टै्रवलॉग अपनी दुनिया : मेघालय में प्रकृति से मेल भी, एडवेंचर भी

मेघालय के पास एक से एक खूबसूरत आकर्षण मौजूद हैं, जैसे झरने, शीशे-सी चमकती नदी डावकी और लिविंग रूट ब्रिज।

By: विकास गुप्ता

Published: 20 May 2021, 10:30 AM IST

कायनात काजी

हिमालय की भव्यता भारत में उत्तर से लेकर उत्तर पूर्व तक ऐसे फैली है जैसे किसी ने नगीने जड़ दिए हों। उत्तर में लद्दाख से पूर्वोत्तर तक जाते-जाते पर्वत शृंखलाएं हरियाली की ऐसी नर्म मखमली चादर ओढ़ लेती हैं जिसमें रुई के फोहे जैसे बादल सजे होते हैं। मेघालय को प्रकृति का वरदान प्राप्त है। पूरा मेघालय पहाड़ों में बसा है। यहां की मुख्य पर्वत मालाएं गारो-खासी और जयंतिया हिल्स के नाम से मशहूर हैं। मेघालय के पास एक से एक खूबसूरत आकर्षण मौजूद हैं, जैसे झरने, शीशे-सी चमकती नदी डावकी और लिविंग रूट ब्रिज।

पूर्वी खासी हिल्स में शिलोंग पीक से वादियों का नजारा देखने लायक है। शिलोंग के नजदीक ही है एक परियों के देश जैसी जगह - चेरापूंजी। यह स्थान सबसे अधिक वर्षा के लिए जाना जाता है। इस खूबसूरत कस्बे की रौनक देखते ही बनती है। एक चर्च और आसपास छोटे-छोटे लेकिन सजीले घर और नेपथ्य में चर्चित नोहकलिकाई वाटरफॉल किसी जादुई लोक जैसा है यह सब। अगर आप ट्रेकिंग के शौकीन हैं तो इस विशाल जलप्रपात के ताल तक भी पहुंच सकते हैं। अगर हम मेघालय को वाटरफॉल का देश कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। यहां कुछ बेहद खूबसूरत वाटरफॉल दर्शनीय हैं जैसे बीदों, बिशप, काइनरेम, लांगशियांग, नोहस्गिथियांग, स्वीट, एलिफेंट, क्रिनोलाइन, मार्गरेट और स्प्रैड इगल आदि।

मेघालय एडवेंचर टूरिज्म के लिए स्वर्ग के समान है। शायद यही वजह है कि यहां एडवेंचर से जुड़े फेस्टिवल होते हैं। पश्चिमी जयंतिया हिल्स में हर वर्ष हॉट एयर बलून फेस्टिवल आयोजित किया जाता है जिसमें भाग लेने पूरी दुनिया से एडवेंचर प्रेमी जोवाई खिंचे चले आते हैं।

नजदीक ही बांग्लादेश सीमा है जिसे जोड़ती है एशिया की सबसे खूबसूरत और स्वच्छ नदी डावकी। इस नदी की स्वच्छता के क्या कहने। इसका पानी इतना पारदर्शी है कि नदी के तल में पड़े पत्थर तक दिखाई देते हैं। दूर से देखने पर लगता है जैसे नाव कांच पर चल रही है। यह कुदरत का एक ऐसा नजारा है जिसे जीवन में एक बार जरूर देखना चाहिए।

पूर्वी खासी हिल्स में एक और आकर्षण है एशिया का सबसे स्वच्छ गांव -मावल्यान्नॉंग। गांव की कुल आबादी 900 है और इन लोगों ने अपने गांव को स्वच्छता के आधार पर पूरे विश्व में एक अलग पहचान दिलवाई है। गांव में एक चर्च, होम स्टे और कुछ रेस्टोरेंट हैं। इन्हें स्थानीय लोगों द्वारा ही चलाया जाता है। इस गांव के पास ही है एक डबल डेकर लिविंग रूट ब्रिज। यह ब्रिज स्थानीय जनजातीय लोगों ने रबड़ के पेड़ की जड़ों को आपस में गूंथ कर बनाया। लगभग 50 मीटर लंबे और 1.5 मीटर चौड़े इस ब्रिज के बारे में कहा जाता है कि यह 200 साल पुराना है। एक समय में यह ब्रिज लगभग 50 लोगों का भार उठा सकता है।

पूरे मेघालय में ऐसे अनेक ब्रिज देखने को मिलते हैं। ये ब्रिज प्रकृति के साथ जनजातीय समाज के मजबूत रिश्ते के जीवित प्रमाण हैं। शायद इसीलिए ब्रिटिश लोग इसे पूर्वोत्तर का स्कॉटलैंड कहते थे। आप अगर मेघालय जाना प्लान कर रहे हैं तो मानसून के बाद का समय उत्तम माना जाता है। अगर आप बारिश पसंद करते हैं तो और भी बेहतर है। मानसून में इस जगह की खूबसूरती का जवाब नहीं।

(लेखक फोटोग्राफर, ब्लॉगर, स्टोरीटेलर हैं)

विकास गुप्ता
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