scriptPatrika Opinion: नक्सलियों के मददगारों की भी तोड़नी होगी कमर | Magazine Op | Patrika News
ओपिनियन

Patrika Opinion: नक्सलियों के मददगारों की भी तोड़नी होगी कमर

जांच एजेंसियों के पास यह सूचना दो साल पहले ही थी कि नक्सली सदस्यों को नकली नोट छापने का बाकायदा प्रशिक्षण दिया गया है। तकनीकी मदद के साथ-साथ नक्सलियों को अत्याधुनिक हथियार भी उपलब्ध होते रहे हैं।

जयपुरJun 24, 2024 / 09:13 pm

Nitin Kumar

माओवादियों को मिलने वाली फंडिंग पर नकेल कसने के प्रयास हुए तो नक्सलियों ने नकली नोट छापना ही शुरू कर दिया। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों के ठिकानों पर सुरक्षाबलों की छापेमारी के दौरान इस तथ्य का खुलासा हुआ है। हैरत की बात यह है कि नक्सली नकली नोट छापकर उन्हीं आदिवासियों के बीच इनको खपा रहे हैं जिनके लिए ये जल, जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ने का दावा करते आए हैं। अपनी कमजोर होती आर्थिक ताकत को बढ़ाने का नक्सलियों का यह गैर-कानूनी कृत्य निश्चित ही चिंता का विषय है।
चिंता इसलिए भी क्योंकि एक ओर सरकारी स्तर पर नक्सलवाद के खात्मे के मजबूत प्रयासों के दावे किए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर नक्सली गाहे-बगाहे सुरक्षा बलों पर हमलों को अंजाम दे रहे हैं। नक्सलियों के हमले में रविवार को सुकमा जिले में ही हमारे दो जवानों की शहादत हुई है। ये घटनाएं बताती हैं कि माओवादी उन पर लगातार कसी जा रही लगाम से बौखला गए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होते नक्सलियों से जहां नकली नोट बरामद हुए, वह जगह तेलंगाना और आंध्रप्रदेश की सीमा के नजदीक है।
इस आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि माओवादी ये नकली नोट छत्तीसगढ़ से बाहर देश के दूसरे हिस्सों में भी खपा रहे होंगे। जांच एजेंसियों के पास यह सूचना दो साल पहले ही थी कि नक्सली सदस्यों को नकली नोट छापने का बाकायदा प्रशिक्षण दिया गया है। तकनीकी मदद के साथ-साथ नक्सलियों को अत्याधुनिक हथियार भी उपलब्ध होते रहे हैं। कुछ दिन पहले तीन विशेष स्नाइपर वर्दी भी माओवादियों से बरामद हुई थीं। इससे जाहिर होता है कि इनके तार विदेशों से भी जुड़े हैं। नकली नोट बाजार में खपाने का नक्सलियों का दुस्साहस भी ऐसी ही मदद की वजह से हो रहा है।
स्थानीय मददगारों के साथ-साथ नक्सलियों को दूसरे रास्तों से भी टेरर फंडिंग होने की आशंका लगातार व्यक्त की जाती रही है। यह सच है कि हेलिकॉप्टर, ड्रोन और अत्याधुनिक संचार तकनीक की मदद से नक्सलियों पर नजर रखने के लिए सुरक्षा बलों के प्रयास भी कम नहीं हो रहे। इसके बावजूद कई बार नक्सली सुरक्षा बलों को चकमा देकर अपने नापाक मंसूबों में कामयाब होते दिखते हैं। ऐसे में माओवाद की समस्या से निपटने के लिए जैसी तत्परता से प्रयास किए जाने चाहिए वैसी तत्परता दिख नहीं रही है। प्रभावित इलाकों में शिक्षा का प्रसार, रोजगार के साधनों में वृद्धि और विकास की गतिविधियों को बढ़ाने का और काम हो तो नक्सली समस्या के खात्मे की दिशा में ठोस प्रयास होंगे।

Hindi News/ Prime / Opinion / Patrika Opinion: नक्सलियों के मददगारों की भी तोड़नी होगी कमर

ट्रेंडिंग वीडियो