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प्रसंगवश : जनप्रतिनिधि विवाद छोड़ सामूहिक जिम्मेदारी निभाएं

जब सरकार के आला मंत्रियों के कामों का निपटारा नहीं हो रहा है तो आम आदमी की क्या स्थिति होगी? सरकार के पहले साल को छोड़ दें तो बाकी समय कोरोना के मैनेजमेंट में ही गुजरा है। अब शेष समय में मनमुटाव त्याग कर शीघ्रता से निर्णय करने चाहिए, पार्टी के घोषणा पत्र पर अमल करना चाहिए, राज्य के समुचित विकास पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन इस ओर नेताओं का ध्यान कम है।

नई दिल्ली

Published: November 19, 2021 11:49:12 am

नई दिल्ली। राजस्थान में सरकार के कार्यकाल में अब दो वर्ष बचे हैं। यह सरकार शुरुआत से लेकर अब तक लडख़ड़़ाती ही रही है। सरकार बनते ही मुख्यमंत्री के पद को लेकर, उसके बाद मंत्रिमंडल का गठन और फिर मानेसर की घटना सभी जानते हैं। इसके अलावा हर रोज सरकार के आला नेता आपस में उलझते रहते हैं।
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असंतुष्ट उलझें तो समझ में आता है, पर सरकार के मंत्री ही आपस में उलझें, यह समझ से परे है। ऐसे में क्या जनहित के निर्णय होंगे? क्या उनकी अनुपालना होगी? पहले यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा आपस में उलझ गए थे और हाल ही में मंत्रिमंडल की बैठक में राजस्व मंत्री हरीश चौधरी की डोटासरा, चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा, लालचंद कटारिया ने खिंचाई कर दी।
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उनकी शिकायत थी कि उनके कामों का निपटारा नहीं हो रहा। जब सरकार के आला मंत्रियों के कामों का निपटारा नहीं हो रहा है तो आम आदमी की क्या स्थिति होगी?
सरकार के पहले साल को छोड़ दें तो बाकी समय कोरोना के मैनेजमेंट में ही गुजरा है। अब शेष समय में मनमुटाव त्याग कर शीघ्रता से निर्णय करने चाहिए, पार्टी के घोषणा पत्र पर अमल करना चाहिए, राज्य के समुचित विकास पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन इस ओर नेताओं का ध्यान कम है।
सभी जानते हैं कि मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक सबकी सामूहिक जिम्मेदारी होती है, पर इस सरकार में ऐसा नहीं दिख रहा है। सबकी अपनी-अपनी ढपली और अपना-अपना राग है। कोरोना के बाद जनजीवन पटरी पर लौट रहा है, इसे कैसे पूरी तरह सामान्य किया जाए इस पर ध्यान देना होगा। बेरोजगारों को रोजगार, सभी जिलों का समुचित विकास, योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने से लेकर आदिवासी क्षेत्रों की तस्वीर ठीक करने जैसे काम करने होंगे।
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सरकार के मंत्री अपने विभागों की समीक्षा और उनकी योजनाओं के ऑडिट करें कि उसका जमीनी स्तर पर लोगों को फायदा मिल रहा है या नहीं। शिक्षा विभाग में तबादलों को लेकर रिश्वत लिए जाने की बात उठी है तो सरकार के सभी मंत्री अपने विभागों में नीचे के स्तर के हालात देखें और दुरुस्त करें। विधानसभा चुनाव से एक साल पहले तो वैसे भी पार्टियां अगले चुनाव की तैयारियों में जुट जाएंगी।
स्पष्ट है कि बचे हुए समय का सदुपयोग किया जाए। अब बिना किसी विवाद, आरोप-प्रत्यारोप के मंत्री अपनी सामूहिक जिम्मेदारी की भूमिका निभाएं और जनता की भलाई में जुट जाएं। (सं.पु.)

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