आपकी बात, क्या विदेशी मीडिया जानबूझकर भारत सरकार की छवि खराब कर रहा है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 04 May 2021, 04:49 PM IST

हकीकत सामने आई
भारत इस वक्त कोरोना की सबसे भयानक मार झेल रहा है। ऐसे समय में दुनिया की प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने अपने कवर पेज पर देश के एक शहर में श्मशान में शव ले जाते परिजनों की तस्वीर प्रकाशित की है। इसे लेकर बड़ा बवाल मचा है। सरकार जिस सच को दबाने का प्रयास कर रही है, उसी हकीकत को अगर अंतरराष्ट्रीय मीडिया उजागर कर रहा है, तो इसमें गलत क्या है? अगर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में हमारी थू-थू हो रही है, तो वह सिर्फ इसलिए कि हमने पिछले एक साल में स्वास्थ्य सुविधाएं जुटाने की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। पूरी दुनिया ने पहली लहर में लॉकडाउन लगाकर अपने मेडिकल सिस्टम को मजबूत किया। इसके उलट हमारे यहां क्या हुआ? सरकार ने मान लिया कि हमारे यहां तो कोई दूसरी लहर ही नहीं आने वाली। इसी सोच का परिणाम है कि आज हमारा देश कोरोना की दूसरी लहर की जकड़ में है।
-डॉ. अजिता शर्मा, उदयपुर
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जो सच है वही दिखाया
विदेशी मीडिया ने भारत का वह खौफनाक सच सामने रखा है, जो भारतीय मीडिया आंशिक रूप से ही सामने ला सका है। देश के हालात से सारी जनता भली भांति परिचित है। लोगों को ऑक्सीजन, अस्पताल, बिस्तर, दवा और यहां तक कि अंतिम संस्कार तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। विदेशी मीडिया ने यही बात सामने रखी है। विदेशी मीडिया के अनुसार भारत मे मृतकों की वास्तविक संख्या छुपाई जा रही है, इस तरह के आरोपों में दम है। जिस मोक्षधाम में 1000 से अधिक अंतिम संस्कार हुए, वहां सरकारी आंकड़े 40 बताए गए। हालात यहां तक हुए कि लकडिय़ां कम पड़ गईं। मोक्षधामों की कई तस्वीरें सामने आईं जहां शवों की कतार लगी हुई थी। यह भी बताया गया है कि कि देश के बड़े नेता चुनाव की रैलियों में व्यस्त थे और देश में हाहाकार मचा हुआ था। ये बातें ऐसी हैं, जिन्हें छुपाया नहीं जा सकता।
-नटेश्वर कमलेश, चांदामेटा, मध्यप्रदेश
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भारत की छवि खराब करने की कोशिश
भारत के कोरोना संक्रमण के हालात पर विदेशी मीडिया जो रिपोर्टिंग कर रहा है, वह एकतरफा और गैर जिम्मेदार है। जब भी कोई आपदा आती है, तो अंतरराष्ट्रीय मीडिया भारत की छवि खराब करने में लग जाता है। आज अनेक देश कोरोना की दूसरी और तीसरी लहर से जूझ रहे हैं। उनके हालात भारत से भी ज्यादा अनियंत्रित हैं, पर दुनिया भर का मीडिया भारत की छवि को ही खराब करने पर तुला हुआ है।
-नरेश कानूनगो, गुंजुर, बैंगलूरु, कर्नाटक
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वास्तविकता से मुंह न छिपाएं
मीडिया का कार्य होता है जनता को वास्तविक स्थिति से अवगत कराना। मीडिया स्वदेशी हो या विदेशी, उसे बिना किसी दबाव के काम करना चाहिए। अभी हाल ही में कुछ विदेशी अखबारों में कोरोना के कारण भारत की बिगड़ी स्थिति के लिए भारत सरकार को जिम्मेदार ठहराया गया है। भारत सरकार की नीतियों व निर्णय पर सवाल खड़े किए गए हैं। जैसे एक विदेशी अखबार ने कोरोना से निपटने में भारत की विफलता का कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अति आत्मविश्वास बताया है। इसी तरह एक विख्यात मैगजीन ने लिखा है प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की विफलता ने भारत का कोरोना संकट और गहरा कर दिया है। एक अखबार ने लिखा है कि संक्रमण के खतरे के बीच स्टेडियम, कुंभ और चुनावी रैलियों की भीड़ ने सब बर्बाद कर दिया। यह वास्तविकता है।
