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Patrika Opinion : चेतावनी की अनदेखी नहीं पड़ जाए भारी

हमें चिंता इसलिए भी करनी होगी, क्योंकि अमरीका और ब्रिटेन जैसे बड़े व विकसित देश दो साल बाद भी कोरोना संक्रमण के खतरे से बुरी तरह से जूझ रहे हैं। इसलिए हमें ऐसी योजना बनाने की जरूरत है, जिससे बिना ज्यादा प्रतिकूल आर्थिक प्रभाव के वायरस फैलने की आशंका को न्यूनतम किया जा सके।

नई दिल्ली

Published: December 18, 2021 10:38:34 am

कोरोना की दूसरी लहर के झटके हम आज तक महसूस कर रहे हैं। उस दौर में भी प्रतिदिन कोरोना संक्रमण के मामले पांच लाख के पार नहीं गए थे। नीति आयोग के सदस्य डॉ.वी.के. पॉल की चेतावनी को गंभीरता से समझना होगा, जिसमें उन्होंने कहा है कि संक्रमण के मामले में यूरोप जैसा हाल हमारा हुआ, तो रोज 13 से 14 लाख मामले आएंगे। कल्पना ही की जा सकती है कि ऐसा हुआ तो भारत में कैसा हाहाकार मच जाएगा। देश में अभी प्रतिदिन आठ हजार मरीज आ रहे हैं और तीन सौ-साढ़े तीन सौ मरीजों की मृत्यु हो रही है।

omicron
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हमें चिंता इसलिए भी करनी होगी, क्योंकि अमरीका और ब्रिटेन जैसे बड़े व विकसित देश दो साल बाद भी कोरोना संक्रमण के खतरे से बुरी तरह से जूझ रहे हैं। अमरीका में कई-कई दिन एक लाख से ज्यादा मरीज आ रहे हैं और ब्रिटेन भी बराबरी करता दिख रहा है। यह स्थिति वहां इसलिए है कि वहां की जनता को पाबंदिया पसंद नहीं हैं। विडंबना यह है कि भारत में भी नीति आयोग की चेतावनी तक की गंभीरता को नहीं समझा जा रहा है। भारत समेत दुनिया भर के वैज्ञानिक भले ही लगातार आगाह करते आ रहे हैं, लेकिन इन चेतावनियों को अनदेखा किया जा रहा है। सरकार और आम जनता दोनों के स्तर पर।
दो-दो बड़े लॉकडाउन झेल चुकी जनता सावधानी बरतने के मूड में नहीं दिखती। खास तौर से ऐसे दौर में जब सरकार की ओर से कोई विशेष पाबंदियां नहीं लगाई गई है। लोग मास्क नहीं लगा रहे और सोशल डिस्टेंसिंग भी कहीं नजर नहीं आती। भीड़ जुटाने वाली तमाम गतिविधियां बेरोकटोक हो रही हैं। सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रमों से लेकर राजनीतिक रैलियां इस तरह से हो रही हैं, मानो कोरोना विदा हो चुका है। सरकार के स्तर पर भी इसी तरह की बेपरवाही साफ तौर पर दिख रही है। इसी लापरवाही का नतीजा है कि हमारे यहां भी देखते-देखते ओमिक्रॉन वेरिएंट के मामले सौ से ज्यादा हो चुके हैं। कोरोना का यह नया वैरिएंट वैसे तो वैक्सीन के मुद्दे पर सरकार की भूमिका संतोषजनक मानी जा सकती है, लेकिन इसमें भी बचे हुए सभी लोगों को टीका लगाने के लिए सुनियोजित कार्य की जरूरत है। आर्थिक गतिविधियों को भी पूरी तरह खोलने के मोह से बचने की जरूरत है। पूरी तरह बंद नहीं किया जाए, लेकिन कुछ सीमा लागू करने के बारे में जरूर विचार किया जाना चाहिए। ऐसी योजना बनाने की जरूरत है, जिससे बिना ज्यादा प्रतिकूल आर्थिक प्रभाव के वायरस फैलने की आशंका को न्यूनतम किया जा सके।बारह से ज्यादा राज्यों में फैल चुका है।

वैसे तो वैक्सीन के मुद्दे पर सरकार की भूमिका संतोषजनक मानी जा सकती है, लेकिन इसमें भी बचे हुए सभी लोगों को टीका लगाने के लिए सुनियोजित कार्य की जरूरत है। आर्थिक गतिविधियों को भी पूरी तरह खोलने के मोह से बचने की जरूरत है। पूरी तरह बंद नहीं किया जाए, लेकिन कुछ सीमा लागू करने के बारे में जरूर विचार किया जाना चाहिए। ऐसी योजना बनाने की जरूरत है, जिससे बिना ज्यादा प्रतिकूल आर्थिक प्रभाव के वायरस फैलने की आशंका को न्यूनतम किया जा सके।

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