सामयिक- कोविड-19: आगे और कड़े कदम उठाने होंगे बाइडन को

- बाइडन की रणनीति व्यापक, विस्तृत है।

- अमरीका के नए राष्ट्रपति जो बाइडन ने कोविड-19 से निपटने के लिए राष्ट्रीय रणनीति का मसौदा जारी कर दिया।

By: विकास गुप्ता

Updated: 23 Jan 2021, 08:52 AM IST

लीना एस. वेन, विजिटिंग प्रोफेसर, मिल्केन इंस्टीट्यूट स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी

अमरीका के नए राष्ट्रपति जो बाइडन ने कोविड-19 को लेकर जो रणनीति बनाई है, उसकी हर हाल में तारीफ की ही जानी चाहिए। उनकी रणनीति से पता चलता है कि वह देश को किस दिशा में ले जाना चाहेंगे। पदभार ग्रहण करने के चौबीस घंटे से भी कम समय में उन्होंने कोविड-19 से निपटने के लिए राष्ट्रीय रणनीति का मसौदा जारी कर दिया। महामारी से निपटने के लिए उन्होंने संघीय सरकार के नेतृत्व वाली भूमिका को दृढ़ता के साथ स्थापित किया है। पूर्व के ट्रंप प्रशासन ने इस महामारी से निपटने को लेकर अस्वीकार करने का, कमतर आंकने का और शर्तों से ओतप्रोत जो रुख अपनाया था, उसके यह ठीक विपरीत है। बाइडन की रणनीति व्यापक, विस्तृत है। मैं उनके मजबूत इरादों की कद्र करती हूं, लेकिन यह समय और भी आक्रामकता से काम करने का है।

आइए, बाइडन द्वारा उठाए गए पहले कदम से ही शुरुआत करते हैं। उन्होंने संघीय कार्यालयों में मास्क लगाने वाला पहला आदेश जारी किया है। उन्होंने अंतरराज्यीय यात्राओं के लिए भी मास्क जरूरी किया है। यह आदेश अमरीकियों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि नया प्रशासन जनस्वास्थ्य के निर्देशों का पालन करने के लिए तत्पर है। जबकि यह साफ है कि मास्क लगाना जीवन का कवच है, तो फिर बाइडन ने क्यों नहीं पूरे देश के लिए ऐसा आदेश जारी किया। कुछ लोगों का कहना है कि संघीय भवनों और अंतरराज्यीय व्यापार से परे किसी आदेश को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। पूरे राष्ट्र के लिए आदेश जारी करने का स्पष्ट संकेत होगा कि देश संकट में है। इस अधिकार का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। मुझे विश्वास है कि बाइडन मास्क की पूर्ति के लिए राजकीय कोष से जुड़े कई अधिकारों का इस्तेमाल करेंगे। इससे राज्यों के गवर्नर भी फैसला लेने को मजबूर होंगे।

कुछ और कदम भी उठाने चाहिए: बाइडन को चाहिए कि वे इनडोर सामाजिक कार्यक्रमों को नजरअंदाज करने के लिए अमरीकियों को प्रेरित करें और कड़ा आदेश जारी करें। अन्य देशों ने भी व्यापारिक बैठकों और घर से बाहर जाने पर रोक लगाई है, लॉकडाउन किया है। ब्रिटेन ने तो कम्युनिटी सदस्यों के एक-दूसरे से मिलने पर अर्थदंड लगाया है जो ट्रैफिक टिकट की तरह का है। महामारी के मोर्चे पर केवल एक ही रास्ता है - बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन। दस करोड़ लोगों का सौ दिनों में वैक्सीनेशन करने का मकसद अच्छा है, लेकिन यह काफी कम है। अऩुमान लगाइए - यदि दस लाख लोगों को प्रति व्यक्ति दो डोज की दर से टीके लगाए जाते हैं तो इसमें वर्ष 2022 तक का समय लग जाएगा।

बाइडन की टीम ने तेज गति और समानता वाली महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। हमें एक दिन में कम से कम पच्चीस लाख टीकाकरण करने की जरूरत है। पिछले हफ्ते तत्कालीन स्वास्थ्य सेवा सचिव एलेक्स अजार ने स्वीकार किया था कि वैक्सीन का कोई रिजर्व नहीं है। हो सकता है कि बाइडन की टीम को आपूर्ति की समस्याएं आएं। ऐसी हालत में उन्हें अमरीकियों को सब कुछ बता देना चाहिए। बाइडन को हमारे समय की सबसे बड़ी समस्या विरासत में मिली है। उनके पूर्ववर्ती की उपेक्षा से हालात और बदतर हुए हैं। बाइडन ने लोगों की अपेक्षाएं जागृत की हैं। इस समय बाइडन को और मजबूत होना चाहिए। यही आका ंक्षाएं ही सूर्य की नई किरणें हैं।

द वॉशिंग्टन पोस्ट

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