-गिरवर सिंह, कोटा
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सरकार का साथ देने का समय
विरोधियों का काम तो मौका मिलते ही अपनी भड़ास निकालने का होता है। जनसंख्या के लिहाज से हिंदुस्तान दुनिया में दूसरे नंबर पर आता है, लेकिन अर्थव्यवस्था विकसित नहीं है। इतनी बड़ी जनसंख्या के लिए संसाधनों की सुचारु और सुगम व्यवस्था नहीं हो पाती। कुछ खामियां जरूर रह गई हैं। शुरुआत में सरकार ने काफी ठोस और उचित कदम उठाए, लेकिन इतनी बड़ी जनसंख्या को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना किसी चुनौती से कम नहीं है। खैर हमारी खामियां रहीं। चुनावी दौरे हुए, रैलियां हुई, शादी समारोह नहीं रुके, कुंभ स्नान, आइपीएल जैसे आयोजन धड़ल्ले से किए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किरकिरी होना स्वाभाविक है। जनता एवं राजनेता नैतिक जिम्मेदारी उठाए और प्रशासन का सहयोग करें ताकि कोरोना काल की इस विकट घड़ी में सरकारें ठोस कदम उठाकर देश को इस महामारी से उबार सके।
-सुनीता सांडेला, सरदारशहर
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विदेशी मीडिया को मौका मिला
कुंभ स्नान एवं चुनावी रैलियों को कोरोना की दूसरी लहर का बड़ा कारण बना कर प्रचारित किया गया। विदेशी मीडिया ने प्रधानमंत्री को सत्ता के लिए कोरोना से होने वाली मौतों का जिम्मेदार मान लिया। दवाइयां, ऑक्सीजन एवं वैक्सीन को लेकर जनता में रोष पैदा हो गया। कोरोना लहर इतनी तीव्र थी कि आनन फानन में कोरोना की रोकथाम के लिए कदम उठाने पड़े। देश में एकजुटता का अभाव एवं लापरवाही के चलते विदेशी मीडिया को मौका मिल गया।
-नरेन्द्र कुमार शर्मा, जयपुर
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भ्रमित न हो जनता
विदेशी मीडिया भारत सरकार व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि खराब करने में लगा है। आज देश में कोरोना के कारण हालात बिगड़ रहे हैं, तो इसके लिए चीन जिम्मेदार है, क्योंकि यह वायरस वहीं से फैला है। जनता को भ्रमित नहीं होना चाहिए।
-जयेश जैन अरिहंत, इंदौर
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आईना है मीडिया
स्वतंत्र मीडिया चाहे देशी हो या विदेशी आईने के समान होता है। आईना जैसा होता है, वैसा दिखाता है। इससे किसी की छवि बने या बिगड़े ,उसमें आईने का कोई योगदान नहीं होता। भारत में सत्तारूढ़ वर्तमान शासकों ने अपना अलग निजी मीडिया तंत्र स्थापित किया हुआ है जिसका काम येन-केन-प्रकारेण अपने मालिकों का प्रचार करना एवं विपक्षियों का दुष्प्रचार करना है। स्वतंत्र मीडिया, अपने संवाददाताओं से प्राप्त ग्राउंड रिपोट्र्स से संचालित होता है। अत: वह जो है, वही प्रसारित करता है। अत: छवि बिगाडऩे या बनाने का काम स्वतंत्र मीडिया नहीं करता।
-गिरीश कुमार जैन इंदौर
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एक तरफा रिपोर्टिंग
विदेशी मीडिया ने भारत में कोविड के हालात पर जो रिपोर्टिंग की है, वह एक तरफा है और भेदभावपूर्ण है। किसी देश का मीडिया भारत को लेकर नकारात्मक बात लिखता है, तो उसके दबाव में आने की जरूरत नहीं है। नकारात्मक पक्ष ही दिखाना, भारत की छवि को विश्व पटल पर धूमिल करना है। कोविड के सामने बड़े-बड़े देशों के सिस्टम बैठ गए। इसलिए कोई भी ऐसा कतई न सोचे कि केवल भारत में ही स्थितियां खराब हुई हंै। फिर भी हमसे कहीं न कहीं चूक तो हुई है, जिसकी वजह से स्थितियां ज्यादा खराब हुई हैं। अत: हमें इस स्थिति से निकलने के सकारात्मक प्रयास करते रहना है ।
-कमलेश कुुमार कुमावत, चौमूं, जयपुर

आईना दिखाने में गलत क्या?
