सवाल, कोरोना से लड़ाई में क्या अंधविश्वास आड़े आ रहा है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था, जिस पर पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं। पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: shailendra tiwari

Updated: 18 Sep 2020, 05:46 PM IST

जागरूकता और आत्मविश्वास जरूरी
इसमे कोई दो राय नही है कि अंधविश्वास के चलते भी कोरोना से लड़ाई में बाधा आ रही है। अंधविश्वास, भय और अशिक्षा के चलते कोरोना तेजी से फैलता दिख रहा है। यूपी् और बिहार में महिलाएं कोरोना संक्रमण को लेकर अंधविश्वास की शिकार हो रही हैं। वे समूह में एकत्रित होकर कोरोना वायरस को भगाने के लिए पूजा अर्चना करती हैं, जबकि हमें पता है कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सामाजिक दूरी जरूरी है। मुश्किल यह है कि यह बात फैलाई जा रही है कि कोरोना देवी के क्रोध के कारण बीमारी फैल रही है और पूजा करके देवी का क्रोध शांत कर दें, तो रोग खत्म हो सकता है। कोरोना महामारी से लडऩे के लिए अंधविश्वास नहीं, बल्कि जागरूकता और विश्वास जरूरी है।
-अशोक कुमार शर्मा, झोटवाड़ा, जयपुर
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शिक्षित लोगों ने भी 'कोरोना गो के नारे लगाए
अंधविश्वास हम भारतीयों के मन में जड़ें जमाकर बैठा है। ऐसे में अन्य बीमारियों के साथ ही कोरोना जैसी महामारी में भी लोग इसपर विश्वाास कर ही रहे हैं। कोरोना के शुरुआती दिनों में पढ़े-लिखे लोगों ने भी 'कोरोना गोÓ के नारे लगाए। थालियां बजाईं। कोरोना को देवी देवता मानकर पूजा करना, भेंट चढ़ाना जैसे कई उपाय कर इसका इलाज करने की कोशिश की लेकिन काम नही आया। सरकार को इस महामारी की रोकथाम के लिए जागरुकता अभियान चलाना चाहिए।
-विनोद कटारिया, रतलाम
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आस्था नहीं है अंधविश्वास
भारत में अंधविश्वास को लेकर लोगों की अपनी-अपनी राय रहती है, परन्तु इस समय ऐसा कुछ भी नहीं है। अगर आप गौर से देखते हों तो पता चलेगा कि कुछ लोग हैं, जो आस्था को अंधविश्वास का नाम देते हैं, जो एकदम गलत है। आस्था से तो लोगो में आत्मविश्वास बना हुआ है। इसी वजह से कोई भी व्यक्ति अपने मन से हार नहीं मान रहा है और यही सबसे महत्त्वपूर्ण है कोरोना से लडऩे के लिए।
-नयन पंड्या, बांसवाड़ा
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अंधविश्वास कोरोना में बड़ी बाधा
आज का युग तकनीक और विज्ञान का युग है, जिसमे अंधविश्वास की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। पिछले कई महीनों से पूरी दुनिया में कोरोना का प्रकोप जारी है। विदेशों और भारत में भी डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और जन प्रतिनिधियों ने इससे बचाव के लिए विभिन्न प्रकार से लोगों को जागरूक किया। फिर भी कुछ अंधविश्वासी लोग इसको लेकर जागरूक नहीं हुए। कोरोना से जंग जीतकर लौटने वाले रोगियों को हेय दृष्टि से देखा जाने लगा। कोरोना की देवी के रूप में पूजा की, विभिन्न प्रकार के हवन और पूजन किए, जबकि कोरोना का इलाज डॉक्टरों और उनके परामर्श से ही सम्भव है।
-वसीम अख्तर, मांगरोल, बारां।
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जागरूकता का अभाव
अंधविश्वास के कारण भी कोरोना से लड़ाई में बाधा आ रही है, क्योंकि लोग मरीज को तुरंत चिकित्सालय ले जाने की बजाय अपने हिसाब से इलाज करते रहते हैं। इससे कोरोना ज्यादा बढ़ रहा है। लोगों में जागरूकता का अब भी अभाव है,
-लक्ष्मण कुम्हार, बांय, चूरू
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व्यापक प्रचार जरूरी
देश के लोगों में अंधविश्वास कूट-कूट कर भरा हुआ है। खासकर ग्रामीण क्षेत्र में। आज पूरा विश्व कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से जूझ रहा है, लेकिन अंधविश्वास के चलते लोग इस वैश्विक महामारी से पीडि़त व्यक्ति के सही इलाज पर ध्यान नहीं दे रहे। इसके कारण देश में कोरोना मरीजों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए सरकार को योजना बद्ध रूप से व्यापक प्रचार-प्रसार कर इस महामारी को समाप्त करने के लिए सावधानी और उपचार के बारे में बताना चाहिए।
