Exclusive: 'अन्नदाताओं का हित ही केंद्र में, एमएसपी प्रणाली नहीं होगी प्रभावित'

केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा, खरीफ फसलों की एमएसपी घोषित हो चुकी है एवं फसल आने पर एमएसपी पर सरकारी खरीद चालू हो जाएगी। रबी फसलों की एमएसपी भी हफ्तेभर में घोषित कर दी जाएगी।

By: shailendra tiwari

Updated: 21 Sep 2020, 04:40 PM IST

लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पारित कृषि विधेयकों को लेकर उठ रहे सवालों पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से पत्रिका की विशेष बातचीत। पेश हैं बातचीत के अंश...


सवाल. जिसे सरकार किसानों की कृषि उपज मंडी समितियों पर निर्भरता खत्म करने और बिचौलियों से मुक्ति का मार्ग बता रही है, उसे दूसरी ओर एमएसपी पर उपज की सुनिश्चित खरीद की प्रणाली को खत्म करने के संकेत के रूप में क्यों देखा जा रहा है?

जवाब. किसानों के सर्वांगीण हित में पारित दो महत्वपूर्ण विधेयकों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली किसी भी सूरत में खत्म नहीं होगी। पीएम नरेंद्र मोदी साफतौर पर कह चुके हैं और मैंने भी संसद में कहा है कि एमएसपी थी, है और रहेगी। इक्का-दुक्का विपक्षी साथी हैं, जो अपने राजनीतिक हित साधना चाहते हैं और इसीलिए भ्रम फैला रहे हैं। लेकिन हमारे देश के किसान भाई-बहन अब जागरूक हो चुके हैं, उन्हें कोई बरगला नहीं सकता। कृषि से जुड़ी देश की आधी से ज्यादा आबादी मतदान का अधिकार भी रखती है और यह आबादी ऐसे नेताओं को चुनाव में मजा चखा चुकी है। इसी जनता ने ही मोदी जी के नेतृत्व में देश में फिर ऐतिहासिक बहुमत से भाजपा की सरकार बनाई है। हमारे देश की सार्वजनिक खरीद प्रणाली बहुत सशक्त है, इन विधेयकों के माध्यम से तो समूचा कृषि तंत्र और मजबूत होगा। खरीफ फसलों की एमएसपी घोषित हो चुकी है एवं फसल आने पर एमएसपी पर सरकारी खरीद चालू हो जाएगी। रबी फसलों की एमएसपी भी हफ्तेभर में घोषित कर दी जाएगी।

सवाल.
कहा जा रहा है कि मूल्य आश्वासन अध्यादेश में मूल्य शोषण के खिलाफ किसानों को सुरक्षा की बात तो है, लेकिन मूल्य निर्धारण के लिए कोई कार्यप्रणाली नहीं है। कानूनी लड़ाई की स्थिति में प्राय: असंगठित भारतीय कृषि क्षेत्र कैसे निजी कॉर्पोरेट सेक्टर की कंपनियों के संसाधनों का मुकाबला करेगा?

जवाब. कांग्रेस ने अपने शासनकाल में किसानों की सुध नहीं ली, स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट को लागू नहीं करना इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। पीएम मोदी के नेतृत्व में आई सरकार ने स्वामीनाथन समिति की दो सौ एक में से दो सौ सिफारिशें लागू कीं। जहां तक मूल्य निर्धारण की बात है तो अब किसान खुद तय करेंगे कि उन्हें अपनी उपज किस दाम पर और कब बेचनी है। पीएम ने दस हजार एफपीओ के गठन की स्कीम लांच की है, जिसके तहत छोटे-मझोले किसान हर स्तर पर संगठित होकर काम करेंगे। भारत सरकार ऐसा मैकेनिज्म भी तैयार कर रही है जिससे देश में हर दिन कहां-क्या भाव है, किसानों को तुरंत पता चलेगा और वे किसी के हाथों शोषण का शिकार नहीं हो सकेंगे। मूल्य करार आश्वासन विधेयक में किसान की जमीन संबंधी कोई भी बिंदु डालने की स्पष्ट मनाही है, मतलब किसान की जमीन के स्वामित्व पर कोई प्रभाव नहीं होगा। दोनों विधेयकों के माध्यम से केवल किसानों के हितों के संरक्षण के लिए नेशनल फ्रेमवर्क दिया गया है। नए कानून में प्रावधान होने से किसानों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेगे, बल्कि स्थानीय स्तर पर विवाद निपटाए जाएंगे।

