लिबरल आर्टसः नई शिक्षा नीति का नया आयाम

प्राचीन भारतीय ज्ञान परम्पराएं इस बात की शिनाख़्त करती है कि एक व्यापक और एकीकृत शिक्षा प्रणाली जीवन, व्यवसाय और समाज में प्रभावी एवं नागरिक दायित्व बोध का विकास करती है। जिसके लिए लिबरल आर्टस नए जमाने की नयी विद्या के तौर पर उभरा है। जो विज्ञान, तकनीक, इंजिनियरिंग और गणित के साथ मानविकी तथा कला को एकीकृत करने वाला दृष्टिकोण है।

 

By: shailendra tiwari

Updated: 07 Sep 2020, 05:32 PM IST

डॉ. राकेश राणा

नई शिक्षा नीति-2020 का उददेश्य भारत को एक ज्ञानमय समाज में रुपांतरित करना है। भारत दुनियां का सबसे युवा राष्टृ है। अपनी इस युवा कुशल श्रम-शक्ति का सदुपयोग कर भारत सुपरपावर बनने में अपने युवाओं को नये कौशलों और नये ज्ञान से लैस होकर अपने इस महान स्वप्न को साकार कर सकता है। इस महान उद्देश्य को पाने की दिशा में विज्ञान, तकनीक और अकादमिक क्षेत्रों में नवाचार और अनुसंधान करने के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आधार तैयार करने में नयी शिक्षा नीति मील का पत्थर साबित होगी। नई राष्टृय शिक्षा नीति में लिबरल आर्टस को विशेष तरजीह दी गई है। वैसे तो लिबरल आर्ट्स दुनिया की पुरानी विद्याओं में मौजूद रहा है। यह एक तरह का संतुलित मिश्रण है। जिसमें इतिहास, भाषा, मानविकी, संगीत, दर्शन, मनोविज्ञान और सामान्य गणित जैसे विषय शामिल है। वास्तव में यह समग्र समझ के विकास का नज़रिया है।

लिबरल आर्ट्स शिक्षा का एक ऐसा उभरता क्षेत्र है जो व्यावसायिक मूल्यों, सिद्धांतों और आवश्यक प्रबंधन तथा कौशलों का तरल सम्मिश्रण तैयार करता है। मनुष्य को अपनी समसामयिक चुनौतियों से निपटने और आगे बढ़ने के विकल्प सुझाता है। लिबरल आर्ट्स युवाओं को ऐसे मूल्यों से संपोषित करता है जो समेंकित दृष्टिकोण के साथ पर्याप्त संभावनाओं को उकेरने की दिशा में प्रेरित करते है। फांडेशन के साथ स्पेशलाइजेशन लिबरल आर्ट्स की विशेषता है। लिबरल आर्टस अंतर्सबंधों को समझने की दृष्टि प्रदान करता हैं। व्यक्ति की आंतरिक क्षमताओं को विकसित कर अपार संभावनाओं को खोलता है। लिबरल आर्ट्स हमें स्वयं को और दुनियां को समझने की दृष्टि प्रदान करता है। सामान्य कौशल ओर तार्किक सोच पैदा करता है। मानव मस्तिष्क को समाजोपयोगी बनाने के लिए लिबरल आर्ट्स एक बेहतरीन विद्या है। यह हमारे सोचने के ढ़ंग को उदार बनाता है, लचीला बनाता है, व्यवस्थित बनाता है और सटीक अनुमानों की तरफ बढ़ाता है तथा बुद्धिमता का विकास करता है। लिबरल आर्ट्स ऐसी कला है जो हमें उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग की दृष्टि प्रदान करती है।

