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Patrika Opinion : अर्थव्यवस्था में तेजी से सुधार के बेहतर संकेत, लेकिन बचाए रखना चुनौती

वित्तीय वर्ष 2021-22 की सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 8.4 फीसदी रही। यह न केवल सुखद संकेत है, बल्कि हमारे पिछले दिनों में बने हुए अनावश्यक भय को भी कम करता हुआ दिखाई दे रहा है। कोरोना के कारण विकास की अस्थिरता और जीडीपी का लगातार नीचे जाना कई तरह की आशंकाओं को पैदा कर रहा था। ऐसे में एक साल के भीतर एक बड़ा बदलाव लाकर देश ने फिर अपनी ताकत को साबित किया है।

नई दिल्ली

Published: December 02, 2021 11:39:00 am

नई दिल्ली। देश की अर्थव्यवस्था में तेजी से सुधार नजर आ रहा है। सितंबर माह की तिमाही के आंकड़े वाकई खुश करने वाले हैं। वित्तीय वर्ष 2021-22 की सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 8.4 फीसदी रही। यह न केवल सुखद संकेत है, बल्कि हमारे पिछले दिनों में बने हुए अनावश्यक भय को भी कम करता हुआ दिखाई दे रहा है। मार्च-2020 से देश कोरोना के चलते अलग तरह के भय से गुजर रहा है। कोरोना के कारण विकास की अस्थिरता और जीडीपी का लगातार नीचे जाना कई तरह की आशंकाओं को पैदा कर रहा था। ऐसे में एक साल के भीतर एक बड़ा बदलाव लाकर देश ने फिर अपनी ताकत को साबित किया है। मालूम हो कि सितंबर 2020 में देश की जीडीपी की ग्रोथ रेट निगेटिव में 7.3 थी।
GDP
दरअसल, बाजार में मजबूती सकारात्मक माहौल और भविष्य की संभावनाओं से आती है। कुछ समय से उम्मीदों का बाजार खड़ा हुआ है। ऐसे में उसका असर जीडीपी और उसकी ग्रोथ रेट पर भी दिखाई दे रहा है। नवंबर का महीना फिर जीएसटी संग्रहण में ऊपर गया है। यह संकेत बाजार में सब कुछ बेहतर होने के लिए काफी हैं। हालांकि कोरोना के नए खतरों से बाजार में आशंकाएं बढ़ी हुई हैं।
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जिस तरह से कोरोना का नया वैरिएंट आया है और सरकारों ने प्रतिबंध लगाने की शुरुआत की है, उससे भय का माहौल बनना शुरू हुआ है। ऐसे में सबसे मुश्किल यही है कि इससे बाजार को कैसे बचाया जा सकता है? सरकार के लिए भी यही चुनौती है कि अगर बाजार नीचे जाएगा, तो जीडीपी की ग्रोथ रेट गिरेगी। ग्रोथ रेट गिरेगी तो देश आशंकित मंदी की ओर बढ़ेगा।
ऐसे में सरकार के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि कोरोना की लड़ाई को और व्यापक बनाए और डर के माहौल को दूर करे। कोरोना को फैलने से रोकना है, क्योंकि कोरोना जितना बढ़ेगा, हमारी विकास दर उतनी ही नीचे आएगी।
कोरोना से बचाव के लिए मास्क लगाने, सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखने और हाथ धोने पर गंभीरता से ध्यान देने का समय फिर आ गया है। मुश्किल यह है कि कोरोना के कमजोर पड़ जाने के बाद दी गई ढिलाई के कारण लोगों में मास्क लगाने की आदत भी कम हो गई है।
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सरकार को सख्ती से इस ओर ध्यान देना होगा ताकि कोरोना संक्रमण न फैले और इसका अर्थव्यवस्था पर असर न हो। कोरोना के साथ कारोबार को भी ध्यान में रखना होगा, क्योंकि सब कुछ इसी से जुड़ा हुआ है। अगर बाजार के प्रति लोगों के भाव निगेटिव हुए, तो विकास दर तेजी से नीचे आएगी। ऐसे में अभी सही समय है, जब सरकार अपने फैसलों को लेकर गंभीरता के साथ काम करे।

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