नेतृत्व : न्यूरोलीडरशिप और '4-आइ' तंत्र से नई पारिस्थितिकी

- लगातार अभ्यास करते हुए सतर्क व जिज्ञासु होने से एक लीडर में निकट भविष्य में संभावित परिदृश्यों को देखने या अनुमान लगाने की क्षमता विकसित हो सकती है

By: Patrika Desk

Updated: 23 Aug 2021, 10:43 AM IST

प्रो. हिमांशु राय , निदेशक, आइआइएम इंदौर

पिछली बार हमने जाना कि 'न्यूरोलीडरशिप' की भूमिका एक लीडर की क्षमता बढ़ाने के लिए अतिआवश्यक है। सुप्रसिद्ध न्यूरोलीडरशिप कोच ब्रुक शिलर का कहना है कि एक ओर जहां एक प्रबंधक को कार्य-केंद्रित होने की आवश्यकता होती है, वहीं एक लीडर के लिए विचारों के साथ-साथ अपने साथ कार्य कर रहे लोगों और प्रक्रियाओं पर भी ध्यान देना जरूरी है। उनका मानना है कि एक लीडर को निरंतर कौशल विकास के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। वह बताती हैं कि एक न्यूरोलीडर एक ऐसी पारिस्थितिकी विकसित करने पर काम करता है, जो नए विचारों के अनुकूल होती है। इसे न्यूरोलीडरशिप के '4-आइ' तंत्र के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।

एकीकरण (इंटीग्रेशन) - एक लीडर को मन, भावनाओं, लोगों और प्रक्रियाओं के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता होती है, और साथ ही जोखिम लेने की क्षमता और रूढि़वादिता के बीच भी सामंजस्य स्थापित करना आना चाहिए। उसे अपने मस्तिष्क और शरीर को एकीकृत करने के लिए आवश्यक अनुपात में विविध, लेकिन महत्त्वपूर्ण पहलुओं को एक साथ लाने में सक्षम होना चाहिए।

प्रेरणा (इंस्पिरेशन) - एक लीडर को अपने सहयोगियों और अधीनस्थों को उन गुणों को प्रदर्शित कर प्रेरित करना चाहिए जो दूसरों का मनोबल बढ़ा सकते हैं, लेकिन इसके लिए सर्वप्रथम उन्हें स्वयं उन गुणों से प्रेरित होने की और उनका विकास करने की जरूरत है। इसके लिए साहस सहित अन्य कौशल जैसे उदारता, संचार आदि की आवश्यकता होगी।

कल्पना (इमेजिनेशन) - एक सफल लीडर सभी को कल्पनाशील होने के लिए प्रेरित करता है। इसके लिए उसे स्वयं नया दृष्टिकोण विकसित करना होता है और कर्मचारियों की जिज्ञासा को प्रोत्साहित कर, उसका सही मार्गदर्शन कर के ही यह संभव हो सकता है।

अंतज्र्ञान (इन्टूइशन) - अंतज्र्ञान ही अनुभवी लीडरों को अन्य से अलग बनाता है। लगातार अभ्यास करते हुए सतर्क व जिज्ञासु होने से एक लीडर में निकट भविष्य में संभावित परिदृश्यों को देखने या अनुमान लगाने की क्षमता विकसित हो सकती है (डेटा विश्लेषण हर स्थिति में मददगार सिद्ध हो, यह जरूरी नहीं है)।

'4-आइ' के विकास के अलावा एससीएआरएफ मॉडल का उपयोग करके न्यूरोलीडरशिप की क्षमता को और विकसित किया जा सकता है। यह एक लीडर को सामाजिक अंत:क्रियाओं के आयाम समझने में मदद करता है, जिसका उपयोग प्रदर्शन को बेहतर बनाने और जुड़ाव बढ़ाने के लिए मनोवैज्ञानिक उपकरणों के रूप में किया जा सकता है। साथ ही यह कर्मचारियों की पूरी क्षमता का पता लगाने और उसे और विकसित करने में सहायक होता है।

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