आज हमारा देश एक खौफनाक और दर्दनाक दौर से गुजर रहा है। आजादी के सात दशक बात भी स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर हमारी स्थिति बेहद चिंताजनक है और प्रशासनिक प्रबंधन तो शर्मसार कर देने वाला है। उथल-पुथल और कुप्रबंधन की इस विकराल समस्या से हमारे देश का आम आदमी त्रस्त है। यदि इस बात को विदेशी मीडिया ने दिखाया है तो इसमें गलत क्या है? एक दौर ऐसा भी था जब सत्तासीन हुकूमत ने विदेशी मीडिया में सुर्खियां भी बटोरी थीं। जब तारीफों के पुल बांधे जा सकते हैं, तो आईना भी दिखाया जा सकता है।
-अरविंद शर्मा, भगीना, झुंझुनंू
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अपना काम कर रहा है विदेशी मीडिया
विदेशी मीडिया ने समय-समय पर अपना कर्तव्य निभाया है। देश के वास्तविक हालात बताने का तात्पर्य सरकारों की छवि खराब करना नहीं, बल्कि उन्हें अपने कर्तव्यों से अवगत कराना होता है। लाशों के ढेरों पर चुनाव हों या धार्मिक आयोजन सभी आज की भयावह परिस्थिति के लिए जिम्मेदार हंै। अच्छे कार्यों के लिए विदेशी मीडिया ने भारत सरकार की प्रशंसा भी की है। इसलिए विदेशी मीडिया में भारत की वर्तमान परिस्थिति से सम्बन्धित प्रकाशित होने वाली खबरों को सकारात्मक रूप से लेने की आवश्यकता है।
-शुभम बंसल, मलारना डूंगर
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सच आया सामने
सभी भारतीयों को विदेशी मीडिया, खासतौर पर अमरीकी मीडिया को धन्यवाद देना चाहिए कि उसने सच सामने रखा। कोरोना महामारी के कारण लाशों के ढेर लगते जा रहे है। भारत का मीडिया सत्ता की नाकामी छुपाने में लगा है। इस आफत की घड़ी में विदेशी मीडिया भारत के लोगों तथा इंसानियत की रक्षा के लिए आवाज उठा रहा है। भारत की इस स्थिति के लिए केन्द्र सरकार जिम्मेदार है, क्योंकि बड़े-बड़े डॉक्टरों ने पहले ही खतरे से आगाह कर दिया था।
-अमित कुमार, सागर, मप्र
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तथ्यों पर आधारित है रिपोर्ट
इन दिनों विदेशी मीडिया में जो भारत के बारे में छप रहा है, वह तथ्यों पर आधारित है। ऐसा नहीं है कि ये बातें सिर्फ विदेशी मीडिया ही कर रहा है। भारत में भी एक बड़ा तबका ऐसा ही सोचता है, पर यहां सरकारी दबाव के चलते बहुत कम लिखा जा रहा है। विदेशी मीडिया को जो सूचना भारत से मिलती है, उसी आधार पर समाचार या लेख बनाए जा रहे हैं। इसमें भारत सरकार को बदनाम करने जैसा कुछ नहीं है।
-रमेश छाबड़ा, सूरतगढ़ ।
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सच्चाई का सामना करें
विदेशी मीडिया को दोषी ठहराना सही नहीं होगा। देश में समय रहते वैक्सीनेशन पर ध्यान नहीं दिया गया। ऑक्सीजन, रेमडेसिविर की कमी और कालाबाजारी आम है। मौत के आंकड़े छुपाए जा रहे हैं। हम सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ सकते।
