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Patrika Opinion: मेडिकल कॉलेज खोलने में चिंताजनक लापरवाही

जिन कॉलेजों के आवेदन खारिज हुए वहां आयोग की टीम को किसी कॉलेज में फैकल्टी अधूरी मिली तो किसी में संसाधनों की कमी दिखाई दी। वैसे भी कई बार मेडिकल कॉलेज की मान्यता के लिए समय पर मानक पूरा नहीं कर पाना सरकारी तंत्र और संबंधित कॉलेज प्रशासन के ढीले रवैये को दर्शाता है।

जयपुरJul 09, 2024 / 10:13 pm

Nitin Kumar

इस साल की मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ के विवाद के बीच मेडिकल शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने के सरकारी प्रयासों की पोल खोलने वाली खबर आई है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने देश भर में नए खुलने वाले 113 मेडिकल कॉलेजों के आवेदन इस आधार पर खारिज कर दिए हैं कि इनमें निर्धारित मापदण्ड पूरे नहीं हुए हैं। खारिज किए गए आवेदन पत्रों में से पांच राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों से संबंधित हैं। दूसरी ओर, 140 करोड़ की आबादी वाले देश में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं के लिए और अधिक मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सकों की जरूरत निरंतर महसूस की जाती है।नए मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए बुनियादी ढांचे के अतिरिक्त अन्य सुविधाओं के मापदंड भी निर्धारित हैं। सरकारी स्तर पर मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणाएं तो हो जाती हैं पर इन मापदंडों की अनदेखी आम बात है। ऐसा भी देखने में आता है कि निरीक्षण टोली को दिखाने के लिए कुछ समय के लिए दूसरे मेडिकल कॉलेजों से शिक्षकों को प्रतिनियुक्त कर दिया जाता है। जिन कॉलेजों के आवेदन खारिज हुए वहां आयोग की टीम को किसी कॉलेज में फैकल्टी अधूरी मिली तो किसी में संसाधनों की कमी दिखाई दी। वैसे भी कई बार मेडिकल कॉलेज की मान्यता के लिए समय पर मानक पूरा नहीं कर पाना सरकारी तंत्र और संबंधित कॉलेज प्रशासन के ढीले रवैये को दर्शाता है। यह ढीला रवैया भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है वरना कोई वजह नहीं कि सरकार इनकी नाक में नकेल न डाल सके। अब ये मेडिकल कॉलेज खुल पाएंगे या नहीं, इस पर भी सवालिया निशान लग गया है। एनएमसी के मुताबिक, देश में करीब 13.08 लाख चिकित्सक हैं।
सरकारी व निजी क्षेत्र के मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी की गुणवत्ता को केंद्रीय नियामक प्राधिकरण और एनएमसी नियंत्रित करते हैं। सरकारी मेडिकल सीटों की संख्या सीमित रहती है तो निजी कॉलेजों को मनमानी फीस वसूलने का मौका भी मिल जाता है। नए मेडिकल कॉलेज की मान्यता के लिए बिना तय शर्तों को पूरा किए ही आवेदन करना तो और भी गंभीर विषय है। इस घालमेल के लिए जिम्मेदारों का पता लगाया जाना चाहिए। आयोग को इस लापरवाही के लिए जिम्मेदारों को चेतावनी देते हुए मापदंड पूरे करने का एक अवसर और देना चाहिए। ऐसा इसलिए कि मेडिकल कॉलेज खोलने में साल भर की देरी देश में बेहतर चिकित्सा सेवाओं के अभाव की समस्या को और बढ़ाने वाली ही होगी।

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