सवाल जीडीपी की गिरावट के लिए कौन जिम्मेदार, जवाब नीतियां

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था कि आखिर देश में गिरती हुई जीडीपी के लिए जिम्मेदार कौन हैं। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रिया।

By: shailendra tiwari

Updated: 02 Sep 2020, 05:06 PM IST

नीतियां जिम्मेदार
देश में लगातार अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है। इसके लिए सरकार की नीतियां सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं। पहले नोटबंदी फिर जीएसटी और उसके बाद बिना तैयारी के लॉकडाउन। इन सभी ने देश की आर्थिक स्थिति को खराब कर दिया है। इसके साथ ही सरकार के पास इनसे निपटने के लिए मौजूदा टीम में बेहतर लोगों की कमी भी है।

अजय कुमार, बांसवाडा

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नए सिरे से सोचने की जरूरत
हमें एक बार नए सिरे से सोचने की जरूरत है कि आखिर कैसे हम खुद को वापस खड़ा करें। यह मुश्किल वक्त है, लेकिन इसको यूं ही छोड़ देना भी ठीक नहीं है। सरकार को गंभीर प्रयास करने चाहिए और लोगों को राहत देने की कोशिश करनी चाहिए। लॉकडाउन के दौरान सरकार ने जो पैकेज दिया, वह हवा—हवाई था, जिसके कारण किसी को कोई फायदा नहीं मिला है। हमें ऐसी नीतियों की जरूरत है, जिसका फायदा सीधे आम आदमी को मिले।
मेघा, होशंगाबाद

