scriptLack of funds is fatal in the war against Kovid | कोविड के खिलाफ जंग में घातक है धन की कमी | Patrika News

कोविड के खिलाफ जंग में घातक है धन की कमी

चुनौतियों से निपटने के लिए अतिरिक्त फंडिंग की जरूरत है। हमारे पास आवश्यक संसाधन नहीं हैं। न वैक्सीन, न इलाज, न जांच, न मास्क और न ही कुछ अन्य साधन। यह स्थिति सुधारनी होगी।

Published: April 01, 2022 07:37:34 pm

अतुल गावंडे

ग्लोबल हेल्थ के असिस्टेंट एडमिनिस्ट्रेटर, सर्जन

और लेखक


करीब एक साल पहले राष्ट्रपति जो बाइडन ने घोषणा की थी, ‘अमरीका विश्व के लिए वैक्सीन शस्त्रागार साबित होगा।’ ठीक उसी प्रकार जैसे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमरीका विश्व के लोकतांत्रिक राष्ट्रों की रक्षा करने वाला अस्त्रागार बना था। राष्ट्रपति के नेतृत्व और संसद में लगातार मिल रहे द्विदलीय समर्थन के चलते अमरीका ने निम्न आय वाले 114 देशों को 0.5 अरब से अधिक कोरोना वायरस वैक्सीन निशुल्क उपलब्ध करवाई। यह ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे प्रेरित होकर दुनिया के अन्य समृद्ध देश भी आगे आए और वैक्सीन उपलब्ध करवाने में योगदान दिया। नतीजतन, दुनिया की 60 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण संभव हुआ।
covid
कोविड के खिलाफ जंग में घातक है धन की कमी
इतने प्रयासों के बाद भी कोरोना महामारी के खिलाफ वैश्विक जंग अभी समाप्त नहीं हुई है। वास्तव में देखा जाए तो अब चुनौती बदल गई है। निम्न आय वाले देश, जहां 15 प्रतिशत से भी कम लोगों का टीकाकरण हुआ है, अब और वैक्सीन डोज लेने से इनकार कर रहे हैं। इसका कारण है कि वे इतनी जल्दी-जल्दी और इंजेक्शन डोज नहीं लगवा सकते। इसलिए केवल शस्त्रागार उपलब्ध करवाने से काम नहीं चलेगा। हमारे सहयोगी राष्ट्रों को कोरोना वायरस के भावी वैरिएंट से सुरक्षित करने के लिए हमें ऐसा सहयोग देना चाहिए जो उनके टीकाकरण अभियान को बढ़ाने के लिए जरूरी हो। इन प्रयासों के लिए आर्थिक कोष की आवश्यकता होती है। अब तक कोविड-19 के प्रति हमारे उदारवादी रवैये के बावजूद कांग्रेस हमें कोरोना से मुकाबले के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं करवा पा रही। यहां बताना जरूरी है कि यह विश्व के लिए गंभीर परेशानी का सबब बन सकता है।
फिलहाल, अमरीका व कुछ अन्य देशों में कोरोना को लेकर शांति है लेकिन यूरोप और एशिया में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ रही है और वे अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं। इसमें वे देश भी शामिल हैं, जहां अमरीका से ज्यादा टीकाकरण हुआ है। इसकी वजह है, कोरोना के उच्च स्तरीय संक्रामक वैरिएंट ओमिक्रॉन का ही एक उप वैरिएंट बीए-2, जो और अधिक संक्रामक है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए अतिरिक्त फंडिंग की जरूरत है। अन्यथा हम जोखिम में ही जी रहे हैं कि हमारे पास आवश्यक संसाधन नहीं है। न वैक्सीन, न इलाज, न जांच, न मास्क और न ही कुछ अन्य साधन, जो भविष्य में कोरोना के बढ़ते मामलों का प्रबंधन करने में सहायक हो।
संकट और गहरा सकता है, अगर हम अमीर और गरीब देशों के बीच वैक्सीन का अंतर खत्म नहीं करते। वैक्सीन को वास्तविक टीकाकरण अभियान में रूपांतरित करना काफी मुश्किल रहा है। यहां तक कि समृद्ध देशों में भी, जहां सक्षम स्वास्थ्य तंत्र, अत्याधुनिक कोल्ड चेन और जागरूकता अभियान (यानी जिस किसी को वैक्सीन चाहिए, उसे मिलेगी) मौजूद हैं। दूसरी ओर, जिन देशों में आधारभूत स्वास्थ्य ढांचा मजबूत नहीं है, जहां वैक्सीन रखने के लिए पर्याप्त संख्या में फ्रीजर और रेफ्रिजरेटेड ट्रक नहीं हैं या इतने स्वास्थ्यकर्मी नहीं हैं कि ग्रामीण आबादी तक पहुंच सकें, जहां निकटतम स्वास्थ्य सुविधा मीलों दूर है, वहां स्थिति काफी जटिल है। मीडिया तंत्र में जिस प्रकार अन्य भ्रामक जानकारियां फैलती हैं, वैक्सीन को लेकर भी ऐसा ही हुआ। सोशल मीडिया में वैक्सीन संबंधी अफवाहें भी इतनी ही तेजी से फैलीं और देश-विदेश की जनता का भरोसा डगमगाया।
अब तक हम सीख चुके हैं कि इन चुनौतियों से सफलतापूर्वक कैसे निपटना है। दिसम्बर में बाइडन सरकार के ‘ग्लोबल वैक्स’ अभियान का मकसद था, निम्न आय वाले देशों की मदद करना ताकि वे स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दे सके और वैक्सीन के प्रति जागरूकता व पहुंच बढ़ा सके। आइवरी कोस्ट, युगांडा और जाम्बिया के उदाहरण से स्पष्ट है कि जब सरकारों को कोरोना से मुकाबले के लिए आवश्यक सहयोग मिलता है तो क्या-क्या संभव है। जब तक और फंड नहीं मिलते, हमें वैश्विक अभियान वैक्स को विस्तार देने की योजनाओं पर विराम लगाना होगा। अमरीका को उन देशों की ओर रुख करना होगा, जिन्हें टीकाकरण बढ़ाने के लिए तुरंत मदद की जरूरत है। कई देश ऐसे भी हैं, जहां जनता की रक्षा के लिए पर्याप्त टीके उपलब्ध हंै, लेकिन उनके व्यर्थ हो जाने की आशंका है। दुनिया में ऐसा चाहे कहीं भी हो, इसका असर बाकी देशों के स्वास्थ्य और समृद्धि पर भी पड़ेगा। वायरस संसद में चर्चा की प्रतीक्षा नहीं कर रहा। यह संक्रमण फैला रहा है और म्यूटेट हो रहा है। पिछले दो सालों में संसद में दोनों दलों ने कोविड-19 के खिलाफ जंग में एकजुटता दिखाई है। अब जरूरत है, नेता एक बार फिर एकजुट हों और जानलेवा कोविड-19 महामारी को इलाज योग्य श्वांस रोग में तब्दील करने के लिए प्रभावी रणनीति बनाएं। अमरीका के पास विशेषज्ञता और क्षमता है, जिसके बल पर दुनिया कोरोना से जंग जीत सकती है।

