आपका हक : बच्चों को यौन अपराधों से बचाएं

पिछले 10 वर्षों में नाबालिगों के खिलाफ अपराध में 500 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।

यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम 2012 (पॉक्सो) एक ऐसा कानून है, जो बच्चे और बच्चियों दोनों को सुरक्षा देता है।

By: विकास गुप्ता

Updated: 21 Jul 2021, 12:03 PM IST

आभा सिंह, अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट

केरल में बलात्कार के बाद छह वर्षीय बालिका की हत्या की वारदात ने दिल दहला दिया। इस तरह के अपराध देश भर में होते रहते हैं। चाइल्ड राइट्स एनजीओ क्राई की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर 15 मिनट में एक बच्चा यौन शोषण का शिकार होता है। पिछले 10 वर्षों में नाबालिगों के खिलाफ अपराध में 500 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।

बाल बलात्कार के सभी मामलों की प्राथमिकी में पॉक्सो अधिनियम लागू करना एक कानूनी आवश्यकता है। यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम 2012 (पॉक्सो) एक ऐसा कानून है, जो बच्चे और बच्चियों दोनों को सुरक्षा देता है। यह 18 वर्ष से कम उम्र के किसी भी बच्चे को परिभाषित करता है और सभी बच्चों को यौन शोषण से सुरक्षा प्रदान करता है। पॉक्सो में अपराध की गंभीरता के अनुसार कठोर सजा का प्रावधान है, जिसमें अधिकतम आजीवन कारावास और जुर्माना हो सकता हैं। इसमें रिपोर्टिंग, सबूत की रिकॉर्डिंग, जांच और अपराधों की तुरंत सुनवाई, कैमरे के समक्ष सुनवाई और विशेष न्यायालयों के माध्यम से बच्चे की पहचान का खुलासा किए बिना बाल अनुकूल उपाय शामिल हैं। मुआवजे की राशि का निर्धारण करने का भी प्रावधान है, ताकि इस धन का उपयोग बच्चे के उपचार के लिए किया जा सके। पॉक्सो के तहत कुछ प्रावधान किए गए हैं। पुलिस अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि जांच के दौरान बच्चा आरोपी के संपर्क में न आए। बच्चे को रात में पुलिस स्टेशन में नहीं रखा जा सकता। उसकी पहचान को जनता और मीडिया से तब तक सुरक्षित रखा जाना चाहिए, जब तक कि विशेष न्यायालय निर्देश न दे। यदि पीडि़त लड़की है, तो चिकित्सा परीक्षण एक महिला चिकित्सक करे और परीक्षण केवल माता-पिता या उस व्यक्ति की उपस्थिति में किया जाए, जिस पर बच्चा भरोसा करता है। यदि दोनों में से कोई भी नहीं है, तो चिकित्सा संस्थान के प्रमुख द्वारा नामित महिला की उपस्थिति में परीक्षण हो।

यह बात भी समझनी होगी कि केवल कानून इस समस्या का समाधान नहीं कर सकता। हमें बेहतर पुलिसिंग, सार्वजनिक स्थानों को छोटी बच्चियों के लिए सुरक्षित बनाने और अलग-अलग क्षेत्रों की चौबीसों घंटे निगरानी सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए। संदेश स्पष्ट रूप से जाना चाहिए कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। केवल कठोर दंड से यौन अपराध नहीं रुक सकते। इसके लिए समाज को भी ठोस प्रयास करने की आवश्यकता है। बच्चों को 'गुड टच और बैड टचÓ के बारे में घर और स्कूल में बताया जाना चाहिए।

विकास गुप्ता
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