालिक विकल्प नहीं ढूंढेगा, तो हालात बिगड़ सकते हैं। भारत को मिश्रित नीति पर चलना होगा। भारत मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए कोयले पर अपनी निर्भरता कम करे और अक्षय ऊर्जा रणनीति पर आक्रामकता से आगे बढ़े। अगर इस परिस्थिति को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो बिजली से चलने वाली हर चीजें प्रभावित होंगी।
-सरिता प्रसाद, पटना, बिहार
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सौर ऊर्जा पर ध्यान दिया जाए
ऊर्जा संकट के हल के लिए सौर ऊर्जा पर ज्यादा ध्यान देना होगा। राजस्थान के कई इलाकों में बहुत ज्यादा धूप होती है। इसका उपयोग करना होगा। उसके साथ ही पवन ऊर्जा को भी प्रोत्साहित करना होगा। पानी के बांधों पर भी बिजली का उत्पादन करना होगा। कूड़े-कचरों से भी बिजली उत्पादन करना होगा। रोड लाइट को भी एक पोल छोड़कर जलाना होगा।
-चन्द्रशेखर प्रजापत, जोधपुर
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आत्मनिर्भरता जरूरी
भारत में कोयले पर आधारित आधे से अधिक बिजली संयंत्र कोयले की तंगी झेल रहे हैं। कोयला भंडारण में गंभीर कमी आ गई है। भारत अल्पकालिक उपायों से किसी तरह मौजूदा संकट से तो निकल सकता है, लेकिन देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत को दीर्घकालिक विकल्पों में निवेश करने की दिशा में काम करना होगा। सौर ऊर्जा विकसित करके हमें अपने संसाधनों का उपयोग करना होगा। हमें अपनी तकनीकी और अपने संसाधनों का उपयोग कर आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी।
-डॉ.अजिता शर्मा, उदयपुर
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बढ़ रही है चिंता
दुनियाभर में ऊर्जा संकट हर रोज ज्यादा गंभीर होता जा रहा है। कोरोना महामारी के बाद बिजली और पेट्रोलियम की तेजी से बढ़ रही मांग और मौसम संबंधी भविष्यवाणियों के कारण दुनिया के लगभग हर क्षेत्र में चिंता बढ़ रही है।
-राहुल पालीवाल, राजसमंद
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खोजना होगा समाधान
निश्चित रूप से ऊर्जा संकट अकल्पनीय है। एकाएक पावर कट हो जाना सबके लिए कष्ट प्रद हो रहा है। इन दिनों बांधों में पानी पर्याप्त होने से पनबिजली का उत्पादन भी अच्छा रहता है। सोलर ऊर्जा और पवन ऊर्जा का भी खूब प्रचार हुआ है। इसके बावजूद बिजली संकट पैदा होना चिंताजनक है। समस्या का समाधान शीघ्र खोजना होगा।
-बृजनेहरू पाटीदार, नीमच, म.प्र.
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गंभीर संकट
भारत में आधे से अधिक बिजली संयंत्र कोयले की मार झेल रहे हैं। महामारी के बाद पटरी पर लौटती अर्थव्यवस्था पर इन दिनों ग्रहण- सा लगता प्रतीत हो रहा है। हमारे देश का कोयले के भंडार वाले देशों में, चौथा स्थान है परन्तु इसकी खपत इतनी अधिक है कि हमें ऊर्जा पैदा करने के लिए महंगा कोयला आयात करना होता है। ऐसे में कोयला संकट के चलते, बिजली महंगी होना लगभग तय है। महंगी बिजली का असर उत्पादन सेक्टर, सीमेंट, स्टील, कंस्ट्रक्शन, हर ओर होगा। खाद्य तेलों के साथ, पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में हो रही अप्रत्याशित वृद्धि भी महंगाई को नियंत्रित नहीं कर पा रही है। ये सब बातें, आने वाले दिनों में भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर संकट लाने वाली-सी प्रतीत हो रही हैं।
-नरेश कानूनगो, बैंगलूरू, कर्नाटक.
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जरूरी कदम उठाए सरकार
देश में पेट्रोल, डीजल, एवं बिजली के मूल्यों में निरंतर वृद्धि हो रही है। इसके कारण आम आदमी का बजट बिगड़ता जा रहा है, लेकिन वर्तमान समय में ऊर्जा संकट के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी काफी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यदि इसी तरह महंगाई बढ़ती रही, तो आने वाले समय में पूरे देश में काफी उथल-पुथल देखने को मिलेगी। महंगाई को रोकना है तो सरकार को आवश्यक कदम उठाने होंगे
-सुरेंद्र बिंदल जयपुर
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ऊर्जा संकट बड़ी चुनौती
मंदी के दौर से ऊपर उठ रही अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा संकट चुनौती है। ऊर्जा किसी भी देश के विकास और वहां के जीवन स्तर का ***** होती है। भारत जैसे घनी आबादी वाले देश का औद्योगिक व कृषि विकास त्वरित व निर्बाध गति से होना आवश्यक है। ऐसे में मांग के अनुरूप विद्युत की उपलब्धता को पूर्ण करने के लिए अब हमें दूसरों पर निर्भरता कम करनी होगी। देश पर चल रहे विद्युत संकट को दूर करने के लिए अब हमें भू-तापीय और सौर ऊर्जा जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर आत्मनिर्भर होना पड़ेगा।
-नीता टहिलियानी, जयपुर
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ऊर्जा विकल्प खोजने होंगे
बिजली का संकट प्रत्येक आर्थिक गतिविधि पर संकट है। कोयले का निरंतर आयात आत्मनिर्भरता नहीं है। प्राकृतिक हवा और पानी स्रोतों से बिजली उत्पादन समय की मांग है और देश की अर्थव्यवस्था को प्रतिकूल प्रभावों से बचाने का स्थाई समाधान है।
-मुकेश भटनागर, वैशालीनगर, भिलाई
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गंभीर खतरा

कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से उभरती अर्थव्यवस्था के लिए 'ऊर्जा संकट' एक गंभीर खतरा है। ऊर्जा उत्पादन के लिए कोयले पर सर्वाधिक निर्भरता के साथ कोयले के वितरण एवं प्रबंधन में विफलता से सरकारी तंत्र पर सवालिया निशान लगता है। इस प्रकार के संकट से उभरने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना चाहिए। साथ ही वर्तमान संकट का कड़े कदम उठाकर समाधान करना चाहिए।
- दिनेश चौधरी, सोरडा, सिरोही

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