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प्रसंगवश: तस्करों की राह आसान कर रही है यह मिलीभगत

जिन लोगों की वजह से समूचा पुलिस महकमा बदनाम होता है, सरकार उनकी तलाश कर कार्रवाई करे

Published: May 11, 2022 09:50:49 pm

'अपराधियों में भय, आम जन में विश्वास' का पुलिस का ध्येय वाक्य उस वक्त मुंह चिढ़ाता नजर आता है जब पुलिस की अपराधियों से मिलीभगत सामने आती है। पिछले दिनों चित्तौड़गढ़ जिले के डूंगला थानाधिकारी को जिस आरोप को लेकर निलम्बित किया गया वह पुलिस और अपराधियों के मजबूत गठजोड़ का संकेत देने के लिए काफी है। डूंगला थानाधिकारी के खिलाफ लाखों रुपए लेकर अफीम खुर्द-बुर्द करने और तस्करों को बिना कार्रवाई छोड़ देने की शिकायत के बाद निलम्बित कर दिया गया। प्रदेश में यह इस तरह का पहला मामला नहीं है। लेकिन अफीम तस्करी के लिए बदनाम चित्तौड़गढ़ व समीपवर्ती जिलों में इससे पहले भी कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ तस्करों से सांठगांठ के आरोप में कार्रवाई हो चुकी है।
प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक चित्र
तस्कर किस कदर बेखौफ हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि पिछले साल अप्रेल में मारवाड़ के कुख्यात तस्कर राजू फौजी और उसके साथियों ने डोडा-चूरा ले जाते समय नाकाबंदी के दौरान भीलवाड़ा जिले में कोटड़ी और रायला थाने के दो सिपाहियों की हत्या कर दी थी। मामले की जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई थीं। खुद पुलिस के जवान इन तस्करों के मददगार बने हुए थे, जो मालवा और मेवाड़ से मादक पदार्थ लेकर आने वाले तस्करों को रूट भी बताते थे और खतरा होने पर आगाह भी करते थे। इस मामले में पुलिस मुख्यालय ने भीलवाड़ा के चार, चित्तौड़गढ़ और जोधपुर के एक-एक पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया था। इन सबकी गिरफ्तारी भी हुई थी।
एसीबी से रिवर्स ट्रेप हुए चित्तौड़गढ़ जिले के एक थानाधिकारी ने पूछताछ में डोडा-चूरा तस्करों से रिश्वत के रूप में बड़ी रकम मिलने की बात मंजूर की थी। सिरोही जिले में पुलिस की मिलीभगत से अवैध शराब का परिवहन भी पकड़ा जा चुका है। अफीम की तुलाई होने के बाद चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, नीमच, मंदसौर क्षेत्र में इन दिनों तस्कर खासे सक्रिय हैं। बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ इन जिलों से मारवाड़, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली समेत देश के विभिन्न शहरों में ले जाया जा रहा है। इतना ही नहीं, तस्करों को बचाने के फेर में कई पुलिसकर्मियों की आपस में ठनी भी हुई है। यह सही है कि कुछ लोगों की वजह से समूचा पुलिस महकमा बदनाम होता है। सरकार को पुलिस बेड़े में शामिल ऐसे 'अपराधी मित्र' तलाश कर उन्हें घर बैठाना ही होगा ताकि लोगों में पुलिस के प्रति विश्वास कायम रहे। (ज.प्र.सिं.)

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