-शैलेन्द्र टेलर, गणेश नगर, उदयपुर
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शासन प्रशासन की विफलता
प्रदेश में कोराना व अंधविश्वास के मूल में शासन-प्रशासन की विफलता है। सरकारी चिकित्सालयों पर अविश्वास तथा उनकी लचर चिकित्सा व्यवस्था से कोरोना महामारी अनियंत्रित हुई है। अपनी नाकामी को छुपाने के लिए कोरोना से जारी लड़ाई में अंधविश्वास को जिम्मेदार ठहराना गलत है। शासन-प्रशासन की विफल प्रबंधन क्षमता ही कोरोना संक्रमण के बढ़ते आंकड़ों के लिए जिम्मेदार है।
-कैलाश सामोता, कुंभलगढ़, राजसमंद
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अंधिवश्वास नहीं, सरकारी तंत्र की अक्षमता जिम्मेदार
कोरोना की लड़ाई में अपवाद को छोड़ दें तो अंधविश्वास बाधा नहीं बन रहा है। मूल समस्या चिकित्सा व्यवस्था का अभाव, सरकार की संवेदनहीनता व आम आदमी की स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही है। बड़ी विडम्बना है कि कोविड-19 के युद्ध की हारावल पंक्ति में लडऩे वाले चिकित्सकों की कोरोना से हुई मौत तक का आंकड़ा सरकार के पास नहीं है। सरकारी तंत्र व आम जनता की जागरूकता और प्रयासों से इस लड़ाई को सफलता पूर्वक लड़ा जा सकता है।
-डॉ. ओमप्रकाश बर वड, झुन्झुनूं
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अभाव
कोरोना संकट के वक्त हमारे तौर तरीकों और आचरण ने दिखा दिया है कि हिन्दुस्तान में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की बजाय अंधविश्वास और रीति-रिवाज हावी हैं। इसीलिए कहीं धर्म के नाम पर निर्देशों से खिलवाड़ किया जा रहा है और धार्मिक आयोजन कोरोना से लड़ाई में हथियार का प्रतीक मानकर आयोजित किए जा रहे है। यहां यह समझना महत्वपूर्ण है कि धार्मिक विश्वास पर आधारित जमावड़े कोरोना जैसी संक्रामक बीमारियों के वाहक बनते हैं। मरीजों का बढ़ता आंकड़ा दर्शाता है कि जब-जब हमने निर्देशों के विरूद्ध जाकर भीड़ एकत्रित की है, तब-तब कोरोना ने विकराल स्वरूप दिखाया है।
-डॉ. अजिता शर्मा, उदयपुर
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कोरोना का फैलाव
ग्रामीण अंचलों में शिक्षा और जागरूकता के अभाव में कोरोना जैसी महामारी को ईश्वरीय इच्छा मानकर लोग स्वयं की दैनिक जीवन शैली में कोई भी परिवर्तन अपनाने के लिए तैयार नहीं होते हैं। रूढ़िवादी मान्यताएं प्रचलित होने से कोरोना का फैलाव तेज हो रहा है।
-बाबू बवंडर, पीपलू, टोंक
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अंधविश्वास से बचें
वैश्विक महामारी कॉविड-19 के चलते समग्र विश्व मेंं दहशत फैली हुई है। इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए लॉकडाउन किया गया, जो बचाव के लिए जरूरी भी था। कोरोना से बचने के लिए हैंड वॉश करना, मास्क की अनिवार्यता, सामाजिक दूरी बनाए रखना, अनावश्यक घर से ना निकलना जैसे उपाय जरूरी हैं। इस बीच कुछ ग्रामीण अंचलों में अंधविश्वास के कारण कोराना देवी के नाम से पूजा अर्चना की जा रही है। लोगों का मानना है कि इससे देवी प्रसन्न होगी और इस देश से चली जाएगी। अंधविश्वास नहीं जागरूकता और विश्वास की जरूरत है। यद्यपि जनचेतना में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रही है। फिर भी कहीं-कहीं अंधविश्वास के कारण इस लड़ाई में बाधा उत्पन्न हो रही है।
-विद्या शंकर पाठक, सरोदा डूंगरपुर
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वायरस को देवी माना
कई स्थानों पर महिलाएं कोरोना संक्रमण को लेकर अंधविश्वास का शिकार हो रही हैं। महिलाएं समूह में एकत्रित होकर कोरोना वायरस को भगाने के लिए पूजा अर्चना कर रही हैं। यह वाकई तकलीफदेह है कि महिलाओं ने अंधविश्वास के चलते कोरोना वायरस को देवी मान लिया है। इसका सबसे बड़ा कारण भारत में साक्षरता का कम होना है।
-दुर्गेश सारस्वत, हनुमानगढ
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अंधविश्वासी दूसरों के लिए भी खतरा
