scriptPATRIKA OPINION करना होगा रेलवे की सुरक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार | pThere will be a need to make extensive improvements in the security system of railways | Patrika News
ओपिनियन

PATRIKA OPINION करना होगा रेलवे की सुरक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार

हालांकि इसमें कोई संदेह नहीं है कि पिछले सालों में रेलवे ने हादसों की रोकथाम के इरादे से कई तकनीकी प्रबंध भी किए हैं। इसके बावजूद कभी मानवीय भूल से तो कभी तकनीकी खामी से होने वाले हादसे बता रहे हैं कि बुलेट ट्रेन के युग में जाने की तैयारी करने के बावजूद ट्रेनों के सफर को सुरक्षित बनाने की दिशा में काफी काम होना बाकी है।

जयपुरJun 17, 2024 / 08:26 pm

Gyan Chand Patni

तमाम प्रयासों के बावजूद सुरक्षित सफर का बंदोबस्त करना रेलवे के लिए चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। पश्चिम बंगाल में न्यू जलपाईगुड़ी के पास सोमवार की सुबह हुए हादसे ने रेलवे की सुरक्षा प्रणाली को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यू जलपाईगुड़ी और रंगापानी रेलवे स्टेशनों के बीच यह हादसा पटरी पर खड़ी यात्री गाड़ी को पीछे से एक मालगाड़ी के टक्कर मारने के कारण हुआ। हादसे की वजह तो जांच में सामने आएगी, लेकिन प्रारंभिक तौर पर इसकी वजह सिग्नल की खामी और मानवीय भूल को माना जा रहा है।
हादसा, मृतकों के परिजनों व घायलों को मुआवजे का ऐलान और जांच के आदेश। हर हादसे के बाद ये काम तुरत-फुरत होते हैं। लेकिन इस सवाल पर चिंता होना ज्यादा जरूरी है कि आधुनिकीकरण के तमाम दावों के बावजूद आखिर रेल प्रशासन ऐसे हादसों की रोकथाम क्यों नहीं कर पा रहा है? हालांकि इसमें कोई संदेह नहीं है कि पिछले सालों में रेलवे ने हादसों की रोकथाम के इरादे से कई तकनीकी प्रबंध भी किए हैं। इसके बावजूद कभी मानवीय भूल से तो कभी तकनीकी खामी से होने वाले हादसे बता रहे हैं कि बुलेट ट्रेन के युग में जाने की तैयारी करने के बावजूद ट्रेनों के सफर को सुरक्षित बनाने की दिशा में काफी काम होना बाकी है।
कंचनजंगा एक्सप्रेस हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों और घायलों की पीड़ा मुआवजे के छींटों से कम हो जाएगी, यह कल्पना करना ही व्यर्थ है। इस बात को समझना होगा कि भारतीय रेलवे की सुरक्षा प्रणाली में अभी चाक-चौबंद व्यवस्था होनी बाकी है। रेल मार्ग से सफर को अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। इसके बावजूद इस तरह के हादसे होना बंद न हों तो चिंता होना स्वाभाविक ही है। पिछले सालों में रेलवे ने ट्रेनों में ऐसे एलएचबी कोच भी लगाने चालू किए हैं जो हादसे के दौरान एक-दूसरे पर नहीं चढ़ते। पुराने कोच की जगह इस तरह के कोच लगाने के काम को और गति देने की भी जरूरत है। पिछले रेल हादसों से सबक लेना भी जरूरी है।
आम तौर पर देखने में यह आता है कि जांच और जिम्मेदारों को दंडित करने के ऐलान के बाद फिर से व्यवस्थाएं लापरवाही के उसी पुरानी ट्रैक पर लौट आती हैं। सुरक्षा में जरा-सी भी चूक कितनी भारी पड़ सकती है, यह इस हादसे से भी आसानी से समझा जा सकता है। रेल सफर को निरापद बनाने के लिए तकनीक के इस्तेमाल के साथ-साथ पटरियों, पुलों, रेलवे कोच और सबसे ज्यादा सिग्नल प्रणाली की नियमित जांच को भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

Hindi News/ Prime / Opinion / PATRIKA OPINION करना होगा रेलवे की सुरक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार

ट्रेंडिंग वीडियो