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कुप्रबंधन जिम्मेदार
मेरी नजर में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में गिरावट के लिए केंद्र का वित्तीय कुप्रबंधन जिम्मेदार है। दोषपूर्ण आर्थिक नीतियां, नोटबंदी, गलत जीएसटी व लॉकडाउन के गलत फैसलों ने देश की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया है। इसी के चलते जीडीपी में इतनी भारी गिरावट हुई है। हर सेक्टर में गिरावट आना अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक है। कोरोना काल ने अर्थव्यवस्था को मंदी में धकेलने में कोढ़ में खाज का काम किया है। सरकार को रोजगार देने व अर्थव्यवस्था को मंदी से उबारने के लिए घरेलू मांग को बढ़ाने पर जोर देने के कदम उठाने होंगे। इसके लिए जरूरी है कि सरकारी व्यय में वृद्धि की जाए।
-शिवजी लाल मीना, मानसरोवर, जयपुर
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ऐतिहासिक गिरावट
जीडीपी ऋणात्मक हो गई है, जो बहुत चिंता की बात है। आजादी के बाद पहली बार इतनी बड़ी गिरावट देखी गई है। पहले ही देश के आर्थिक हालात ठीक नहीं थे, ऊपर से कोरोना की मार ने बेहाल कर दिया। राहत पैकेज का भी अपेक्षित सकारात्मक परिणाम देखने को नहीं मिला। मंदी का सबसे अधिक असर असंगठित क्षेत्र पर पड़ा। संगठित क्षेत्र भी चपेट में आ गया। युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा। नौकरी पेशा लोग अपनी नौकरी खो रहे हंै। कृषि क्षेत्र के हालात थोड़े ठीक हैं। सरकार को जल्द से जल्द जनता की जेब में पैसा पहुंचाना होगा। कोरोना के साथ हमें अर्थव्यवस्था को भी संभालना होगा।
-अभिषेक डांगी, झुंझुनू
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गलत आर्थिक नीतियां
नोटबंदी और जीएसटी जैसे निर्णयों की चर्चा चलते ही इन दोनों ही नीतियों को अर्थव्यवस्था में चल रही गिरावट का जिम्मेदार बताया जाता है। उधर सरकार अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती के लिए वैश्विक कारणों को जिम्मेदार बता रही है। हकीकत यह है कि यह मंदी वैश्विक कारणों से नहीं, बल्कि आंतरिक आर्थिक नीतियों की अनियमितताओं की वजह से आई है। समय-समय पर सरकार द्वारा आम जनता को ध्यान में न रखते हुए निर्णय लिए गए हंै। भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने सवाल यह है कि इस मंदी से कैसे निपटा जाए? यह तथ्य तो बिल्कुल स्पष्ट है कि किसी भी आर्थिक मंदी से निपटने के लिए निजी क्षेत्र नहीं, बल्कि सरकार ही आगे आती है। सरकार को सही फैसले लेने होंगे। सरकार को खर्च बढ़ाना होगा। यह भी ध्यान रखना होगा कि राजकोषीय घाटा बहुत अधिक न हो जाए। सरकार को रोजगार सृजन पर अधिक जोर देना होगा।
-डॉ. अजिता शर्मा, उदयपुर
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गलत फैसलों का परिणाम
भारतीय जीडीपी में गिरावट का मुख्य कारण सरकार का गैर जिम्मेदार होना है। जीडीपी में गिरावट पिछले तीन सालों से चल रही है। सरकार में शामिल नेताओं का ध्यान सिर्फ सत्ता पर काबिज रहना हो गया है। कोरोना काल की वजह से भी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। भारत सरकार ने गलत फैसले लिए। जैसे नोटबंदी और जीएसटी को गलत तरीके से लागू करना।
मिथलेश मोरोडिया, बहरोड़, अलवर
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सबको साथ लेकर चलें
सरकार की गलत आर्थिक नीतियां जीडीपी में गिरावट के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है। सरकार के हस्तक्षेप के कारण ही रिजर्व बैंक के कई अधिकारियों ने समय से पहले अपने पद से इस्तीफे दे दिए। बेहतर तो यह था कि बेकार की भाषणबाजी की बजाय आर्थिक नीतियों पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित आर्थिक विशेषज्ञ को साथ लेकर समस्या का समाधान खोजा जाता। अब भी समय है सबको साथ लेकर हालाता को संभालना चाहिए।
-धनराज बाकोलिया, लोसल, सीकर
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भयंकर वित्तीय संकट
वर्तमान वित्त वर्ष की प्रथम तिमाही में की जीडीपी में भारी गिरावट देश में भयंकर वित्तीय संकट का संकेत है। इसका प्रमुख कारण है सरकार द्वारा देश में अनियोजित लॉकडाउन कर देना। उद्योग, व्यापार एवं सेवा क्षेत्र के ठप होने से राजस्व संग्रहण में कमी आई है। इससे देश में वित्तीय संकट उत्पन्न हो गया है। लगातार राजस्व घाटा बढ़ रहा है। आज स्थिति यह हो गई है कि सरकार केंद्रीय करों में राज्यों के हिस्से का भी भुगतान नहीं कर पा रही है। लगातार देश ऋण के बोझ तले दब रहा है। बेरोजगारी अपने चरम पर है। सरकार समय रहते अर्थव्यवस्था को उबारने का हर संभव प्रयास करे।
-तेजपाल गुर्जर, हाथीदेह, श्रीमाधोपुर
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कोरोना ने कमर तोड़ी
पिछले वर्ष भी जीडीपी में कमी आई थी, जो सरकारी नीतियों का परिणाम थी। कोरोना और लॉकडाउन ने तो कमर ही तोड़ दी। इस समय संपूर्ण विश्व की जीडीपी ऋणात्मक है। इसके लिए सिर्फ सरकार को जिम्मेदार ठहरालर उचित नहीं।
-गोपाल यादव, गंजपारा, दुर्ग
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लॉकडाउन से बढ़ा संकट
