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कमजोर तबके की विकास में भागीदारी ही सामाजिक न्याय

मोदी सरकार ने 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र को नारा बनाकर समाज के सबसे कमजोर वर्ग को भी विकास में भागीदार बनाने की कोशिश की है।

Published: May 10, 2022 08:09:51 pm

राज्यवर्धन सिंह राठौड़
भाजपा सांसद और
पूर्व केंद्रीय मंत्री


सामाजिक न्याय के कई अर्थ होते हैं। इसकी मुख्य व्याख्याओं में से एक है ऐसे समाज की अवधारणा जो निष्पक्ष और ईमानदारी का अनुसरण करने वाला हो। कौटिल्य ने जहां पालन, रक्षण और योगक्षेमं का समर्थन किया, वहीं विवेकानंद ने नर सेवा को नारायण सेवा बताया। इक्कीसवीं सदी में समाज सुधार की सरकार की क्षमता, उसकी ताकत और नेतृत्व पर निर्भर होती है। सरकार, समाज कल्याण योजनाओं और नागरिकों की सेवा के लिए सार्वजनिक फंड का प्रबंधन करती है। यही नेतृत्व लोक सेवा के आदर्शों का प्रतीक है और लोकतंत्र के हर भागीदार को प्रेरित करता है कि वह सुशासन के उच्चतम मानदंडों के अनुरूप कार्य करे। जब भारत ने 1991 में अपनी अर्थव्यवस्था के दरवाजे उदारीकरण के लिए खोल दिए, तो पश्चिमी देशों ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों को प्रेरित किया कि वे भारत पर दबाव बनाएं कि वह अपने सामाजिक कल्याण के खर्चे कम कर दे। हालांकि कल्याणकारी राज्य की अवधारणा भारत के अस्तित्व का अभिन्न अंग रही है। औपनिवेशिक ताकतों ने भारत को संसाधन विहीन किया। स्वतंत्र भारत के राष्ट्र निर्माताओं ने देश में सामाजिक,सांस्कृतिक और वित्तीय विभाजन की समस्या को पहचाना। उन्होंने संविधान में मूलभूत अधिकारों और राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों को शामिल किया। मोदी सरकार ने 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र को नारा बनाकर समाज के सबसे कमजोर वर्ग को भी विकास में भागीदार बनाने की कोशिश की है।
केंद्र सरकार ने भारतीय किसानों की सहायता के लिए कृषि क्षेत्र पर विशेष फोकस किया गया। भारत में स्वच्छता कार्यक्रम के साथ ही मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना भी महत्त्वपूर्ण है। 2012 में शुरू किया गया निर्मल भारत अभियान 2013 में समाप्त हो गया और 2014 में इसे पुन: शुरू किया गया। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना(मनरेगा) में जहां पहले भुगतान देरी से होना और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं थीं, अब वह स्थिति बदल चुकी है। तकनीकी समावेश और आधार से जुडऩे के साथ ही श्रमिकों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) सुनिश्चित हो सका है। 2013 से मनरेगा के तहत न केवल रोजगार तीन गुना बढ़ा है, बल्कि कोरोना महामारी काल में इसका महत्त्व जन-जन को समझ आया। आयुष्मान भारत योजना लाई गई। इसके तहत 1,17,891 स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र बनाए गए हैं।
कोरोना महामारी के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहला फैसला यही था कि देश के कमजोर वर्ग को नि:शुल्क राशन मिले। सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के रेकॉर्ड का डिजिटलीकरण कर बड़ी संख्या में फर्जी राशन कार्ड निरस्त किए। अब 'एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड' से प्रवासी मजदूर देश के किसी भी स्थान पर राशन कार्ड से मिलने वाले लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा पीएम उज्ज्वला योजना के तहत 9 करोड़ गैस कनेक्शन दिए गए। जल जीवन मिशन के तहत 9.4 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल से जलापूर्ति कनेक्शन दिए गए। सुशासन के जरिए कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को आगे बढ़ाया गया है। सरकार ने समाज कल्याण कार्यक्रमों के लिए आवंटित फंड के उपयोग संबंधी खामियों को दूर कर करीब 1.70 लाख करोड़ की बचत की है। इसका श्रेय सरकार द्वारा 51 मंत्रालयों की 351 योजनाओं में डीबीटी लागू करने पर जोर देने और लाभार्थियों के खातों को ई-रूपी वाउचर से जोडऩे जैसे नवाचारों को दिया जाता है। सरकार ने विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत 20२०-21 में कई जरूरतमंदों के खाते में 2,10,244 करोड़ रुपए सीधे जमा करवाए।
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