चुनौतियों को अवसरों की तरह देखने का साहस प्रदान करती है। स्वयं के सम्मुख सवालों को तार्किक संबोधन देने की क्षमता प्रदान करती है और मुखर अभिव्यक्ति की शैली से लैस रखती है। ज्ञान, विज्ञान, कला, प्रंबंधन व मानविकी की सभी धाराओं से जुड़े विषयों का अंतर्विषयी दृष्टिकोण से ज्ञान हासिल करना लिबरल आटर्स का उददेश्य है। जो व्यक्ति में यह दृष्टि विकसित करने में मदद करता है कि हमें अपने अधीनस्थों और साथियों की शिक्षा, कौशल और क्षमता का किस तरह बेहतर सदुपयोग करना हैं। लिबरल आर्टस उदार परिप्रेक्ष्य में समावेशी ढंग का व्यवहारिक मॉडल विकसित करने में मदद करता हैं। वास्तव में यह विषय नहीं विषयों का समूह है, अंतर्विषयी समझ का एक परिप्रेक्ष्य है। जो मानवीय बुनियादी समझ को व्यापक बनाता है। बदलते परिदृश्य में अनुकूलन कर क्षमताओं को अधिक परिणामदायक बनाने वाला दृष्टिकोण प्रदान करता है। यह विज्ञान और मानविकी दोनों का संयुग्मन है। समाज को शिक्षित और प्रशिक्षित करने का एक खास नजरिया है। जो सामाजिक जटिलताओं, विविधताओं और नव-परवर्तनों को सम्य्क दृष्टि से सम्बोधित करता है। इस खास कौशल का विकास कर लोगों को जिम्मेदार नागरिक बनाने में मदद मिलती है।


नई शिक्षा नीति का यह नया आयाम शिक्षा को सतत् विकास और एक ज्ञानवान समाज के निर्माण की ओर उन्मुख करने में मदद करेगा। विज्ञान, भाषा और गणित पर विशेष जोर देने वाली यह नीति बच्चों में लेखन कौशल बढाने वाले नवाचार पर विशेष जोर देती है। जिस हेतु सप्ताहन्त में मेले, प्रदर्शनी, दिवार-अखबार जैसी रचनात्मक गतिविधियों के आयोजन पर विशेष फोकस की दिशा में परम्रागत गतिविधियों के पुर्नःप्रयोग की तैयारी नयी नीति का नया आयाम है। जिसमें कहानी सुनाना, नाटक खेलना, समूह चर्चाएं करना, लेखन और चित्रों के जरिए अध्ययन और संवाद की नई शिक्षण संस्कृति विकसित करना, नई शिक्षा नीति का लक्ष्य है। नई नीति के तहत टैक्नोलॉजी के जरिए ऑलाइन शिक्षण को रोचक बनाने की अहम कवायद होगी। बहुभाषिकता और बहुवैषयिकता को अध्ययन का आधार बनाने से लिबरल आर्टस का परिप्रेक्ष्य मजबूत बनेगा।


प्राचीन भारतीय ज्ञान परम्पराएं इस बात की शिनाख्त करती है कि एक व्यापक और एकीकृत शिक्षा प्रणाली जीवन, व्यवसाय और समाज में प्रभावी एवं नागरिक दायित्व बोध का विकास करती है। जिसके लिए लिबरल आर्टस नए जमाने की नयी विद्या के तौर पर उभरा है। जो विज्ञान, तकनीक, इंजिनियरिंग और गणित के साथ मानविकी तथा कला को एकीकृत करने वाला दृष्टिकोण है। इस व्यापक समन्वित लिबरल दृष्टिकोण में सीखने की आनन्ददायी प्रक्रिया के साथ आलोचनात्मक उच्च स्तरीय चिंतन, गहन शिक्षण, विषय वस्तु की दक्षता, समस्या समाधान, टीम भवना और संचार कौशल सब एक साथ शामिल रहते है। यह भविष्योन्मुखी रोजगार के परिदृश्य को समझने में विशेष सहायक है और युवाओं को पेशेवर ढंग से तैयार करता है। उन्हें पेशेवर भूमिकाओं के साथ पेशे के अन्दर-बाहर अन्य सामाजिक-राजनैतिक भूमिकाओं के निवर्हन हेतु सक्षम बनाता है। यह समसामयिक समस्याओं के समाधान में तो सहायक है ही भविष्य के दिशा निर्धारण में भी मार्गदर्शक बनता है।


