तीन तरफ से घिरा पाकिस्तान

तीन तरफ से घिरा पाकिस्तान
surrounded pakistan

Dilip Chaturvedi | Updated: 05 Mar 2019, 03:22:09 PM (IST) विचार

पाकिस्तान वित्तीय संकट से गंभीर रूप से जूझ रहा देश बन चुका है। उस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भारी दबाव है। उसको एक ओर तो दुनिया के देशों से आर्थिक मदद चाहिए और दूसरी ओर यह संदेश भी नहीं देना चाहता कि उसकी ओर से आतंकवाद को समर्थन दिया जा रहा है।

संजय भारद्वाज, दक्षिण एशियाई मामलों के जानकार

केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की जम्मू-कश्मीर को लेकर दो-तीन वर्षों से कठोर, स्पष्ट और आक्रामक नीति रही है। उसकी नीति इस बात में भी सफल रही है कि अमरीका और कुछ मुस्लिम देश कश्मीर को भारत का हिस्सा मानने लग गए हैं। अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने तो कुछ दिन पहले खुलकर कश्मीर को भारत का हिस्सा भी कहा था।

इन बदलती हुई परिस्थितियों के कारण पाकिस्तान और वहां की इमरान खान की सरकार पर दबाव बनने लगा था कि वह अपनी कश्मीर नीति की पुन: समीक्षा करे। उधर, कश्मीर में भी दो-तीन महीनों से कुछ हिंसात्मक आंदोलन चल रहे थे। इमरान खान सरकार और पाकिस्तान की फौज इस मौके का लाभ उठाना चाहते थे। वे दुनिया के सामने बताने की कोशिश में रहे कि जो कुछ कश्मीर में चल रहा है, वह ठीक नहीं है और वहां के हिंसात्मक आंदोलन घरेलू समस्या का नतीजा हैं। कश्मीर के संदर्भ में भारतीय पक्ष में जो धारणा बनती जा रही है, वे उसे गलत सिद्ध करना चाहते थे। इसी का परिणाम रहा पुलवामा हमला। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान कश्मीर की घरेलू हिंसा की ओर खींचना चाहता था।

भारत इससे पूर्व एक सर्जिकल स्ट्राइक कर चुका था और अब पुलवामा हमले के बाद अपनी सख्त नीति के तहत उसने एक बार फिर पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने के इरादे से हवाई कार्रवाई की। भारत ने बालाकोट ऑपरेशन के माध्यम से जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकाने पर ही हमले की कार्रवाई नहीं की, बल्कि उसने पाकिस्तान को भी संदेश दिया कि यदि वह आतंकी गतिविधियों का समर्थन करना जारी रखेगा तो हम कड़ा सैन्य प्रतिकार करेंगे।

उधर, इमरान खान सरकार पाकिस्तान की जनता के सामने यह संदेश नहीं देना चाहती थी कि उनकी सरकार भारत की कार्रवाई के जवाब में कुछ नहीं कर रही। इसीलिए इमरान खान ने अपने हालिया बयानों में कहा कि यह नया पाकिस्तान है। और, शायद इसीलिए पाकिस्तान ने हड़बड़ाहट में भारतीय सैन्य ठिकानों पर आक्रमण करने की बात सोची।
पाकिस्तान से गलती यह हो गई कि उसने भारतीय हवाई कार्रवाई, जो आतंकवाद के विरुद्ध की गई थी, के प्रतिकार में उन एफ-16 अमरीकी युद्धक विमानों का इस्तेमाल किया जो उसे आतंकी गतिविधियों को ही रोकने के लिए दिए गए थे। इन पाकिस्तानी एफ-16 विमानों से प्रतिरक्षा में भारत ने मिग-21 विमान खोया। भारतीय कार्रवाई में मिग-21 के पायलट अभिनंदन पाकिस्तानी क्षेत्र में उतर गए, जिन्हें पाकिस्तान ने हिरासत में ले लिया।

