नेतृत्व : मस्तिष्क प्रक्रियाओं को उजागर करती है न्यूरोलीडरशिप

नेतृत्व प्रक्रियाओं के लिए विशेष रूप से एक व्यक्ति को विश्लेषणात्मक तर्क (निर्णय लेने और रणनीति तैयार करने की प्रक्रियाएं) के साथ-साथ रचनात्मकता और अन्य कौशल (लोगों के साथ प्रभावी ढंग से काम करना) दोनों का उपयोग करने की आवश्यकता होती है।

By: Patrika Desk

Published: 09 Aug 2021, 02:17 PM IST

प्रो. हिमांशु राय

(लेखक आइआइएम इंदौर के निदेशक हैं)

वैसे तो वर्तमान समय को कृत्रिम और डेटा-आधारित बुद्धिमत्ता के युग के रूप में देखा जा रहा है, किन्तु इस बात से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता कि रचनात्मकता और अंतज्र्ञान की भी हर व्यवसाय के विकास में अहम भूमिका होती है। नवोन्मेष न केवल डेटा की आतंरिक शैली पर आधारित है, अपितु यह कुछ मात्रा में कल्पना और जिज्ञासा पर भी निर्भर करता है। इसमें आशु-रचना और कुशाग्रता भी शामिल है। अत: इस वर्तमान युग को कल्पना के साथ-साथ सूचना का युग कहना अधिक उपयुक्त होगा।

नेतृत्व प्रक्रियाओं के लिए विशेष रूप से एक व्यक्ति को विश्लेषणात्मक तर्क (निर्णय लेने और रणनीति तैयार करने की प्रक्रियाएं) के साथ-साथ रचनात्मकता और अन्य कौशल (लोगों के साथ प्रभावी ढंग से काम करना) दोनों का उपयोग करने की आवश्यकता होती है। इसलिए नेतृत्व को मस्तिष्क-आधारित (यानी मस्तिष्क का सम्पूर्ण प्रयोग) मानते हुए, कई शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क के कार्यों के अध्ययन पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही नेतृत्व के मनोविज्ञान का अध्ययन करने में भी रुचि अभिव्यक्त की है, जिससे वे जान सकें कि आवश्यकता पडऩे पर एक लीडर को ये विश्लेषणात्मक और रचनात्मक क्षमताएं कैसे मदद कर सकती हैं और इससे उनके अधीनस्थ और सहकर्मी किस प्रकार प्रेरित, प्रभावित और प्रबंधित हो सकते हैं। इसे 'न्यूरोलीडरशिप' कहा जाता है। लेकिन न्यूरोलीडरशिप एक लीडर को उनकी प्रभावशीलता में सुधार करने और अपने कर्मचारियों को प्रेरित करने में कैसे सक्षम कर सकती है?

न्यूरोलीडरशिप, नेतृत्व के क्षेत्र में ज्ञान का योगदान करने के लिए तंत्रिका विज्ञान से अंतर्दृष्टि लाने के शोधकर्ताओं के प्रयासों का ही एक परिणाम है। यह शब्द डॉ. डेविड रॉक द्वारा गढ़ा गया, जिन्होंने सामाजिक अंत:क्रियाओं के पहलुओं को भी वर्गीकृत किया और यह भी दर्शाया कि यह कर्मचारियों को कैसे प्रभावित करता है। 'एससीएआरएफ/स्कार्फ' मॉडल के रूप में लोकप्रिय, यह लीडरों को यह समझने में मदद करता है कि संगठनात्मक पारिस्थितिकी तंत्र में रचनात्मकता और आत्मविश्वास का मंथन करने के लिए वे अपने अधीनस्थों को प्रभावी ढंग से प्रेरित और उत्थान करके कैसे स्वयं में सुधार कर सकते हैं।

लेकिन यह न्यूरोलीडरशिप है क्या? यह एक ऐसा अध्ययन का विषय है जो संज्ञान और व्यवहार के आकलन के माध्यम से नेतृत्व प्रभावशीलता की बेहतर समझ हासिल करने के लिए न्यूरोलॉजी और सामाजिक और संज्ञानात्मक मनोविज्ञान पर दृष्टि डालता है। यह वर्तमान में विकासशील विषय है और नेतृत्व से जुड़ी मस्तिष्क प्रक्रियाओं को उजागर करने के दीर्घकालिक लक्ष्यों पर केंद्रित है। इसे समर्थकों और आलोचकों दोनों से प्रतिक्रिया मिली है, क्योंकि उनका तर्क है कि अब तक इसमें से कुछ भी विशुद्ध रूप से नया नहीं है। फिर भी यह आशाजनक है, क्योंकि न्यूरोलॉजी और ब्रेन इमेजिंग तकनीकों के क्षेत्र में प्रगति के साथ ही इसमें दिलचस्प निष्कर्षों के उजागर होने की गुंजाइश है। ब्रेन स्कैन का उपयोग करते हुए ऐसे कई शोधों ने पहले ही सभी का ध्यान आकर्षित करना शुरू कर दिया है।

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