आपकी बात, बिहार के चुनाव के दौरान फ्री कोरोना वैक्सीन का वादा उचित है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: shailendra tiwari

Published: 23 Oct 2020, 06:04 PM IST

निम्नस्तरीय राजनीति
चुनाव में भाजपा ने वादा किया है कि बिहार की जनता को कोरोना वैक्सीन मुफ्त में लगाई जाएगी। भाजपा को महामारी का इस प्रकार राजनीतिकरण करना बिल्कुल शोभा नहीं देता। महामारी के इस विकट समय में जहां कोरोना से निपटने के लिए मंथन होना चाहिए था, वहां पर राजनेता लाखों की भीड़ एकत्रित करके चुनावी रैलियां कर रहे हंै। केंद्र सरकार जबाब दे कि आखिर राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा देश के अन्य राज्यों की जनता को कोरोना वैक्सीन मुफ्त पाने के लिए क्या आगामी चुनाव की प्रतीक्षा करनी होगी?
-शुभम आजाद, सवाई माधोपुर
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संवेदनहीनता की पराकाष्ठा
काम के मुद्दों पर जनता से वादा कीजिए। बेहतर शिक्षा, चिकित्सा व्यवस्था आदि उपलब्ध कराना सरकार का प्राथमिक कर्तव्य भी है और जनता इसके लिए टैक्स भी देती है। क्या इसका मतलब यह है कि उन राज्यों में मुफ्त में कोरोना वैक्सीन उपलब्ध नहीं कराई जाएगी जहां भाजपा की सरकार नहीं है? बात अगर बेहतर चिकित्सा व्यवस्था की होती तो फिर भी विचार किया जाता, परंतु यहां तो वादा एक ऐसी महामारी के टीके का है, जो अभी अस्तित्व में ही नहीं है। यह कैसा चुनावी वादा है। यह संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।
-पंकज नेहरा, बास मुंदी, चूरू
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ठीक नहीं है ऐसा वादा
चुनाव के दौरान बिहार मै मुफ्त कोरोना वैक्सीन का वादा उचित नहीं है, क्योंकि वैसे इस समय भारत में अभी तक कोई वैक्सीन नहीं बनी है, ना अभी तक ट्रायल का कोई परिणाम आया है। चुनाव के दौरान इस तरह का वादा सही नही है। अगर ऐसा चलता रहा तो देश बंट जाएगा। वैक्सीन देनी है तो पूरे भारत को दो।
-राजेन्द्र कालीराणा, परबतसर
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सच्चा वादा है
बिहार चुनाव में भाजपा ने वादा किया है कि राज्य में कोरोना वैक्सीन नि:शुल्क लगाई जाएगी। भाजपा जो कहती है वह करती है। सच्चा वादा करने में दिक्कत क्या है?
-प्रताप सिंह लूणवा, नावा, नागौर
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फिर दूसरे राज्यों का क्या होगा?
बिहार चुनाव में कोरोनो वैक्सीन का वादा एक गैरजिम्मेदाराना वादा है। इस वादे को शायद ही कोई भारतीय नागरिक हजम कर पाए ,क्योंकि किसी भी देश की सरकार सिर्फ एक राज्य की ना होकर संपूर्ण राष्ट्र की सरकार होती है। सिर्फ बिहार के लिए कोरोनो वैक्सीन फ्री देने का वादा उचित नहीं है। दूसरे राज्यों का क्या होगा? इस सवाल पर भी सरकार को खुलकर बात रखनी चाहिए।
-सूर्यपालसिंह चामुंडेरी, पाली
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मतदाताओं के साथ छल
बिहार में चुनाव के दौरान मुफ्त में वैक्सीन देने का वादा कतई उचित नहीं है। यह एक तरह से मतदाताओं से छल करने जैसा है। चाहे कोई भी पार्टी हो, ऐसा करना सरासर गलत है। इस प्रकार की सभी घोषणाओं पर चुनाव आयोग या कोर्ट को स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि आगे कोई भी पार्टी ऐसी घोषणाएं न करे। ऐसी लोकलुभावनी घोषणाओं से बचने के लिए चुनाव आयोग को सभी पार्टियों के जनघोषणा पत्रों की पहले जांच करनी चाहिए। उसके बाद ही पार्टियों को जनघोषणा पत्र जारी करने की आज्ञा होनी चाहिए।
-उगा राम प्रजापत, जोधपुर
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अभी टीका बना ही नहीं
बिहार चुनावों के दौरान मुफ्त कोरोना वैक्सीन का वादा भारतीय राजनीति में चुनावी वादों का एक अनूठा उदाहरण है क्योंकि जो चीज अभी भविष्य के गर्भ में है, उसका वादा कैसे किया जा सकता है? इसकी उपयोगिता, उपलब्धता एवं कीमत अभी अनिश्चित है।
-श्याम सुन्दर कुमावत, किशनगढ़, अजमेर
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चुनावी मुद्दा क्यों
सरकार को कोरोना वैक्सीन को चुनावी मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। वैक्सीन बनने के बाद सभी राज्यों में इसे नि:शुल्क करना चाहिए और वैक्सीन के बारे में अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार कर लोगों को जागरूक करना चाहिए।
-आलोक वालिम्बे, बिलासपुर,छत्तीसगढ़
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अनुचित है ऐसा वादा
