scriptLearn Leadership and Management from Deepotsav | दीपोत्सव से सीखें नेतृत्व और प्रबंधन, तमसो मा ज्योतिर्गमय | Patrika News

दीपोत्सव से सीखें नेतृत्व और प्रबंधन, तमसो मा ज्योतिर्गमय

- भगवान राम एक प्रामाणिक और नैतिक प्रबंधन के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जिनके गुणों को हमें जीवन में आत्मसात करना चाहिए।

नई दिल्ली

Published: November 04, 2021 01:11:50 pm

हमारा राष्ट्र भारत विभिन्न रंगों के मेल की 'रंगोली' के समान है - विविध संस्कृतियों, रीति-रिवाजों, विश्वासों और परंपराओं का ऐसा शृंगार, जो दार्शनिक ज्ञान और आध्यात्मिकता में निहित है। दिवाली या दीपावली हमारे देश का ऐसा ही एक प्रमुख त्योहार है जो हमारे जीवन में रोशनी लाता है और अपने इतिहास, संबंधित ग्रंथों और किंवदंतियों से हमें कई सीख देता है। आइए, जानते हैं कि दीपावली के रीति-रिवाजों और भगवान राम की नेतृत्व क्षमताओं से हम किस प्रकार अपने ज्ञान को प्रज्वलित कर सकते हैं।

दीपोत्सव से सीखें नेतृत्व और प्रबंधन, तमसो मा ज्योतिर्गमय
दीपोत्सव से सीखें नेतृत्व और प्रबंधन, तमसो मा ज्योतिर्गमय

परम्पराओं से सीख -
1. सकारात्मक परिवर्तनों का करें स्वागत: दिवाली से पहले घरों की साफ-सफाई पूरी कर देवी लक्ष्मी के रूप में समृद्धि के स्वागत के लिए तैयार रहते हैं। इससे मन में नकारात्मक भावनाओं के संचय व अवांछित सामान की जमाखोरी की तामसिक प्रवत्ति का निवारण होता है। लीडरों को पुराने, असंगत व अप्रासंगिक कार्यों, परियोजनाओं, प्रक्रियाओं व नीतियों को हटाना चाहिए, नए-बेहतर बदलाव की पहल करनी चाहिए।
2. अज्ञानता के अंधियारे को करें दूर: दीपावली पर अमावस्या की धुंधली रात को रोशन करने के लिए दीये जलाना आध्यात्मिक दृष्टि से अज्ञानता दूर कर आंतरिक प्रकाश (जागरूकता) के महत्त्व को दर्शाता है। साथ ही, यह एक लीडर के लिए संज्ञानात्मक संसाधनों और भविष्य के अवसरों पर ध्यान केंद्रित करने, और व्यवधान के समय भी आशान्वित रहने का प्रतीक है।
3. रचनात्मकता और नवाचार को प्रोत्साहन: रंगोली 'योगÓ यानी किसी व्यक्ति की आंतरिक प्रणालियों, जैसे मन, शरीर और आत्मा, और प्रकृति व ब्रह्मांड जैसी बाहरी प्रणालियों के बीच संरेखण या सामंजस्य का प्रतीक है। यह सामंजस्य हमें सिखाता है कि प्रबंधकीय विकास के लिए रचनात्मकता और नवाचार वाले पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना कितना महत्त्वपूर्ण है।
4. कृतज्ञता का भाव: दिवाली पर प्रकृति और संस्कृति का प्रतीक देवी, कुल देवी/देवता, पूर्वजों की पूजा की भी परंपरा है। यह मूल व वर्तमान संपत्ति/उपलब्धियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए किया जाता है। एक प्रबंधक को भी यह विनम्रता व कृतज्ञता सिखाता है।
5. एकजुटता: दिवाली सभी को साथ लाती है। यह एकजुटता समस्याएं दूर कर प्रसन्नता देती है। यह त्योहार एक लीडर को टीम भावना का महत्त्व समझाता है।

राम-राज्य से सीख-
पुराणों में राम राज्य को प्रशासन की एक आदर्श प्रणाली माना गया है जिसमें धन और समृद्धि (देवी लक्ष्मी), बुद्धि और विद्वत्ता (देवी सरस्वती) और शक्ति (देवी दुर्गा) एक साथ विराजमान होती हैं और तीनों का विवेकपूर्ण उपयोग किया गया है। भगवान राम एक प्रामाणिक और नैतिक प्रबंधन के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जिनके जीवन से हम इस प्रकार सीख ले सकते हैं:
1. असफलताओं में खोजें अवसर: बिना किसी दोष के वनवास के बावजूद राम को दु:ख नहीं हुआ। उन्होंने इसे अरण्य (जंगल) के आश्रमों में ऋषियों से शिक्षा पाने के अवसर के रूप में स्वीकारा किया।
2. भावनाओं पर नियंत्रण: माता सीता के स्वयंवर के दौरान शिव धनुष (पिनाक) को तोडऩे पर जब भगवान शिव के प्रबल भक्त भगवान परशुराम क्रुद्ध हुए, तो राम न केवल शांत रहे बल्कि अपनी शालीनता से उन्होंने भगवान परशुराम का क्रोध भी शांत किया।
3. अनुयायियों को बनाएं सशक्त: राम अपनी सेना में एक ऐसा वातावरण बनाने में सक्षम थे जहां सभी एक-दूसरे को प्रेरित करते थे, और सभी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का लक्ष्य रखते थे।
4. उद्देश्य, करुणा और समावेशिता: राम ने वनवास के दौरान भी ऋषियों की सेवा की, देवी अहिल्या (ऋषि गौतम की पत्नी) को श्राप से मुक्त होने में मदद की। वे निरंतर अपने उद्देश्य के प्रति सजग रहे और करुणा और समावेशिता का भाव रख, निष्पक्षता से, बिना किसी का आकलन किए आगे बढ़ते गए।
तो आइए, इस दीपावली हम न सिर्फ खुशियां बांटें, उन सीखों को भी बांटें जो हमें इस त्योहार से मिलती हैं और उन प्रबंधकीय और नेतृत्व क्षमताओं और गुणों को आत्मसात करने का प्रयत्न करें।

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