इधर, पाकिस्तान और भारत में तनाव बढ़ गया है। उधर, दूसरी ओर करीब दो सप्ताह पूर्व ईरान की पाकिस्तान के बलूचिस्तान से लगती सीमा पर भी एक फिदायीन हमला हुआ था। इसमें ईरान के २७ सैनिकों की मौत हो गई थी और उसने इसके लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन को जिम्मेदार बताया था। इस घटना के बाद से पाकिस्तान, ईरान के साथ तनावपूर्ण परिस्थितियों में घिरा हुआ है।

पाकिस्तान के लिए अफगानिस्तान सीमा पर भी मोर्चा खुला हुआ है। अमरीका, अफगानिस्तान से निकलकर परिस्थितियां संभालने की जिम्मेदारी पाकिस्तान को सौंपना चाहता है। इसी संदर्भ में पाकिस्तान, अफगान सरकार को दरकिनार कर अफगान तालिबानों से बात कर रहा है। उसकी इस हरकत से चिढ़ी बैठी अफगान सरकार ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान विरोधी संगठनों और पाकिस्तान विरोधी तहरीके पाकिस्तान तालिबान को प्रोत्साहन देना शुरू कर दिया है। इस तरह पाकिस्तान को अफगानिस्तान सीमा पर भी तनाव झेलना पड़ रहा है।

तीन तरफ से सीमा विवाद से घिरा पाकिस्तान भारत के साथ तनाव बढ़ाने की स्थिति में नहीं है। इसीलिए इमरान खान ने भारत के साथ शांति वार्ता की पेशकश की। उन्होंने कहा कि यदि भारत आतंक के खिलाफ सबूत देगा तो वे कार्रवाई करेंगे। वे दुनिया के सामने खुद को शांति दूत के तौर पर पेश करने का आडंबर कर रहे हैं और हमारे जांबाज पायलट अभिनंदन को भारत को सौंपने पर मजबूर होना पड़ा है।

उधर, भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ऑर्गेनाइजेशन फॉर इस्लामिक कोऑपरेशन में पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि भारत सभी संप्रदायों का देश है। भारत धर्म विशेष को आतंकवाद से जोड़कर नहीं देखता और अन्य देशों से उसके द्विपक्षीय संबंध धर्म पर आधारित नहीं होते। बांग्लादेश और मालदीव के साथ संबंधों का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि हमारे खाड़ी देशों में भारत के 80 लाख लोग काम करते हैं। भारत के सभी मुस्लिम देशों के साथ मधुर संबंध हैं जो दर्शाता है कि वह इस्लाम के खिलाफ नहीं है। उन्होंने विकास और सभी धर्मों के भाईचारे की बात की। यही वजह है कि कई मुस्लिम देश भारत के साथ हैं।

यह भी तथ्य महत्त्वपूर्ण है कि पाकिस्तान वित्तीय संकट से गंभीर रूप से जूझ रहा देश बन चुका है। उस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भारी दबाव है। उसको एक ओर तो दुनिया के देशों से आर्थिक मदद चाहिए और दूसरी ओर यह संदेश भी नहीं देना चाहता कि उसकी ओर से आतंकवाद को समर्थन दिया जा रहा है। अमरीका भी नहीं चाहता है कि पाकिस्तान, भारत से इतना उलझ जाए कि अफगानिस्तान से उसकी सुरक्षित निकासी में बहुत देर हो जाए। इसीलिए भी उसने पाकिस्तान पर दबाव बनाया हुआ है।

चीन भी आंतक के खिलाफ भारतीय कार्रवाई को समर्थन दे रहा है क्योंकि उसने पाक में आर्थिक गलियारे के नाम पर भारी-भरकम निवेश कर रखा है। उसका एक स्वार्थ यह भी है कि उसकी 'वन बेल्ट वन रोड' परियोजना में भारत उसके साथ जुड़ जाए, इसलिए पाकिस्तान का दोस्त होते हुए भी भारत की खिलाफत नहीं करना चाहता। इन हालातों के कारण पाकिस्तान भारी दबाव में है।

(लेखक, जेएनयू, नई दिल्ली में दक्षिण एशिया अध्ययन केंद्र में प्रोफेसर।)

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