पिंड, पंथ और परिवार बनेंगे जीत का आधार

पिंड, पंथ और परिवार बनेंगे जीत का आधार

Amit Kumar Bajpai | Publish: Mar, 14 2019 04:21:28 PM (IST) | Updated: Mar, 14 2019 04:21:29 PM (IST) विचार

  • पंजाब : प्रधानमंत्री मोदी और केजरीवाल ने बिगुल फूंका
  • कैप्टन को माना जाता है सिद्दू से बेहतर राजनेता
  • रामरहीम के मुद्दे को लेकर भी बादल परिवार से खफा हैं लोग

आनंदमणि त्रिपाठी, पटियाला से

मैं एशिया के सबसे बड़े क्रीड़ा संस्थान, खिलाडिय़ों के लिए मक्का और कभी राजघराने का वैभव देख चुके महल में बने पुराने मोतीबाग के नेताजी सुभाष राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान में खड़ा हूं। दोपहर के एक बज रहे हैं और खिलाड़ी ट्रैक पर दौड़ लगा रहे हैं। इस ट्रैक के ठीक एक कोने पर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग हॉल हैं, जहां कुछ खिलाड़ी अपना दमखम बढ़ाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। कमोबेश पंजाब की राजनीति में कुछ ऐसी ही झलक दिखाई दे रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले माह जहां गुरदासपुर में रैली कर चुनावी शंखनाद कर दिया, वहीं बरनाला में आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने भी बिगुल फूंक दिया है। अब कांग्रेस के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर का आगाज बाकी है। खेल, जंग और राजनीति में दांवपेच बताए नहीं, दिखाए जाते हैं लेकिन तैयारियों से परिणाम का आकलन किया जा सकता है।

2014 में लोकसभा चुनाव में मालवा क्षेत्र में अपने नए आगाज से भूचाल लाने वाली आम आदमी पार्टी से जहां लोग निराश दिखाई दे रहे हैं, वहीं अकाली दल-भाजपा से भी लोगों को आस नहीं है। कांग्रेस 'बाइ डिफॉल्ट' ही मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है।

 

आजादी के बाद जब देश में कई जगह औद्योगिक शुरुआत की गई तो पंजाब में हरित क्रांति का आगाज हुआ...

पटियाला से महज पांच किलोमीटर दूर रवास गांव में जैसे ही कदम रखते हैं, लड़कियां अपने सिर पर लकडिय़ों का गट्ठर लिए हुए गुजरती दिख जाती हैं। पूछने पर बताया कि रोटी बनाएंगी। स्पष्ट है कि वे उज्ज्वल भविष्य की बाट जोह रही हैं। आगे बढ़ते हैं तो करीब 60 साल की बुजुर्ग महिला प्रेमा कहती हैं, यहां तो राजे (कैप्टन अमरिंदर सिंह) का राज चलेगा। अब बादल तो उड़ गया। वहीं, ऑटो चालक दिनेश कहते हैं कि राजे ने अपना वचन नहीं पूरा किया, इसका नुकसान तो होगा ही। इन सबके बीच आम आदमी पार्टी को लेकर अब लोगों की आस टूट चुकी है।

सियासी तौर पर नवजोत सिंह सिद्धू को कैप्टन अमरिंदर के बाद सबसे बेहतर नेता माना जा रहा है। देखना यह है कि नए मोती बाग महल (कैप्टन अमरिंदर सिंह का निवास) की राजनीति कांग्रेस में किस तरह करवट लेती है और चुनाव में इसका क्या रुख रहता है। और यह भी कि आमजन में अकाली दल-भाजपा से बेरुखी, आम आदमी पार्टी से भरोसा उठने और कांग्रेस की वादाखिलाफी के बीच समीकरण क्या रूप लेंगे।

पिंड: गांवों में अब भी रोजगार का इंतजार

आजादी के बाद जब देश में कई जगह औद्योगिक शुरुआत की गई तो पंजाब में हरित क्रांति का आगाज हुआ। पंजाब में खुशहाली आई लेकिन बाद में स्थिति बदल गई। खेती के अलावा कोई भी कार्य न आने के कारण गांवों में आई खुशहाली टिक नहीं पाई और अब स्थिति खराब हो चुकी है। विकास के नाम पर पानी की टंकियों पर कैंसर से बचने का संदेश लिखा हुआ दिख रहा है तो गांवों में अब भी रोजगार का इंतजार हो रहा है। गांवों में करीब दो करोड़ आबादी रहती है, लेकिन स्थिति बदतर है। रामगढ़ गांव के सुच्चा सिंह कहते हैं कि जीतने के बाद पिंड की तरफ कोई झांकता तक नहीं।

 

राम रहीम को माफी दिलाने को लेकर भी लोग बादल परिवार से खफा नजर आ रहे हैं...

पंथ: कांग्रेस के पक्ष में सिद्धू का दांव!

दलित राजनीति भले ही उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति में उभार लेती है, लेकिन सबसे ज्यादा दलित पंजाब में बसते हैं। विभिन्न डेरों से जुड़ा यह वर्ग कांग्रेस की तरफ झुकाव रखता आया है। राजनीतिक समीकरण में यह वर्ग काफी मायने रखता है। करतारपुरा कॉरिडोर को लेकर नवजोत सिंह सिद्धू का दांव भी कांग्रेस के पक्ष में जाता दिखाई दे रहा है। अकाली दल की बात करें तो बरगाडी कांड के कारण लोगों में काफी नाराजगी है, वहीं राम रहीम को माफी दिलाने को लेकर भी लोग बादल परिवार से खफा नजर आ रहे हैं। जसवंत सिंह कहते हैं कि जो पंथ का नहीं हुआ वो पंजाब का क्या होगा।

परिवार: किसान दिशाहीन, युवा भी भटके

किसान और बेरोजगार। यह पंजाब के दो परिवार हैं। किसान जहां घटती उपज और मिट्टी की बदहाली और कैंसर से परेशान है, वहीं युवा नशा, एड्स और बेरेाजगारी से। उपज बढ़ाने के लिए किसान जहां बैंकों से कर्ज लेकर फसल उगाने में बर्बाद हो रहा है, और दवाएं, बेतहाशा खाद डालने से जमीन बंजर हो रही है, वहीं युवा नौकरी की तलाश, नशा और फिर एड्स के जाल में फंस रहा है।

आलम यह है कि अब सैन्यबलों में भी पंजाब के युवकों की संख्या घटने लगी है। लुधियाना, गोविंदगढ़ और बटाला के उद्योगों में रोजगार खत्म हो चुका है। ऐसे में युवाओं को पंजाब में सिर्फ दो रास्ते दिखते हैं, संगीत और विदेश। गांव-गांव में आपको गायक मिल जाएंगे और चौराहे पर कनाडा जाने का पोस्टर। डकला गांव के किसान रूदूडूराम कहते हैं कि किसान कर्ज व कैंसर में मरा जा रहा है और बच्चों के पास कोई रोजगार है नहीं, किसान आत्महत्या न करें तो क्या करें।

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned