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Patrika Opinion : बीमा कंपनियों के नजरिए पर सवाल

दावे के भुगतान के समय बीमा कंपनियों का नजरिया कारोबारी हो जाता है और बीमा शर्तों की आड़ लेकर बहुत सारे मामलों की अनदेखी करने लगती हैं। वे भूल जाती हैं कि कारोबार के साथ उनका सामाजिक दायित्व भी है। खासकर तब, जब बीमा कंपनी सार्वजनिक क्षेत्र की हो। बीमा कंपनियों को कारोबार के साथ मानवता और संवदेनशीलता दिखाने की भी जरूरत है।

नई दिल्ली

Published: December 23, 2021 05:30:21 pm

सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले मजदूर को मुआवजा देने में आनाकानी करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की एक इंश्योरेंस कंपनी को सुप्रीम कोर्ट ने लताड़ लगाई। शीर्ष अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कंपनी से सवाल किया कि आखिर उसे सामाजिक दायित्वों का एहसास कब होगा। यह वह सवाल है, जो शायद ऐसे हर मामले में इंश्योरेंस कंपनियों से पूछा जाना चाहिए। दरअसल, मामला यह था कि 2004 में ओडिशा में ट्रक से सामान उतारते समय एक मजदूर की मौत हो गई थी।
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परिजनों ने श्रम आयुक्त का दरवाजा खटखटाया। बीमा कंपनी को क्षतिपूर्ति के रूप में 2.62 लाख रुपए के भुगतान के निर्देश दिए गए। इंश्योरेंस कंपनी इसके खिलाफ हाईकोर्ट चली गई, जहां पर यह रकम घटाकर 1.98 लाख रुपए कर दी गई। इसके बाद भी कंपनी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। बीमा कंपनी किसी भी तरह का भुगतान नहीं करना चाहती थी। सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी को लताड़ के साथ 2.62 लाख रुपए का भुगतान 12 फीसदी ब्याज के साथ करने के निर्देश दिए।
शीर्ष कोर्ट का यह फैसला बीमा कंपनियों की मानसिकता को उजागर करने के लिए काफी है। दरअसल, ज्यादातर बीमा कंपनियों का व्यवहार ऐसा ही है। दावे के भुगतान के समय उनका नजरिया कारोबारी हो जाता है और बीमा शर्तों की आड़ लेकर बहुत सारे मामलों को अनदेखी करने लगती हैं। वे भूल जाती हैं कि कारोबार के साथ उनका सामाजिक दायित्व भी है। खासकर तब, जब बीमा कंपनी सार्वजनिक क्षेत्र की हो।
इन कंपनियों को पता है कि व्यक्ति इस सोच के साथ बीमा कराता है कि जब उस पर संकट आएगा, तो तब बीमा कंपनी मददगार बनेगी। यह बीमा चाहे जीवन का हो अथवा फसल का या फिर किसी अन्य सामान का। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी बीमा कंपनियों की पूरी तरह कारोबारी होती कार्यप्रणाली को आईना दिखाती है।
सवाल है कि क्या बीमा कंपनियों का मुनाफा ही सब कुछ है या फिर उनका सामाजिक दायित्व भी है? क्या बीमा क्षेत्र की कंपनियों को सामाजिक जिम्मेदारी को गंभीरता से देखने की जरूरत नहीं है?
बीमा कंपनियों को कारोबार के साथ मानवता और संवदेनशीलता दिखाने की भी जरूरत है। अगर कंपनियां अपने फैसलों में व्यावहारिकता दिखाएंगी, तो शायद उन्हें आगे ऐसी लताड़ नहीं खानी पड़ेगी। यानी बीमा कंपनियों को मुनाफे की बाजीगरी से बाहर निकल कर अपना सामाजिक चेहरा दिखाना होगा। उन्हें समझना होगा कि बीमा सेक्टर अन्य धंधों की तरह सिर्फ मुनाफाखोरी का कारोबार नहीं है। इसके मूल में सामाजिक दायित्व है।

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