कोरोनाकाल में जो दर्द बिहारियों ने झेला है, वह शायद ही किसी अन्य प्रांत के लोगों ने झेला होगा। भाजपा ने कहा है कि कोरोना वैक्सीन बिहार में नि:शुल्क लगाई जाएगी। अत: यह वादा करना अनुचित है। वैक्सीन आने पर तो सभी देश के लोगों को यह नि:शुल्क लगाई जानी चाहिए।
-शिवनाथ सिंह सोलंकी, सारंगपुर, मध्य प्रदेश
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प्रलोभन देना ठीक नहीं
चुनाव के दौरान जीवन रक्षण संबंधी प्रलोभन देकर वोट बैंक तैयार करना कभी भी किसी भी पार्टी के लिए उचित रणनीति साबित नहीं हो सकती। प्रलोभन केवल कुछ समय के लिए उपयोगी साबित हो सकता है, किंतु दूरगामी परिणाम कभी सुखदाई नहीं हो सकते। बिहार में कोरोना वैक्सीन को चुनावी घोषणा पत्र का हिस्सा बनाना अविवेकपूर्ण निर्णय है।
-डॉ.अमित कुमार दवे, खडग़दा
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नेताओं के खेल निराले
चुनावों के दौरान आम जनता को लुभाने के नेता नए-नए तरीके अपनाते हंै। कोरोना महामारी के दौर में जहां प्रत्येक व्यक्ति हर क्षण कोरोना से जूझ रहा है, वहीं नेताओं ने इस महामारी के इलाज को ही चुनावी हथियार बना लिया है। बिहार में मतदाताओं को मुफ्त कोरोना वैक्सीन का वादा किया जा रहा है। अब सवाल यह उठता है कि बिहार के अतिरिक्त अन्य राज्यों में जहां गैर भाजपा सरकार है, वहां की जनता को भी मुफ्त टीका दिया जाएगा? मुफ्त टीकाकरण का ये लुभावना वादा जनता के साथ खिलवाड़ है। क्या ऐसे नेता देश के लिए योग्य हंै, जिन्हें मात्र चुनावों में ही जनता के हित का ध्यान आता है? आवश्यकता है एक जागरूक मतदाता के रूप में अपनी भूमिका निभाने की। ऐसे वादे मात्र चुनाव जीतने के लिए ही किए जाते रहे हैं। पूर्व की अनेक घटनाएं इसकी साक्षी है।
-डॉ.अजिता शर्मा, उदयपुर
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पार्टी से ऊपर उठें
चुनाव के दौरान फ्री वैक्सीन का वादा करना अनुचित ही है। इस वादे का हम सभी को एकजुट होकर विरोध करना चाहिए, लेकिन हम करते क्या हैं? अपनी-अपनी पार्टियों के अनुचित वादों का भी समर्थन करने लगते हैं। ऐसे मामलों में पार्टी से ऊपर उठकर सोचने की जरूरत है।
-डॉ. परवीन महमूद, पिछोर, शिवपुरी
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जनता के हित में है वादा
किसी न किसी दिन कोरोना वैक्सीन की खोज कर दी जाएगी। इसलिए आम जनता को मुफ्त में कोरोना वैक्सीन उपलब्ध करवाने का वायदा करना उचित है। इससे जनता को नि:शुल्क वैक्सीन हासिल हो पाएगी, जो जनता के हित में हैं।
रामनिवास भादू, जालोर
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महत्वपूर्ण वादा
बिहार के चुनाव घोषणा पत्र में भाजपा ने कोरोना वैक्सीन नि:शुल्क लगाने का वादा किया है। यह वादा जनता जनार्दन के लिए बेहद अहम है। इस बहाने वैक्सीन उपलब्ध कराने के बेहतरीन प्रयास किए जाएंगे। शीघ्र ही वैक्सीन आने की आशा है।
-विद्या शंकर पाठक, सरोदा, डूंगरपुर
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पूरे कुएं में ही भांग
भाजपा ने बिहार विधान सभा चुनावों के लिए संकल्प पत्र जारी किया है। इसमें ग्यारह वादे किए गए हैं। एक वादा है कोराना की मुफ्त वैक्सीन। यह ऐलान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीता रमण ने किया। यह चुनावी वादा है। मतदाताओं को झूठे वादे कर लुभाना गलत है। ये चरित्र सभी पार्टियों का है। यहां तो पूरे कुएं में ही भांग पड़ी है।
-पद्मजा शर्मा, जोधपुर
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हर नागरिक को मिले टीका
चुनाव के समय मुफ्त कोरोना वैक्सीन का वादा अनुचित है। कोरोनाकाल में वैसे भी पूरी जनता बहुत परेशान है। भाजपा ने जनता के घावों पर नमक छिड़कने वाला काम किया है। देश के हर नागरिक का यह बुनियादी अधिकार होना चाहिए कि उसे वैक्सीन मिले। जिस तरह हमने पोलियो से निजात पाई है, उसी तरह कोरोना से भी निजात मिलनी चाहिए।
-अरविंद भंसाली, जसोल
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अनर्गल चुनावी वादे न करें
ऐसे समय में जब विश्व एक जानलेवा महामारी से जूझ रहा है एवं वैक्सीन की उपलब्धता अभी तक सुनिश्चित नहीं है, इस संवेदनशील विषय पर राजनीति करना सर्वथा अनुचित है। राजनीतिक दलों को अपने चुनावी एजेंडे को महामारी से दूर रखना चाहिए। अगर उन्हें सही मायने में जनता की चिंता है, तो स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करना चाहिए और पीडि़त नागरिकों की सेवा करनी चाहिए। अनर्गल चुनावी वादों से बचना चाहिए।
-जितेश माथुर, उदयपुर

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