नेतृत्व: सहयोगी संस्कृति की विशेषताएं

आइए, जानें एक खुली, स्वच्छंद और सहयोगी संगठनात्मक संस्कृति की प्रमुख विशेषताएं -

By: विकास गुप्ता

Published: 22 Apr 2021, 07:52 AM IST

प्रो. हिमांशु राय

वाचार और डिजाइन थिंकिंग को बढ़ावा देने के लिए संगठनों को अपनी संस्कृति को अधिक खुला, सहयोगी और सशक्त बनाने की जरूरत है। सहयोग संगठन को रणनीतिक लाभ प्राप्त करने में सक्षम बना सकता है। इससे कर्मचारियों की सामूहिक प्रतिभा और कौशल का भी लाभ उठाया जा सकेगा। जैसा कि गेस्टॉल्ट मनोविज्ञान में कहा गया है - एक पूरा भाग निश्चित ही अपने भागों के योग से अधिक होता है! आइए, जानें एक खुली, स्वच्छंद और सहयोगी संगठनात्मक संस्कृति की प्रमुख विशेषताएं -

विश्वास और पारदर्शिता: एक खुली और कार्यात्मक संस्कृति के लिए यह आवश्यक है। अच्छा लीडर यह सुनिश्चित करता है कि संगठन में जो भी जानकारी साझा हो, वह उचित माध्यमों से हो। आवश्यक है कि लीडर अपने साथ कार्य करने वालों का विश्वास अर्जित करे, और दूसरों की क्षमताओं पर भरोसा रखे।

स्वायत्तता और अधिकारिता: कभी-कभी लीडर, प्रबंधक, या पर्यवेक्षक, या तो कार्य को अनिच्छा से अपने अधीनस्थों को सौंपते हैं या हर कार्य माइक्रो-मैनेज करने का प्रयास करते हैं, क्योंकि उन्हें अधीनस्थों की क्षमता पर संदेह होता है। आवश्यक है कि लीडर नवाचार को समायोजित करने के लिए मानक प्रक्रियाओं और स्वायत्तता के बीच संतुलन बनाए और प्रक्रियाओं के उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करे, जो कर्मचारियों को प्रतिबंधित करने के बजाए सक्षम बनाए।

सहानुभूति और दृष्टिकोण: पदानुक्रम में निचले स्तर पर कार्यरत लोगों के साथ लीडर की सहानुभूति और भागीदारी बड़े संकट या बड़े परिवर्तन के समय अधीनस्थों के आत्मविश्वास को बढ़ावा देती है। प्रोटोटाइपिंग और डिजाइन थिंकिंग को बढ़ावा देना: लीडर को प्रोटोटाइप के प्रयोग और निर्माण की अनुमति देनी चाहिए। यह डिजाइन थिंकिंग संस्कृति को सशक्त बनाता है और संभवत: 'यूरेका' अर्थात सफल नवाचारों को जन्म दे सकता है।

प्रतिक्रिया तंत्र करें स्थापित: संगठनात्मक संस्कृति के विभिन्न आयामों पर ग्राहकों की ही नहीं, अन्य हितधारकों की-मुख्य रूप से कर्मचारियों की प्रतिक्रिया ली जा सकती है। इसके लिए बातचीत, प्रश्नावली, प्रपत्र आदि उपाय हो सकते हैं। संगठनात्मक संस्कृति केवल रणनीतिक बढ़त सुनिश्चित नहीं करती, बल्कि यह किसी भी संगठन के व्यक्तित्व और 'ब्रांड परसेप्शन' - यानी लोग उस ब्रांड के बारे में क्या सोचते हैं - का एक हिस्सा है।

(लेखक आइआइएम इंदौर के निदेशक हैं)

विकास गुप्ता
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