सद्भाव की मिसाल

सद्भाव की मिसाल
Kashmiris Sikhs

Dilip Chaturvedi | Publish: Feb, 26 2019 05:41:18 PM (IST) | Updated: Feb, 26 2019 05:41:19 PM (IST) विचार

देश के सामने अभी आतंकवाद एक बड़ी चुनौती है। इसका मुकाबला करने के लिए सभी देशवासियों को पूर्वाग्रहों को छोड़कर एकजुट होना होगा।

कश्मीरियों की सुरक्षा में जम्मू के सिखों का आगे आना 'अनेकता में एकता' का सर्वोत्तम उदाहरण माना जा सकता है। पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हमले के बाद देश के अन्य भागों में कश्मीरियों के साथ छिटपुट वारदातें हुईं। खासकर छात्रों के साथ। ऐसे में जम्मू के सिखों का कश्मीरियों की सुरक्षा के लिए अपने दरवाजे खोलना सराहनीय और प्रेरणादायी कदम है। जब हम कश्मीर से कन्याकुमारी तक की बात करते हैं, तो सीधा मतलब यही निकलता है कि 'हम सब एक हैं।' पुलवामा में हुए कायराना हमले की जितनी निंदा की जाए, कम है। पुलवामा हमले के गुनहगारों को सख्त सजा मिले, इसके लिए देश एकजुट है। लेकिन कश्मीरी लोगों पर हमले को किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

कश्मीर में मु_ीभर लोग हैं जो देश विरोधी वारदातों को अंजाम देते हैं। अलगाववादियों के चुनाव बायकाट के आह्वान के बावजूद जान जोखिम में डालकर कश्मीरी मतदान करने जाते हैं। पुलवामा हमले के बाद भी सेना भर्ती के लिए कश्मीर में हजारों युवा जुटे। देश के अलग-अलग हिस्सों में कश्मीरी देश को आगे ले जाने के कार्यों में जुटे हैं। आज देश के साथ खड़े कश्मीरियों का आत्मविश्वास बढ़ाने की जरूरत है। उन्हें लगना चाहिए कि देश उन्हें शक की नजर से नहीं देख रहा। कश्मीर समस्या का मूल कारण यही रहा है कि सरकारों ने देश के साथ खड़े कश्मीरियों की भावना ठीक ढंग से समझने की कोशिश की ही नहीं। यदि की होती तो देश विरोधी कश्मीरियों की पहचान करना उतना मुश्किल नहीं होता। जम्मू के सिखों ने कश्मीरियों को सुरक्षा देकर दूसरे लोगों को एकता का जो संदेश दिया है, उसे समझने की जरूरत है। हर कश्मीरी को देश विरोधी समझना गलत होगा। राजनीतिक दलों को भी अपने कार्यकर्ताओं को समझाना होगा। राष्ट्रभक्ति दिखाने का मतलब कश्मीरियों को धमकाना नहीं हो सकता।

कश्मीर देश का मुकुट है और इसे संभाले रखने के लिए देशवासियों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। सरकार का काम सरकार को करने दें लेकिन हमें क्या करना है और क्या नहीं, इसका ध्यान तो रखना ही पड़ेगा। और बात सिर्फ कश्मीरियों की ही नहीं! पहले भी पूर्वोत्तर के छात्रों के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से मारपीट की खबरें आती रही हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के साथ मुंबई में डराने-धमकाने की घटनाएं भी रह-रहकर सामने आती हैं। ये घटनाएं देश को कमजोर करने के सिवाय कुछ नहीं। देश का नागरिक किसी भी हिस्से में जाने के लिए स्वतंत्र है। एक घटना को देखकर समूचे राज्यवासियों को अलग कर देेने से अनेक विषमताएं पैदा होती हैं। देश के सामने अभी आतंकवाद एक बड़ी चुनौती है। इसका मुकाबला करने के लिए सभी देशवासियों को पूर्वाग्रहों को छोड़कर एकजुट होना होगा। जम्मू के सिखों ने इस घड़ी में देश को जो संदेश दिया है, उसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। देश मजबूत होगा हम भी तभी मजबूत बन पाएंगे। इस मंत्र को भी समझने की जरूरत है। यह मंत्र समझ में आ गया तो कोई भी देश हमें तोडऩे की साजिश में कामयाब नहीं हो पाएगा।

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