आपका हक : बच्चों को संभालने का वक्त

वर्ष 2002 से 12 जून को विश्व बालश्रम निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो कि बालश्रम को कम करने और काम करने की न्यूनतम आयु के निर्धारण पर बल देता है।

By: विकास गुप्ता

Published: 09 Jun 2021, 10:24 AM IST

नीतू प्रसाद, बाल अधिकार विशेषज्ञ

बालश्रम एक वैश्विक समस्या है, जिसके निवारण के लिए विश्व में अनेक प्रतिबद्धताएं की गई हैं। सतत विकास लक्ष्य 2030 के तहत साल 2025 तक बालश्रम को दुनिया से खत्म करने पर बल दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने साल 2021 को बालश्रम उन्मूलन वर्ष के रूप में घोषित किया है। वर्ष 2002 से 12 जून को विश्व बालश्रम निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो कि बालश्रम को कम करने और काम करने की न्यूनतम आयु के निर्धारण पर बल देता है।

इन सब कोशिशों और प्रावधानों के बावजूद समाज में बालश्रम की जड़ें गहराती जा रही हैं। जनगणना 2011 के अनुसार भारत में लगभग 1 करोड़ से ज्यादा कामकाजी बच्चे हैं, पर हम सब जानते है कि यह संख्या कहीं ज्यादा है। कोरोना महामारी ने सबको बुरी तरह से झकझोर दिया है और हम स्वास्थ्य संकट, आर्थिक संकट, बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। इन सब में कामकाजी बच्चे और बाल श्रम जैसे मुद्दे दरकिनार हो गए हंै। कहां है वे बच्चे जो अपने एवं अपने परिवार के जीवनयापन के लिए काम करते थे? वे आज अपना जीवन कैसे बिता रहे होंगे? राहत पैकेज की घोषणा में ये बच्चे कहां हैं? बहुत सारे घुमन्तू परिवारों के बच्चे शिक्षा से वंचित थे आज उनका जीवन और भी संकट में है।

कोरोना महामारी का बच्चों पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ा है। इससे सभी वर्गों के बच्चे प्रभावित हुए हैं। साल भर से ज्यादा समय से स्कूल बंद हैं। पढ़ाई में कमजोर बच्चों की पुन: स्कूल से जुडऩे की संभावना और भी कम है। ऐसे बच्चे बालश्रम की तरफ धकेले जा सकते हैं।

आज जरूरत है संकट में पड़े बच्चों का विवरण तैयार करने की, जिसके आधार पर उन्हें आवश्यकता अनुसार सहायता पहुंचाई जाए। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के साथ राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग भी अनाथ बच्चों की सूची तैयार करवा रहा है। बहुत से राज्यों ने अपने-अपने स्तर पर अनाथ बच्चों की सहायता के लिए योजनाओं की घोषणा की है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि केवल आर्थिक राहत बच्चों की भावनात्मक एवं मानसिक जरूरतों को पूरा कर पाएगी। इसके लिए समग्र योजना की जरूरत है। बाल श्रम के उन्मूलन के लिए भी एक ठोस कार्ययोजना एवं आर्थिक पैकेज बनाया जाना चाहिए। ऐसी योजना बनाई जाए, जो अनाथ बच्चों एवं कमजोर वर्ग के परिवारों को सम्बल प्रदान कर सके। सशक्त बचपन के बिना सशक्त राष्ट्र की कल्पना नहीं की जा सकती।

विकास गुप्ता
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