कोरोना से अब ज्यादा सतर्क रहने की जरुरत

देश की गाडी ट्रैक पर लाने के लिए सरकार देश को अनलॉक करती जा रही है। लेकिन अब हमें और सचेत रहने की जरुरत है। चूंकि हर कदम पर जोखिम है और चलना भी जरुरी है। इस स्थिति में हमें स्वयं भी जागरुक रहना है और अपने आसपास की दुनिया को भी समझाना है।

 

By: shailendra tiwari

Updated: 02 Sep 2020, 05:24 PM IST

योगेश कुमार सोनी, वरिष्ठ पत्रकार


देश में कोरोना संक्रमण के आंकड़े में हर रोज बढ़ोतरी होने से चिंता का विषय बन गया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पिछले चार दिन से हर रोज एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। वहीं पचहत्तर हजार से ज्यादा लोग संक्रमित पाए जा रहे हैं। हम अनलॉक-4 में प्रवेश कर रहे हैं जिससे मैट्रो के साथ अन्य तमाम चीजों खुल रही हैं लेकिन कोरोना से बढ़ रहे संक्रमित आंकड़ें भी भयभीत कर रहे हैं। बीते शनिवार केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि कुल जांच का आंकडा चार करोड के पार पहुंच गया जिसमें साढे सात लाख संक्रमित हैं। बीते एक महीने में संक्रमित होने की रिपोर्ट कम थी लेकिन पिछले पांच दिन से मामले अचानक बढ़ गए। कुछ ऐसे राज्यों पर गौर करें तो यहां स्थिति नियंत्रण में नही आ रही। महाराष्ट्र में करीब दो लाख एक्टिव मामलें हैं जिसमें लगभग चौबीस हजार लोगों की मौत हो चुकी है। राजधानी दिल्ली में चौदह हजार एक्टिव मामलों के साथ साढे चार हजार लोग अपनी जान गवा चुके हैं। तमिलनाडु में चौव्वन हजार मामलें सामने आ चुके और लगभग सात हजार लोग मर गए। असम में बीस हजार केस हैं लेकिन यहां मृत्यु के आंकडें बहुत कम है,तीन सौ लोगों की मौत हुई है। उत्तर प्रदेश में बावन हजार मामलों के साथ करीब बत्तीस सौ लोगों की जान जा चुकी।

जनसंख्या के आधार पर सभी राज्यों की स्थिति एक जैसी है लेकिन सवाल यही है कि यदि सरकारें सिस्टम को संचालित न करें तो देश कैसे चले? कोरोना काल में प्रधानमंत्री ने अपनी सूझबझ के साथ काफी समय निकाला। हिन्दुस्तान जैसे अधिक जनसंख्या वाले देश को एक धारा में संचालित करना बेहद कठिन काम है लेकिन फिर भी एक ही सूत्र से निर्वाह किया गया है। यदि जनसंख्या के आधार पर अन्य देशों को अपेक्षा हमारे यहां स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला हैं जिसका परिणाम भी हमने देखा लेकिन पिछले पांच दिनों से हालात नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि अब हम लापरवाह होते जा रहे हैं। लोगों ने बाहर से आकर नहाना व बार-बार हाथ धोना या सैनेटाइजर का प्रयोग करना बंद कर दिया। दरअसल रिकवरी रेट बेहतर आने से हम कोरोना को हल्के में ले रहे हैं। कम उम्र के बच्चे,बूढे व बीमार लोगों को अधिक एहतियात बरतने की जरुरत है। कोरोना का सबसे ज्यादा अटैक इन लोगों पर ही पड़ रहा है।

अब हम किसी भी नियम कानून का पालन करना व्यर्थ समझ रहे हैं जो भारी पड रहा है। दरअसल मामला यह है कि हम किसी भी मामले में जैसे ही आराम दायक स्थिति में आते हैं वैसे ही लापरवाही करना शुरु कर देते हैं।


हमें कुछ कार्य शासन-प्रशासन के डर या दिशा-निर्देश के अलावा स्वयं भी करने चाहिए और जिसमें हमारे या हमारे परिवार व समाज की सुरक्षा हो तो जरुर कर लेने चाहिए लेकिन लापरवाही व भेडचाल से हमारा पुराना रिश्ता है। सोशल डिस्टेंसिंग के नाम पर कुछ भी नही देखा जा रहा और सैनेटाइजर का प्रयोग करना व्यर्थ समझने लगे। मास्क भी इसलिए पहन रहे हैं क्योंकि उस पर प्रशासन सख्त है और बिना मास्क के चालान काट दिया जाता है।

जब पूरी दुनिया कोरोना के रुप में एक अज्ञात व अदृश्य शत्रु से लड़ रही तो हमें समझ जाना चाहिए कि हमारे ऊपर कभी भी व कहीं भी वार हो सकता है। इसके अलावा दुर्भाग्य है कि इसकी वैक्सीन नही बनी। हालांकि रुस ने वैक्सीन को लांच कर दिया और उसके अनुसार उन्होनें कारगर दवाई बना ली लेकिन विश्वस्तर पर इसको पूर्णत सत्यापित नही माना जा रहा । स्पष्ट है कि फिलहाल सुरक्षा ही बचाव है लेकिन इसको मानना भी पडेगा।

अनदेखी की वजह से हम तीसरे नंबर पर आ गए। अभी तक पहले स्थान पर अमेरिका है और दूसरे नंबर पर ब्राजील है। हालांकि इतनी दोनों देशों की जनसंख्या हमारे यहां से बहुत कम है लेकिन मानवीय क्षति तो एक इंसान के रुप में भी कष्ट देती है। हमारे देश में कई तरह की सोच के मनुष्य देखे जा सकते हैं। यदि किसी भी चीज पर सख्ती कर दी जाए तो सरकार की तानाशाही और यदि ढील दे दी जाए तो सरकार बेपरवाह।

बहराहल,देश की गाडी ट्रैक पर लाने के लिए सरकार देश को पूर्ण रुप से अनलॉक कर रही है। लेकिन अब हमें और सचेत रहने की जरुरत है चूंकि हर कदम पर जोखिम है और चलना भी जरुरी है। इस विचित्र स्थिति में हमें स्वयं भी जागरुक रहना है और अपने आसपास की दुनिया को भी समझाना है चूंकि इस मामले में हुई गलती अपने सिवाय एक बारी में कई लोगों पर भारी पडती है। जितना जरुरत हो उतना ही बाहर निकलें और जैसे प्रारंभिकता में हम सभी चीजो को गंभीर ले रहे थे फिर से वैसे ही जरुरत है।कठिन समय हमेशा समझदारी से निकलता है और उसके लिए जागरुक होना अनिवार्य है और यह पूरी दुनिया के लिए वही समय है।

shailendra tiwari
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