लिबरल आर्ट्स अध्ययन के दौरान आप जो कौशल और ज्ञान हासिल करते हैं वो आपको अपनी पसन्द का कैरिअर खोजने और बनाने में मदद करता है। लिबरल दृष्टिकोण आपको विश्लेषणात्मक बनाते हुए सकारात्मक-आलोचना की दृष्टि भी देता है। मौजूदा परिदृश्य जैसे हालातों में यह कैरिअर की अनिश्चितताओं के लिये आपको तैयार रखता है, एक कैरियर से दूसरे में शिफट करने में मदद करता हैं। लेखन, बातचीत, प्रजेनटेशन, सहयोग लेना व देना और रचनात्मक गतिविधियों के लिए तैयार करता है। यह सांस्कृतिक समझ का विस्तार कर उसकी सामाजिक पूंजी बढ़ाने में मददगार बनता है। नेतृत्व करने की जिज्ञासा पैदा करता है। पहल करने की क्षमता का विकास करता है और उत्साह पैदा करता है। अपने कार्य-क्षेत्र में नवाचार की नई दृष्टि देता है।


लिबरल आर्ट्स शिक्षा रचनात्मक व्यक्तित्व तैयार करती है। आज के बाजार प्रधान युग को इसकी बेहद जरूरत है। व्यवसायिक जगत में ऐसे व्यक्तित्व अनन्त संभावनाएं खोज ही लाते हैं। लिबरल आर्टस में मुख्यधारा के साथ पत्रकारिता, एक्सटेंशन, जनसंपर्क, लेखन, विधि, राजनीति, सामाजिक-कार्य, प्रबंधन और मार्केटिंग जैसे कैरिअर साथ-साथ लेकर चला जा सकता हैं। शोध, विश्लेषण, सलाह, सोशल-मीड़िया, मीडिया, विज्ञापन, जनसंपर्क, शिक्षण और सामाजिक दायित्व के क्षेत्र लिबरल आर्ट्स के दक्ष स्नातकों को अनेकानेक संभावनाएं प्रदान करते हैं। 21वीं सदी में दुनियां उद्यमिता के नए उभार खोज रही है। ऐसी स्थितियों में लिबरल आर्ट्स के विषय उद्यमिता को नये क्षैतिज प्रदान करने वाले हो सकते हैं। जैसे सांस्कृतिक उद्यमिता का क्षेत्र एक नया और उभरता कैरियर है।


जैसे-जैसे टैक्नोलॉजी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समाज को संचालित करने की तरफ बढ़ रही है वैसे-वैसे इमोशनल इंटेलिजेशिया भविष्य के समाज की महती जरुरत बनेगा जिसके लिए लिबरल आर्ट्स जैसे शिक्षा के नए क्षेत्र महत्वपूर्ण बनेंगे। लिबरल आर्ट्स सोचने, आलोचना करने और दूसरों को अपने पक्ष में राज़ी करने की क्षमता बढ़ाने की कला है। लिबरल आर्ट्स हमारे लिखने, पढ़ने, बोलने और तार्किक ढ़ंग से सोचने के कौशल को बढ़ा देते हैं। लिबरल आर्टस का लाभ लेकर भारत अपनी युवा शक्ति को सृजनात्मक जनशक्ति के रुप में बदलकर ज्ञानमय-समाज की दिशा में बढ़कर नयी शिक्षा नीति के सहारे नयी सदी को भारत की सदी बना सकता हैं। लिबरल आर्ट्स कल्पनाओं को विचार में विस्तृत करने की कला है और विचार ही विवेक का विकास करते है तथा विवेक विज्ञान की दिशा में बढ़ाता है। अंततः विज्ञान ही प्रोद्यौगिकी और प्रयोगों के सहारे सभ्यता के विकास, सुख-सुविधाओं और एक सुन्दर समरस संसार बनाने का रास्ता खोजता है। यही मानव कल्याण की समुचित दिशा भी है। जिसमें उदार विद्याएं बहुत काम आयेंगी।

shailendra tiwari
और पढ़े
अगली कहानी
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned