चीन को कड़ा संदेश जरूरी

 चीन को कड़ा संदेश जरूरी

| Publish: Jan, 16 2015 11:35:00 AM (IST) विचार

चीन का भारतीय सीमा में आए दिन घुस आना और भारतीय सैनिकों को गश्त से रोक देना कोई ...

चीन का भारतीय सीमा में आए दिन घुस आना और भारतीय सैनिकों को गश्त से रोक देना कोई नई बात नहीं है। चीन ऎसी हरकतों से भारत पर दबाव बनाना चाहता है। हालांकि, यदि हम लद्दाख में चीनी घुसपैठ की बात करें, तो वहां भारत और चीन की सीमा का निर्घारण स्पष्ट नहीं है जिसकी वजह से आए दिन चीनी सैनिक भारतीय सीमा में चले आते हैं। सीमा निर्घारण स्पष्ट नहीं होने की वजह से कई बार भारतीय सैनिक भी उनके इलाके में चले जाते हैं, जिसके बारे में हमें कम ही पता चल पाता है।

दोनों देशों के बीच यह समझौता है कि वे सीमा विवाद के मामलों को फ्लैग मीटिंग के जरिए ही सुलझाएंगे। एग्रीमेंट के अनुसार यदि वे एक-दूसरे की सीमा में चले जाते हैं, तो कोई भी जवाबी कार्रवाई या फायरिंग नहीं करेगा। अगर हम अरूणाचल प्रदेश की बात करें, तो चीन लम्बे समय से इस पर अपना दावा करता रहा है। भारत ने कई बार चीन को कड़े शब्दों में जवाब दिया है कि अरूणाचल भारत का अभिन्न अंग है, लेकिन चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है। वह अरूणाचल प्रदेश के लोगों को नत्थी वीजा देकर विवाद खड़ा करता रहा है। आज भारत को अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की जरूरत है।

चीन ने जल, थल, नभ तीनों ही क्षेत्रों में बहुत तरक्की की है। चीन का रक्षा बजट भारत की तुलना में कई गुना ज्यादा है। अगर भारत को चीन की उकसाने वाली हरकतों को रोकना है, तो उसे अपनी सैन्य क्षमता बढ़ानी होगी। दुनिया के ताकतवर देशों के साथ अपने सम्बंध मजबूत कर चीन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाना होगा। चीन नहीं चाहता कि भारत का अपने पड़ोसी देशों से सम्बंध मधुर रहे। अगर भारत अपने पड़ोसियों से कोई भी समझौता करता है, तो उसे परेशानी होने लगती है।

चीन पाकिस्तान में बंदरगाह बनाने के साथ ही परमाणु संयंत्र लगाने में भी मदद कर रहा है ताकि एशिया में उसका प्रभुत्व बने। श्रीलंका, म्यांमार, नेपाल से चीन लगातार सम्पर्क बनाए हुए है। भारत को हिन्द महासागर मे अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की जरूरत है। आज चीन का अधिकांश व्यापार इसी समुद्री रास्ते से होता है। भारत की ताकत हिन्द महासागर में बढ़ने का असर चीन पर साफ दिखेगा।

साइबर जगत में सेंध
पिछले कु छ वर्षो में भारत पर साइबर हमलों की संख्या में अचानक इजाफा हुआ है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भारत में अधिकांश साइबर हमले चीन करता है। सुरक्षा मामलों की एक रिपोर्ट के अनुसार 2006 में 5,211 और 2011 में 17,306 बार भारतीय वेबसाइटों को हैक किया गया, जिसमें चीन का
हाथ अधिक रहा। चीनी हैकरों की पहुंच देश के रक्षा संसाधनों तक होने लगी है। भारत को अपने रक्षा अनुसंधानों की सुरक्षा ढाचें को और अधिक मजबूत करनी होगी, ताकि कोई भी गुप्त सूचना दुश्मन देश के हाथ न लगे।

समुद्री क्षेत्र पर भी निगाह
हाल ही में भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के महानिदेशक अविनाश चंदर ने दावा किया था कि भारत के समुद्री क्षेत्र पर चीन के 19 उपग्रह निगरानी कर रहे हैं। भारत को चीन की इस पैनी नजर का जवाब देने के लिए अपने सूचना और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की जरूरत है। भारत को अपने जलक्षेत्र पर अपनी निगरानी बढ़ानी होगी, इसके लिए 80 से 100 सेटेलाइट की जरूरत है, जो पल भर में ही सूचना दे सकें। यह भारत के लिए निगरानी रणनीतियों की समीक्षा करने का समय है। हमें चीन को रोकने के लिए नई तकनीक विकसित करनी होगी।

डै्रगन नहीं सुलझाना चाहता सीमा विवाद
चीन ने भारत के जम्मू कश्मीर क्षेत्र के पश्चिमी सेक्टर में करीब 38 हजार वर्ग किमी भू-भाग पर कब्जा कर रखा है। कहने को दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा है, लेकिन चीन इस सीमा रेखा को स्पष्ट नहीं करना चाहता। इसी के चलते चीनी सैनिक कभी 02 किमी. तो कभी 20 किमी. अंदर तक घुसकर भारतीय इलाकों पर दावा करते रहते हैं।

अफसर करीम, रिटायर्ड मेजर जनरल एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य
Ad Block is Banned