अंधविश्वासी लोग जादू-टोना-मंत्र से बीमारी दूर करने में विश्वास करते हैं। कुछ लोग अंधविश्वास के चलते वायरस से सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय तक नहीं करते। उनका कहना है कि भगवान की मर्जी होगी, तभी मौत आएगी। ऐसे लोग अपने लिए ही नहीं, दूसरों के लिए भी खतरा हैं।
-सीमा गुप्ता, अलवर
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करोना बनाम अंधविश्वास
करोना से डरे हुए अशिक्षित लोग अंधविश्वास में पड़कर झाड़-फूंक या कोरोना माई की पूजा कर रहे हैं। जानवरों की बलि भी दे रहे हैं। भीड़ के एकत्रित होने से करोना ने भी रफ्तार पकड़ ली है। सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क की उपेक्षा करके लोग महामारी की चपेट में आ रहे हैं और अंधविश्वास में जकड़े जा रहे हैं।
-अर्विना, ग्रेटर नोएडा
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शासन प्रशासन की जिम्मेदारी
अंधविश्वास के चलते कोरोना संक्रमण में तेजी आई है। असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में अंधविश्वास के चलते कोरोना देवी की पूजा की जा रही है। इसमें न तो वे मास्क पहनते हैं और न ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करती। इस वजह से संक्रमण फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। कई लोग तरह तरह की अफवाहें फैलाकर अंधविश्वास को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसे भोले भाले लोग सही मान लेते हैं। ऐसे में जरूरी है की शासन-प्रशासन अंधविश्वास को फैलने से रोके एवं अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई करे।
-सुदर्शन सोलंकी, मनावर, धार, मप्र
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शिक्षा के बावजूद अंधविश्वास
कई लोग शिक्षित होने के बावजूद अंधविश्वास केदलबदल में इतना घुस गए हं कि उससे बाहर निकलना उनके लिए मुश्किल हो गया है। कई लोग यह कहते हुए मिल जाएंगे किमाता सब ठीक करेगी। जोधपुर में जब बम गिरे तब भी कुछ नहीं हुआ तो कोरोना क्या चीज है। माताजी ने उस वक्त भी हमारी रक्षा की थी। सरकार को चाहिए कि वह जनता को सत्य से अवगत कराए। जनता को उसके हाल पर न छोड़े । जरूरत हो तो फिर लॉकडाउन लगाया जाए।
-सुनील कुमार माथुर, पालरोड, जोधपुर
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अंधविश्वास के दुष्परिणाम
कई जगह अंधविश्वास की प्रवृत्तियां व शिक्षा की कमी कोरोना जैसी महामारी की जंग को जीतने में बाधक बन रही हैं। अंधविश्वास की कई धारणाएं चिकित्सा तंत्र पर विश्वास कम करती हैं।
-बिहारी लाल बालान, लक्ष्मणगढ़, सीकर
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बाहर निकलना मजबूरी
आज हमारे समाज में अधिकतर लोग शिक्षित हैं और एक विकसित सोच रखते हैं। हां, ग्रामीण परिवेश के कुछ वर्गों के लिए यह हो सकता है कि वे झाड़-फूंक के जंजाल में फंस जाएं, पर मुख्य कारण आजीविका का है। रोजगार के कारण लोग घर से बाहर निकलते हैं और हल्की सी असावधानी से कोरोना की चपेट में आ जाते हैं।
-भागीरथ शर्मा, रायसिंहनगर, श्री गंगानगर
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चिकित्सा सुविधाओं का अभाव
गांव-कस्बों मेंं शिक्षा का अभाव है। सरकार कोरोना के बारे में गांव-कस्बो में प्रचार ठीक से नहीं कर रही है। वहां स्वस्थ सुविधाओं का अभाव है। इससे लोग अंधविश्वास की चपेट में आ जाते हैं।
-राजकुमार तिवारी, ग्राम इटावा, रीवा, मप्र
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जड़ों पर रखें विश्वास
कोरोना के कारण हम एक बार फिर अपनी संस्कृति के करीब आए हैं। पश्चिम के प्रभाव के कारण हम अपने तौर तरीकों को बेवजह का आडम्बर समझने लगे थे। आज के हालात हमें ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व को इन्हीं तरीकों का पालन करने के लिए बाध्य कर रहे हैं। अंधविश्वास नहीं, बल्कि अपनी जड़ों पर विश्वास कोरोना से हमें सुरक्षित रख सकता है। हम हमारे नियमों जैसे जूते-चप्पल घर के बाहर रखना, बाहर से आते ही हाथ-पैर धोना, बाहर से आई चीजों को साफ करके उपयोग में लेना जैसी बातों का ध्यान रखें। इससे हम निश्चित ही स्वस्थ रहेंगे।
-सोनाली शर्मा, रामगंजमण्डी, कोटा

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