Patrika Opinion : कोरोना से बचाव के कायदे हो रहे हवा

Coronavirus : खिलाड़ी लखनऊ में थे और वहां के अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम की दर्शक दीर्घा खचाखच भरी थी। अधिकांश लोगों ने तो मास्क भी नहीं लगा रखा था।

By: Patrika Desk

Published: 21 Aug 2021, 08:14 AM IST

कोरोना संक्रमण काल के बीच जापान ने जिस कुशलता के साथ ओलंपिक खेलों का आयोजन किया, उसकी पूरी दुनिया में तारीफ हो रही है। सामाजिक दूरी, मास्क का प्रयोग और टीकाकरण जैसे जरूरी कायदों का पालन करके टोक्यो ने कोरोना का डटकर मुकाबला किया। मगर ये क्या, टोक्यो में बेहद सतर्कता के साथ खेल हुए और भारत में ओलंपिक से लौटकर आए खिलाडिय़ों के मान-सम्मान के नाम पर बड़े-बड़े भीड़ भरे आयोजन किए जा रहे हैं। पदक विजेता जब अपने प्रदेश-गांव पहुंचे तो उनके स्वागत-सत्कार में लोग जुटे, फिर राज्य सरकारों ने सम्मान किया। हर जगह कोरोना के कायदों को टूटते हुए साफ देखा गया। कहीं खिलाडिय़ों को गले लगाया गया तो कहीं उन्हें गोदी में उठाकर घुमाया गया।

गुरुवार को खिलाड़ी लखनऊ में थे और वहां के अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम की दर्शक दीर्घा खचाखच भरी थी। अधिकांश लोगों ने तो मास्क भी नहीं लगा रखा था। हैरानी की बात है कि कोरोना की गंभीरता को देखते हुए जिन खिलाडिय़ों ने बगैर दर्शकों के अपने खेल का हुनर दुनिया के सामने रखा, उनके सम्मान के लिए जनता की भीड़ जुटा ली गई। दुखद तो यह है कि इसका न तो किसी को कोई अफसोस है और न ही तीसरी लहर की आशंका की फिक्र ।

कोरोना को लेकर छोटे देश की बड़ी सीख

यह दुर्भाग्य ही कहलाएगा कि कोरोना से बचने के लिए जो मापदंड बनाए गए हैं, उन्हें सबसे पहले सरकारें और राजनीतिक दल ही तोड़ रहे हैं। प्रशासनिक तंत्र तो ऐसे समय पर एकदम पंगु नजर आता है। अभी देशभर में केंद्रीय मंत्रियों की जन अशीर्वाद यात्राएं निकलना शुरू हुई हैं और इनमें खुलकर हजारों लोग एकत्रित हो रहे हैंै। आखिर अनुमति कौन दे रहा है और किस आधार पर?

न तो दूसरी लहर के घातक हमले से परिजन गंवाने वाले हजारों परिवारों के आंसू अब तक सूखे हैं और न ही कोरोना पूरी तरह से खत्म हुआ है। ऐसे में यह नासमझी सबके लिए घातक साबित हो सकती है। राजनीतिक दल भले ही कोताही बरत रहे हों, आम जनता को चाहिए कि वह ऐसे आयोजनों का हिस्सा न बने। कोविड उपयुक्त व्यवहार ही इस समय की मांग है और इसे अपनाने में कोई मुश्किल भी नहीं है। सरकारों को हमेशा यह कोशिश करनी चाहिए कि उनके व्यवहार से व्यापक तौर पर जनता भ्रमित न हो। जो नियम-कायदे बनाए जाएं, उनका दृढ़ता और निष्पक्षता के साथ पालन होना चाहिए। ऐसा बिल्कुल न हो कि सत्तासीन दल के लोग खुलेआम नियमों का उल्लंघन करते रहें और जनता की स्वास्थ्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाए।

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