हमारे देश मे बड़ी जनसंख्या रोज कमाने खाने वालों की है। संपूर्ण तालाबंदी के दौर में एक बड़ा वर्ग ना ही पैसे कमा पा रहा था और ना ही खर्च कर पा रहा था। इस दौरान पूर्ण लॉकडाउन की स्थिति रही, तो उत्पादन तो हुआ नहीं और ना ही मांग बढ़ी, तो जीडीपी कहां से बढ़ेगी? कोरोना महामारी ने वैश्विक स्तर पर चौतरफा तबाही मचाई है, जिसका परिणाम आंकड़ों के रूप में सामने आ रहा हैं।
-शिवम अवस्थी, छत्तीसगढ़
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गलत नीतियों का परिणाम
जीडीपी बहुत हद तक केंद्र की नीतियों से प्रभावित होती है। जीडीपी का तात्पर्य विकास दर से है। नोटबंदी तथा जीएसटी के कारण हमारे छोटे उद्योग या कुटीर उद्योग कहीं ना कहीं पहले ही पीछे छूट़ चुके हैं। देश का विनिर्माण क्षेत्र कमजोर होने से देश कोरोना के दंश को संभाल नहीं पाया और जीडीपी धड़ाम से आ गिरी।
-घनश्याम पाराशर, करौली
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केंद्र का अनुचित रवैया
पहले केन्द्र कहता था कि जीएसटी लागू होने पर जिन राज्यों को क्षति होगी, उनकी 5 साल तक क्षति पूर्ति की जाएगी। अब नाकामी छिपा कर यह कहना कि केंद्र बाध्य नहीं है, सरासर गलत है । राज्य सरकारें कोरोना से लडऩे के लिए भारी धनराशि व्यय की जा रही है। केंद्र को अपने वादों से पीछे हटना सरासर गलत है। अब जैसे भी हो इसका हल केंद्र सरकार को ही निकालना चाहिए ।
-प्रकाश चन्द्र वर्मा, बीकानेर
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ऐतिहासिक गिरावट
कोविड -19 वैश्विक महामारी के चलते समूचा विश्व संक्रमण के दौर से गुजर रहा। कोराना संकट की वजह से पहली तिमाही में ऐतिहासिक गिरावट आई है। कोराना वायरस से बचाव के लिए लॉकडाउन कर दिया गया। उत्पादन और आय के सभी स्रोत बंद हो गए। इसके कारण सकल घरेलू उत्पाद में कमी आई।
-विद्याशंकर पाठक, सरोदा, डूंगरपुर
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तालमेल का अभाव
जीडीपी की गिरावट के लिए कम से कम आम जनता तो जिम्मेदार नहीं है। राज्यों की सरकारों और केंद्र के बीच तालमेल नहीं है। रही सही कसर कोरोना ने पूरी कर दी है।
-राम नरेश गुप्ता, सोडाला, जयपुर
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गलत नीतियां जिम्मेदार
जीडीपी में गिरावट की मुख्य जिम्मेदार सरकार की गलत नीतियां हैं। बढ़ती बेरोजगारी और औद्योगिक उत्पादन में गिरावट से हाल खराब हैं। जीडीपी में वूद्धि के लिए मुख्यत: सरकार की नीतियों में सुधार की आवश्यकता है।
-ईश्वर लाल डामोर, घाटोल, बांसवाड़ा
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चुनौतीपूर्ण समय
जीडीपी में गिरावट सरकार की गलत नीतियों का नतीजा है। कृषि क्षेत्र को छोड़कर बाकी सभी सेक्टर को भारी मार खानी पड़ी। सब जगह गिरावट हुई, जिससे अर्थव्यवस्था चरमरा गई। आने वाला समय भी चुनौतीपूर्ण है।
-गोपाल अरोड़ा, लौहरो की गली, जोधपुर
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सरकार के फैसलों पर सवाल
नोटबंदी ने बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाया। जीएसटी का सही तरीके से क्रियान्वयन न होने के कारण व कोरोना महामारी ने हालत बिगाड़ दी। सरकार के आर्थिक फैसले सवालों के घेरे में हैं।
-करण सोलंकी, तखतगढ़, पाली
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केंद्र सरकार जिम्मेदार
जीडीपी में गिरावट के लिए सीधे-सीधे केंद्र सरकार जिम्मेदार है। सरकार की गलत नीतियों से देश का यह हाल हो गया है। वर्ष 2013 में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कहा था कि जीडीपी गिरती है, तो पीएम का कद भी गिरता है।
-तनसुख मेघवाल, फलोदी
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कोरोना से बिगड़े हालात
जीडीपी में गिरावट के लिए केंद्र सरकार नहीं, कोरोना वायरस महामारी और इसकी वजह से लगा लॉकडाउन जिम्मेदार है। अब जब लॉकडाउन हटा लिया गया है, तब आशा है कि धीरे-धीरे जीडीपी में सुधार आएगा।
-राम मूरत , इंदौर
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ठोस कदम की जरूरत
पहली तिमाही में जीडीपी में भारी गिरावट का मतलब हैं कि ज्यादातर सेक्टर में उत्पादन और आय का घटना। अंतत: लोगों की नौकरियां जाएंगी व बेरोजगारी में वृद्धि होगी। इसमें कोराना महामारी ने अपनी अहम भूमिका अदा की है। भारत को विकास दर में वृद्धि करनी है, तो अर्थव्यवस्था में मौजूदा नकारात्मक धारणाओं को समाप्त करना होगा। केन्द्र सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए ठोस कदम उठाए।
-मुकेश कुमावत, जयपुर
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सकारात्मक माहौल जरूरी
जीडीपी में गिरावट आने के लिए मुख्य रूप से कोरोना और मंदी जिम्मेदार है। अब सरकार को विशेष प्रयास करने होंगे। जीडीपी बढ़ाने के लिए एक सकारात्मक माहौल भी तैयार करना होगा।
-अमित दीवान भोपाल
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लॉकडाउन से बिगड़े हालात
लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था चौपट हो गई। बड़ी संख्या में लोग बेराजगार हो गए। उद्योग बंद हो गए। सरकार को बहुत होशियारी से हालात संभालने होंगे, वरना देश में अराजकता पैदा हो सकती है।
-शैलेंद्र गुनगुना, झालावाड़

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