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ओमिक्रॉन संक्रमण: महामारी से निपटने में महज उम्मीद काफी नहीं

ओमिक्रॉन संक्रमण: चंद दिनों में ही कोरोना के डेल्टा वैरिएंट पर हावी हो चुका है यह वायरस। यह इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि हम शायद उतनी ही तेजी से प्रतिक्रिया न कर सकें। उम्मीद पर दुनिया कायम है, लेकिन ओमिक्रॉन से निपटना सिर्फ उम्मीद के सहारे नहीं छोड़ा जा सकता।

नई दिल्ली

Published: December 22, 2021 09:06:26 am

विलियम हानेज
(सह निदेशक, कम्युनिकेबल डिजीज डायनामिक्स सेंटर, हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ)

महामारी को आए दो साल हो चुके हैं। अब भी हम कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर चिंतित हैं जो समुदायों में फैल रहा है। डेल्टा वैरिएंट के मुकाबले ज्यादा लोगों को संक्रमित करने वाला वैरिएंट ओमिक्रॉन कुछ ही दिनों में व्यापक पैमाने पर फैल गया। हो सकता है अभी यह आपके आसपास न पहुंचा हो, पर जल्द ही पहुंच सकता है। साथ ही ऐसी रिपोट्र्स और टिप्पणियां भी चल रही हैं कि ओमिक्रॉन से केवल हल्का संक्रमण होगा। मतलब यह हुआ कि यह ज्यादा चिंता वाला वैरिएंट नहीं है और हम जरूरी सावचेती रखते हुए इससे भी पार पा ही जाएंगे। लेकिन ऐसा सोचना अपरिपक्वता है। मैं यह नहीं कहता कि ओमिक्रॉन बहुत बुरे दिन लाएगा, पर इसे कमतर आंकना भी ठीक नहीं।

Omicron
Omicron

हम इसके बारे में अभी पूरी तरह से नहीं जानते। तीन मुख्य बातों पर ध्यान देने की जरूरत है - संक्रमण क्षमता, रोग की गंभीरता और प्रतिरोधक क्षमता से इसका बच निकलना। दुनिया भर के आंकड़ों से जाहिर है कि दक्षिण अफ्रीका में पहली बार सामने आया ओमिक्रॉन कोरोना के डेल्टा वैरिएंट के मुकाबले ज्यादा तेजी से फैलता है, जिससे अमरीका और दक्षिण अफ्रीका सहित बाकी देशों में संक्रमण की लहर आ चुकी है। दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन, डेनमार्क, नॉर्वे और अन्य देशों में जीनोम सीक्वेंसिंग से जाहिर है कि ओमिक्रॉन तेजी से फैलता है।

अमरीका में 12 से 18 दिसंबर के बीच कोरोना वायरस के कुल मामलों में 73 प्रतिशत केस ओमिक्रॉन के थे। जो लोग वैक्सीन के बूस्टर डोज ले चुके हैं, वे गंभीर रूप से बीमार नहीं होंगे। जबकि दक्षिण अफ्रीका व ब्रिटेन में जिन लोगों ने वैक्सीन नहीं लगवाई, उनके अस्पताल में भर्ती होने की आशंका कहीं अधिक है। लेकिन कोविड का हल्का संक्रमण भी भारी पड़ सकता है। कामगारों की कमी और आपूर्ति शृंखला पहले ही बाधित है। ऐसे में ये 'हल्के बीमार' लोग अगर स्कूल या ऑफिस नहीं जाएंगे तो व्यापक सामाजिक उथल-पुथल निश्चित है। लॉन्ग कोविड के जोखिम अपनी जगह हैं ही।

आंकड़ों पर गौर करें। अगर कहा जाता है कि ओमिक्रॉन संक्रमितों में से केवल 2 प्रतिशत को ही अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ेगी तो इसका अर्थ है कि बहुत बड़ी संख्या में संक्रमितों का 2 फीसदी भी स्वाभाविक रूप से बड़ी संख्या ही होगी। ओमिक्रॉन से संक्रमित हो चुके लोगों को हफ्ते-दो हफ्ते में ज्यादा बीमार पडऩे पर अस्पताल में भर्ती होना होगा। इस अवधि में उस संक्रमित के जरिए कई और लोगों के संक्रमित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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जहां तक इस वैरिएंट के रोग प्रतिरोधक क्षमता को धोखा देने का सवाल है, वैक्सीन के दो डोज लगवाने वालों को संक्रमण से 30 प्रतिशत सुरक्षा मिलती है, जबकि अस्पताल में भर्ती होने से 70 प्रतिशत। मतलब हमें अब भी सचेत रहना है। वैक्सीन लगवाएं, अच्छे मास्क पहनें, आपस में दूरी रखें और हाथ धोने का खयाल रखें।
ओमिक्रॉन की मौजूदगी बताती है कि वायरस म्यूटेट होता रहेगा और आने वाले सालों में बड़ा खतरा हो सकता है। जहां ओमिक्रॉन फैल रहा है, वहां पुन: कोविड टेस्ट, टीकाकरण व अन्य रक्षात्मक उपाय अपनाने होंगे।

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महामारी से जूझने के वैक्सीन समेत तमाम उपायों के सहारे ही हम यहां तक पहुंचे हैं लेकिन ओमिक्रॉन संक्रमण की गति चिंताजनक है, क्योंकि जितनी तेजी से यह फैलेगा, उतनी ही तेजी से चिकित्सा उपाय करने की जरूरत पड़ सकती है। मार्च 2020 में कोरोना वायरस काफी अस्पष्ट-सा था। अब हम इसे दूर से आता हुआ भी देख सकते हैं। यह इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि हम शायद उतनी ही तेजी से प्रतिक्रिया न कर सकें। उम्मीद पर दुनिया कायम है, लेकिन ओमिक्रॉन से निपटना सिर्फ उम्मीद के सहारे नहीं छोड़ा जा सकता।

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