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Patrika Opinion: पाक का अल्पसंख्यकों से चिंताजन रवैया

Patrika Opinion: भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को बेनकाब करने के लिए कई कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाए हैं, जिनका असर हुआ है। पाकिस्तान का पड़ोसी और पूरी व्यवस्था से सर्वाधिक प्रभावित होने के नाते भारत को इस मोर्चे पर भी कुछ इसी तरह के कूटनीतिक कदम उठाने होंगे, ताकि पाकिस्तान पर जायज दबाव बने और वह अल्पसंख्यकों के हित में कुछ कदम उठाने को मजबूर हो।

नई दिल्ली

Updated: November 20, 2021 03:41:27 pm

Patrika Opinion: पाकिस्तान की जो कारस्तानियां भारत को हमेशा से प्रभावित करती रही हैं, उनमें आतंकवाद के अलावा बड़ी कारगुजारी वहां अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का कहीं थमता नहीं दिखता सिलसिला है। यह भारत ही नहीं, संपूर्ण विश्व और संपूर्ण मानवता को विचलित करने वाली हरकत है। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने ही वर्ष 2012 को अल्पसंख्यकों के लिए उस समय तक के सबसे खराब साल के रूप में निरुपित किया था। आयोग ही अब उधेड़बुन में होगा कि इसके बाद के समय को अत्याचार की किस श्रेणी में रखे, क्योंकि साल- दर-साल अमानवीयता बढ़ती ही गई है।

मौजूदा स्थिति यह है कि हर महीने सौ से ज्यादा अल्पसंख्यक परिवारों को पाकिस्तान छोड़कर भारत आना पड़ रहा है। हर साल 1000 से ज्यादा हिंदू और ईसाई महिलाओं का जबरन धर्मांतरण किया जा रहा है। आयोग की ही रिपोर्ट है कि इस वर्ष के पहले छह महीने में 6,754 अल्पसंख्यक महिलाओं व लड़कियों का अपहरण किया जा चुका है और इनमें 1,890 को दुष्कर्म का शिकार बनाया जा चुका है। कोरोना काल में तो पाकिस्तान में अत्याचारों का ग्राफ और ज्यादा ऊंचा रहा। एक या दो दशक का आंकड़ा लेंगे, तो अनगिनत हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया जा चुका है। अनगिनत हिंदू घर आग के हवाले किए जा चुके हैं। अमरीकी आयोग (धार्मिक स्वतंत्रता) ने वर्ष 2013 में कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बिलकुल नहीं रोके जा रहे और अपराधियों की धरपकड़ नहीं हो रही है। कई मंचों से पाकिस्तान पर इसी तरह की तीखी टिप्पणियां की जाती रही हैं। संयुक्त राष्ट्र ने तो अपने चार्टर में धार्मिक भेदभाव के खिलाफ दिशा निर्देश भी जारी किए हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने आतंकवाद के मोर्चे पर कई सख्तियां पाकिस्तान पर की हुई हैं, लेकिन अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर उसकी ओर से उतनी दृढ़ता नहीं है। इसीलिए पाकिस्तान पर इसका कोई असर नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र को इस पर विचार करना चाहिए और कुछ उपाय करने चाहिए, क्योंकि दुनिया भर में धार्मिक भेदभाव निषेध की व्यवस्था सुनिश्चित करना उसका दायित्व है। भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को बेनकाब करने के लिए कई कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाए हैं, जिनका असर हुआ है। पाकिस्तान का पड़ोसी और पूरी व्यवस्था से सर्वाधिक प्रभावित होने के नाते भारत को इस मोर्चे पर भी कुछ इसी तरह के कूटनीतिक कदम उठाने होंगे, ताकि पाकिस्तान पर जायज दबाव बने और वह अल्पसंख्यकों के हित में कुछ कदम उठाने को मजबूर हो। यह हमारे देश और संपूर्ण मानवता दोनों के लिए हितकारी होगा।

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