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

Veer Mahan जिसनें WWE में मचा दिया है कोहराम, क्या बनेंगे भारत के तीसरे WWE चैंपियनName Astrology: इन नाम वाले लोगों के जीवन में अचानक से धनवान बनने का होता है योगफटाफट बनवा लीजिए घर, कम हो गए सरिया के दाम, जानिए बिल्डिंग मटेरियल के नए रेटबुध जल्द वृषभ राशि में होंगे मार्गी, इन 4 राशियों के लिए बेहद शुभ समय, बनेगा हर कामबेहद शार्प माइंड होते हैं इन 4 राशियों के लोग, बुध और शनि देव की रहती है इन पर कृपाज्योतिष: रूठे हुए भाग्य का फिर से पाना है साथ तो करें ये 3 आसन से कामराजस्थान में देर रात उत्पात मचा सकता है अंधड़, ओलावृष्टि की भी संभावनाशादी के 3 दिन बाद तक दूल्हा-दुल्हन नहीं जा सकते टॉयलेट! वजह जानकर हैरान हो जाएंगे आप

बड़ी खबरें

जम्मू कश्मीरः बारामूला में जैश-ए-मोहम्मद के तीन पाकिस्तानी आतंकी ढेर, एक पुलिसकर्मी शहीदDelhi News Live Updates: नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया फेज 1 में चला एमसीडी का बुलडोजर, तोड़े गए अवैध निर्माणसुप्रीम कोर्ट में पूजा स्थल कानून के खिलाफ दायर की गई याचिका, संवैधानिक वैधता को चुनौतीTexas Shooting: अमरीकी राष्ट्रपति ने टेक्सास फायरिंग की घटना को बताया नरसंहार, बोले- दर्द को एक्शन में बदलने का वक्तजातीय जनगणना सहित कई मुद्दों को लेकर आज भारत बंद, जानिए कहां रहेगा इसका ज्यादा असरपंजाब CM Bhagwant Mann का एक और बड़ा फैसला, सरकारी नौकरियों के लिए पंजाबी भाषा है जरूरीकपिल सिब्बल समाजवादी पार्टी के टिकट से जाएंगे राज्यसभा, बताई कांग्रेस छोड़ने की वजहशिवसेना नेता यशवंत जाधव की बढ़ी मुश्किलें, ED ने जारी किया समन
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.