-घनश्याम सिंह अम्ब, नीमच, मप्र
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अपना कर्तव्य निभा रहा है विदेशी मीडिया
जब सरकारें जनता की भलाई के अपने कर्तव्य से विमुख होती प्रतीत हों तो मीडिया सरकार को आईना दिखाता है। सरकार को उसे अपनी निंदा नहीं मानना चाहिए। विदेशी मीडिया भी सरकार की जानबूझकर बुराई नहीं कर रहा है और वह अपना कर्तव्य ही निभा रहा है।
-विनोद यादव, हनुमानगढ़
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विदेशी मीडिया को दोष देना गलत
अपनी गलती के लिए विदेशी मीडिया को दोष देना गलत है। देश में फैल रहे कोरोना के मामले और बदइंतजामी जगजाहिर है। सरकारें अपने स्तर पर महामारी पर लगाम लगाने में विफल रही हैं। वैक्सीन की कमी और ऑक्सीजन की कमी जैसे मसले छुपाए नहीं जा सकते। फिर विदेशी मीडिया तो वही बताएगा, जो हमारी कमजोरी है।
-प्रकाश चन्द्र राव, भीलवाड़ा
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चरमरा गई स्वास्थ्य व्यवस्था
आज विश्व के इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में भारत की कोरोना महामारी के विकराल रूप के चर्चे हैं। किसी से छुपा नहीं है कि कैसे श्मशान में दाह संस्कार के लिए भी टोकन लेना पड़ रहा है। दाह संस्कार के लिए बीस हजार रुपए तक देने पड़ रहे हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा रही है। सबको लगता है कि कुंभ का आयोजन और चुनावी रैलियों ने देश को मुश्किल में डाल दिया है। विदेशी मीडिया इन बातों को ही उजागर कर रहा है।
-संजय चौहान, ब्यावर ,अजमेर
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विदेशी मीडिया को मिला मौका
विश्व पटल पर भारत की बढ़ती लोकप्रियता कहीं न कहीं कई देशों को कचोट रही है। कुछ रही सही कसर हमारे देश का विपक्ष और कुछ मीडिया हाउस पूरी कर रहे हैं, तो विदेशी मीडिया को भी मौका मिल गया है। इसलिए वह भी भारत सरकार की छवि खराब कर रहा है।
-श्रीभगवान शर्मा, बाड़ी, धौलपुर
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जवाब दें विदेशी मीडिया को
सवाल यह उठता है कि हम अपनी छवि खराब करने का मौका ही उन्हें क्यों दें? संकट के इस दौर में अपनी सूझबूझ, बेहतर प्रबंधन, अच्छे इंतजाम और नए प्रयोगों से सुदृढ़ विकास का मॉडल सामने रखकर विदेशी मीडिया का मुंह बंद कर सकते हैं।
कुमकुम सुथार ,रायसिंहनगर श्रीगंगानगर
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ठीक नहीं है विदेशी मीडिया का रवैया
विदेशी मीडिया एक सोची समझी रणनीति के तहत भारत सरकार की छवि को खराब कर रहा है। सरकार की अपनी कुछ कमजोरियां हो सकती है, लेकिन देश को बदनाम करना ठीक नहीं है।
हरिप्रसाद चौरसिया, देवास, मध्यप्रदेश

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