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PATRIKA OPINION: सार्वभौमिक मूल्यों पर रहता है ध्यान

यह तय है कि कार्यस्थल आध्यात्मिकता आधुनिक संगठनात्मक रणनीतियों को आकार दे रही है और आगे भी देगी।

जयपुरJun 17, 2024 / 03:49 pm

विकास माथुर

किसी भी संस्थान में कर्मचारियों द्वारा सार्थक कार्य किया जाना, सभी में एक समुदाय होने का भाव और संगठन या संस्थान के मूल्यों के साथ व्यक्तिगत संरेखण – ये तीन घटक कार्यस्थल आध्यात्मिकता के लिहाज से महत्त्वपूर्ण होते हैं। यह एक बहुआयामी अवधारणा है जो पारंपरिक कार्य करने की सीमाओं से परे, ऑफिस में व्यक्तिगत तत्वों को शामिल करती है। यह एक कर्मचारी की संतुष्टि और कल्याण में योगदान करती है। हालांकि यह जानना भी आवश्यक है कि कार्यस्थल आध्यात्मिकता क्या नहीं है।
कार्यस्थल आध्यात्मिकता के बारे में एक आम गलत धारणा यह है कि इसमें पंथ विशेष प्रथाएं शामिल हैं या संगठन के भीतर पंथविशेष मान्यताओं को बढ़ावा दिया जाता है, लेकिन यह सत्य नहीं है। यह किसी भी अनुष्ठान या सिद्धांत को निर्धारित या उसका समर्थन नहीं करती है। इसके विपरीत, यह अखंडता, विचारशीलता और करुणा जैसे सार्वभौमिक मूल्यों पर ध्यान केंद्रित करती है, जिसका उद्देेश्य कार्य के माध्यम से मानवीय भावना को बढ़ाना है। कार्यस्थल आध्यात्मिकता को केवल एक प्रवृत्ति के रूप में नहीं, बल्कि कर्मचारी संतुष्टि और संगठनात्मक प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए एक महत्त्वपूर्ण समाधान के रूप में देखा जाना चाहिए। यह दृष्टिकोण संगठन के पेशेवर उद्देश्यों से विचलित नहीं होता है, बल्कि यह कार्य अनुभव को समृद्ध करता है। इस प्रकार, कार्यस्थल आध्यात्मिकता एक व्यापक दृष्टिकोण है, जो पेशेवर प्रयासों के साथ व्यक्तिगत महत्व की खोज को एकीकृत करती है।
पिछले कुछ वर्षों में कार्यस्थल आध्यात्मिकता का विकास कई कारकों से प्रेरित रहा है। वैश्वीकरण अर्थव्यवस्था और कार्यबल में बढ़ती विविधता ने कंपनियों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ बनाए रखने और समग्र व समावेशी तरीके से इसका प्रबंधन करने के नए तरीके खोजने के लिए प्रेरित किया है। व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास में बढ़ती रुचि, साथ ही मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण के बारे में अधिक जागरूकता ने भी कार्यस्थल पर आध्यात्मिक प्रथाओं को अपनाने को बढ़ावा दिया है।
इसके अलावा, कार्यबल में प्रवेश करने वाली नई युवा पीढ़ी ने ऐसे कार्यस्थलों के प्रति स्पष्ट प्राथमिकता दिखाई है जो उनके मूल्यों के अनुरूप हों और सार्थक जुड़ाव के अवसर प्रदान करें। संगठनों ने यह स्वीकारना शुरू कर दिया है कि अपने कर्मचारियों की भावना का पोषण करना व्यावसायिक उत्कृष्टता और स्थिरता प्राप्त करने से जुड़ा है। इस प्रकार, कार्यस्थल आध्यात्मिकता आधुनिक संगठनात्मक रणनीतियों को आकार दे रही है और आगे भी देगी। इससे अधिक संवेदनशील और उद्देश्य-संचालित बिजनेस मॉडल बन सकेंगे।
— प्रो. हिमांशु राय 

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