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सवाल. एमएसपी प्रणाली लाने की वजह किसानों को बाजार में उचित मूल्य नहीं मिलना थी तो अब अपनी उपज के लिए खुले बाजार में उचित कीमत मिलना सुनिश्चित होगा, ऐसा कैसे माना जा सकता है?
जवाब. नए कानून से देशभर में कृषि उपज खुली प्रतिस्पर्धा के माध्यम से बिकेगी। व्यापक प्लेटफार्म होने से बड़ी संख्या में खरीददार रहेंगे। निश्चित रूप से अन्नदाताओं को फायदा होगा, क्योंकि वे अपनी पसंद के अनुरूप उपज बेचेंगे। किसानों पर कोई दबाव नहीं रहेगा कि वे उपज तुरंत या कम दाम पर बेच दें। नए विधेयक में ये सारी व्यवस्थाएं है। मंडी के बाहर कृषि उत्पादों के व्यापार पर कोई टैक्स भी नहीं लगेगा।

सवाल. एक आशंका भारतीय खाद्य निगम द्वारा की जाने वाली खरीद को लेकर है। कहा जा रहा है कि नए कानून से आढ़तियों का और राज्यों का कमीशन बंद हो जाएगा। क्या यह आशंका निर्मूल है?
जवाब. दोनों विधेयक और उनके प्रावधान अलग हैं, और भारतीय खाद्य निगम की सरकारी खरीद की व्यवस्था अलग है। भारतीय खाद्य निगम सहित अन्य एजेंसियां कृषि उपज खरीदती रहेंगी। कमीशन बंद होने की आशंका निराधार है क्योंकि मंडियों को होने वाली आय का ज्यादातर हिस्सा एमएसपी पर सरकारी खरीदी से होता है। नए विधेयकों के कारण प्रतिस्पर्धात्मक माहौल के चलते मंडियों में इंफ्रास्ट्रक्चर सहित अन्य सुविधाएं बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

सवाल. राज्य नए विधेयकों को राज्य सूची के विषयों में घुसपैठ और सहकारी संघवाद की भावना के विरुद्ध करार दे रहे हैं, जबकि केंद्र इसे समवर्ती सूची का विषय बता रहा है?
जवाब. राज्य सूची की प्रविष्टि 14 के तहत 'कृषिÓ और प्रविष्टि 28 के तहत 'बाजार एवं मेलेÓ को यथावत रखा गया और यह राज्यों के अधिकार का ही विषय है। अध्यादेश के बदले लाया गया विधेयक समवर्ती सूची की प्रविष्टि 33 के तहत है और यह राज्य सूची को अतिक्रमित नहीं करता है। एपीएमसी एक्ट में मंडी यार्डों की वास्तविक बाउंड्री के भीतर कृषि उपज के विपणन का विनियमन जारी रहेगा। विधेयक से किसानों व क्रेताओं को सक्षम विपणन सेवाएं प्रदान करने में प्रतिस्पर्धी होने वाली मंडियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

सवाल. सबसे अहम चिंता खाद्य सुरक्षा को लेकर है, क्योंकि कहा जा रहा है कि खाद्य पदार्थों की भंडारण सीमा खत्म किए जाने से पूंजीपतियों का कृषि व्यापार पर कब्जा हो जाएगा...
जवाब. पूरे देश की पूर्ति के लिए पर्याप्त खाद्यान्न भंडार है, इसलिए कालाबाजारी की नौबत का प्रश्न ही नहीं है। खाद्य सुरक्षा की गारंटी केंद्र सरकार की है। राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा के बाद ही दोनों विधेयक लाए गए हैं। आवश्यक वस्तु अधिनियम में सरकार के पास पहले असीमित शक्ति थी, जिसे अब पारदर्शी बनाया गया है। इससे इंस्पेक्टर राज कम होगा, भ्रष्टाचार खत्म होगा तथा प्रसंस्करण एवं भंडारण क्षमता में निवेश बढ़ेगा। अगर खाद्य पदार्थों के दाम ५० प्रतिशत से ज्यादा बढ़ते हैं तो सरकार स्टॉक सीमा, प्राइस कंट्रोल पूर्व की तरह लागू कर सकती है।

सवाल. अभी एमएसपी की व्यवस्था क्या है, इसके माध्यम से किसानों को कितना भुगतान किया गया है और इससे किसान किस तरह प्रोत्साहित हुए हैं?
जवाब. उत्पादन लागत का न्यूनतम डेढ़ गुना समर्थन मूल्य निर्धारित करने के लिए केंद्रीय बजट वर्ष 2018-19 में की गई घोषणा के अनुसरण में सरकार ने सभी अध्यादेशित फसलों की एमएसपी में वृद्धि की थी। मोटे अनाज, दलहन एवं खाद्य तेलों की एमएसपी उच्चतर स्तर पर निर्धारित की गई है ताकि किसानों को और अधिक दलहन, मोटे अनाज एवं खाद्य तेलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। इससे अधिकांश फसलों की बुवाई में अहम वृद्धि देखी गई है। कुल मिलाकर इस वर्ष 31त्न ज्यादा एमएसपी का भुगतान किया गया।

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